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भारतीय सेना के 5 आईबीजी और फायर सपोर्ट ग्रुप की कमान 1 जुलाई से मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों को

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भारतीय सेना के 5 आईबीजी और फायर सपोर्ट ग्रुप की कमान 1 जुलाई से मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों को

सारांश

भारतीय सेना ने 1 जुलाई से पूर्वी सेक्टर के माउंटेन स्ट्राइक कोर को पाँच आईबीजी और एक फायर सपोर्ट ग्रुप में बदल दिया — डिवीजन की पूरी परत हटाकर। यह चीन की कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के जवाब में उठाया गया सबसे बड़ा संरचनात्मक कदम है, जो युद्धक्षेत्र में तेज़ और एकीकृत कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।

मुख्य बातें

1 जुलाई 2025 से छह मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों ने पाँच आईबीजी और एक फायर सपोर्ट ग्रुप की कमान संभाली।
पूर्वी सेक्टर के माउंटेन स्ट्राइक कोर को सबसे पहले आईबीजी ढाँचे में बदला गया; पारंपरिक डिवीजन संरचना समाप्त।
प्रत्येक आईबीजी में लगभग 5,500 से 6,000 सैनिक — इन्फैंट्री, टैंक, आर्टिलरी, हेलीकॉप्टर और लॉजिस्टिक्स एकीकृत।
फायर सपोर्ट ग्रुप (एफएसजी) सभी आईबीजी के लिए साझा फायरपावर पूल का काम करेगा — लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी, रॉकेट लॉन्चर और प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार एकीकृत।
चीन की पीएलए ने शिनजियांग में 4 डिवीजनों को कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड में बदला — भारत का आईबीजी मॉडल इसी के जवाब में विकसित।
'हिमविजय' युद्धाभ्यास में आईबीजी का पहला सफल ट्रायल चीन सीमा के पास किया जा चुका है।

भारतीय थलसेना ने 1 जुलाई 2025 से अपनी रणनीतिक संरचना में एक ऐतिहासिक बदलाव लागू किया है — पाँच इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) और एक फायर सपोर्ट ग्रुप (एफएसजी) की कमान छह मेजर जनरल रैंक के अधिकारियों को सौंप दी गई है। यह कदम चीन की वेस्टर्न थिएटर कमांड में बढ़ती सैन्य तैनाती और उसके कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड मॉडल के सीधे जवाब में उठाया गया है।

आईबीजी क्या है और यह क्यों बनाया गया

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) का मूल उद्देश्य सेना की अलग-अलग लड़ाकू क्षमताओं — इन्फैंट्री, आर्मर्ड, आर्टिलरी और आर्मी एविएशन — को एक एकीकृत कमान के अंतर्गत लाना है। अब तक ये सभी यूनिटें अलग-अलग संरचनाओं में तैनात रहती थीं और युद्ध की स्थिति में उन्हें एकजुट करने में समय लगता था। आईबीजी व्यवस्था में ये सभी शांतिकाल में भी एक साथ रहेंगी और साझा युद्धाभ्यास करेंगी, जिससे रैपिड रिस्पॉन्स की क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

प्रत्येक आईबीजी में लगभग 5,500 से 6,000 सैनिक होंगे, जिनमें पैदल सैनिक, इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल, टैंक, आर्टिलरी गन, हेलीकॉप्टर, इंजीनियर्स और लॉजिस्टिक्स यूनिटें शामिल हैं। हर आईबीजी का स्ट्रक्चर उस क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और ऑपरेशनल जरूरतों के अनुसार अलग-अलग होगा।

पूर्वी सेक्टर से हुई शुरुआत — डिवीजन की परत समाप्त

फिलहाल पूर्वी सेक्टर में स्थित माउंटेन स्ट्राइक कोर को सबसे पहले आईबीजी ढाँचे में बदला गया है। इसके तहत पाँच आईबीजी और एक फायर सपोर्ट ग्रुप का गठन किया गया है। गौरतलब है कि पारंपरिक सैन्य व्यवस्था में एक कोर के तहत डिवीजन और फिर डिवीजन के तहत ब्रिगेड होती थी। आईबीजी मॉडल में डिवीजन की यह पूरी परत समाप्त हो गई है, जिससे निर्णय लेने की गति और कार्रवाई की तत्परता दोनों में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है।

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सेना पश्चिमी और पूर्वी दोनों सीमाओं पर आईबीजी तैनात करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। हाई एल्टीट्यूड युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए पहले से गठित माउंटेन कोर के तहत ही ये आईबीजी बनाए जा रहे हैं।

फायर सपोर्ट ग्रुप — आईबीजी का साझा फायरपावर पूल

पाँच आईबीजी के साथ-साथ एक अलग फायर सपोर्ट ग्रुप (एफएसजी) का भी गठन किया गया है, जिसकी कमान भी 2-स्टार जनरल यानी मेजर जनरल रैंक के अधिकारी के पास है। एफएसजी को युद्धक्षेत्र में सेना की लॉन्ग-रेंज फायरपावर का केंद्र बनाया गया है।

इसमें लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी गन, मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार और अत्याधुनिक सर्वेलांस सिस्टम को एक ही कमान के तहत एकीकृत किया गया है। यह ग्रुप जरूरत के अनुसार किसी भी आईबीजी को तत्काल फायर सपोर्ट उपलब्ध कराएगा — यानी यह सभी आईबीजी के लिए एक कॉमन फायरपावर पूल की भूमिका निभाएगा। इससे अलग-अलग फॉर्मेशन से तोपखाना या रॉकेट सिस्टम जुटाने में लगने वाला समय बचेगा और कमांडर को कम समय में कहीं अधिक सटीक फायरपावर मिलेगी।

चीन की चुनौती और भारत का जवाब

चीन ने अपनी पूरी सैन्य संरचना को पाँच थिएटर कमांड में पुनर्गठित किया है। भारतीय सीमा से सटी वेस्टर्न थिएटर कमांड में वह लगातार सैन्य तैनाती और स्ट्रक्चर में बदलाव कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, शिनजियांग मिलिट्री डिस्ट्रिक्ट में पीएलए (People's Liberation Army) ने अपनी चार डिवीजनों — 4वीं मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री और 6वीं, 8वीं तथा 11वीं मोटराइज्ड इन्फैंट्री डिवीजन — को कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड में बदल दिया है।

भारतीय सेना ने इस बदलाव का अध्ययन कर आईबीजी का विचार पहले ही विकसित कर लिया था। 'हिमविजय' नाम के युद्धाभ्यास के दौरान चीन सीमा के पास आईबीजी का पहली बार सफल ट्रायल किया गया था, जिसने इस मॉडल की व्यावहारिकता को साबित किया।

आगे की राह

भारतीय सेना का अगला लक्ष्य पश्चिमी सीमा पर भी इसी तर्ज पर आईबीजी तैनात करना है। आईबीजी ढाँचे के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद भारतीय सेना की युद्धक क्षमता, प्रतिक्रिया की गति और बहु-क्षेत्रीय संचालन की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — क्या पीसटाइम एकीकरण वास्तव में हाई-एल्टीट्यूड युद्ध में समन्वय की खामियाँ दूर करेगा? डिवीजन परत हटाने से कमांड चेन छोटी होगी, पर इसके लिए मेजर जनरल स्तर पर असाधारण बहु-शाखा नेतृत्व क्षमता चाहिए जो पारंपरिक प्रशिक्षण में दुर्लभ रही है। चीन की कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड के मुकाबले भारत का जवाब समयोचित है, परंतु पश्चिमी सीमा पर विस्तार की गति और बजटीय प्रावधान — दोनों पर अभी स्पष्टता नहीं है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (आईबीजी) क्या होता है?
आईबीजी एक एकीकृत युद्धक इकाई है जिसमें इन्फैंट्री, टैंक, आर्टिलरी, हेलीकॉप्टर और लॉजिस्टिक्स एक ही कमान के तहत काम करते हैं। इसमें लगभग 5,500 से 6,000 सैनिक होते हैं और यह रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स की तरह कार्य करता है।
भारतीय सेना ने आईबीजी 1 जुलाई 2025 से क्यों लागू किया?
चीन ने अपनी वेस्टर्न थिएटर कमांड में डिवीजनों को कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड में बदल लिया है, जिससे उसकी युद्धक प्रतिक्रिया तेज़ हुई है। भारतीय सेना ने इसी चुनौती के जवाब में आईबीजी मॉडल विकसित किया और 1 जुलाई से इसे पूर्वी सेक्टर के माउंटेन स्ट्राइक कोर में लागू किया।
फायर सपोर्ट ग्रुप (एफएसजी) आईबीजी से कैसे अलग है?
एफएसजी सभी आईबीजी के लिए एक साझा फायरपावर पूल है जिसमें लॉन्ग-रेंज आर्टिलरी, मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और प्रिसिजन स्ट्राइक हथियार एकीकृत हैं। यह जरूरत के अनुसार किसी भी आईबीजी को तत्काल फायर सपोर्ट देता है, जबकि आईबीजी स्वयं एक स्वतंत्र युद्धक इकाई है।
आईबीजी लागू होने से पारंपरिक सैन्य संरचना में क्या बदला?
पारंपरिक व्यवस्था में कोर के तहत डिवीजन और फिर ब्रिगेड होती थी। आईबीजी मॉडल में डिवीजन की पूरी परत समाप्त हो गई है, जिससे निर्णय लेने की गति और कार्रवाई की तत्परता बढ़ेगी।
आईबीजी का परीक्षण पहले कब किया गया था?
भारतीय सेना ने चीन सीमा के पास 'हिमविजय' नाम के युद्धाभ्यास के दौरान आईबीजी का पहला सफल ट्रायल किया था। इसी अभ्यास ने इस मॉडल की व्यावहारिकता को साबित किया और पूर्ण क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त किया।
राष्ट्र प्रेस
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