चिलिमे सुरंग बचाव अभियान: भारतीय दल ने की गहरी पैठ, भारी उपकरणों के लिए अस्थायी ट्रैक तैयार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सुरंग बचाव दल ने 5 सितंबर को नेपाल के रसुवा जिले स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में और गहराई तक प्रवेश करते हुए बचाव अभियान को नई गति दी। 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से फंसे लोगों की तलाश जारी है और भारी उपकरण पहुँचाने के लिए एक अस्थायी ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
बचाव दल ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियाँ स्थापित की हैं और जलमग्न तथा अवरुद्ध हिस्सों से पानी निकालने के लिए अस्थायी फ्लोट और पंप तैनात किए गए हैं। सुरंग के प्रभावित खंडों तक भारी मशीनरी की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी मार्ग का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
चिलिमे जलविद्युत परियोजना स्थल, जो स्याब्रुबेसी गाँव के निकट स्थित है, उन सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल था जहाँ अगस्त की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित और सुलभ बनाकर खोज कार्य को और तेज़ करना है।
भारतीय राजदूत की प्रतिक्रिया
नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'नेपाली सेना के साथ काम कर रही भारतीय सुरंग बचाव टीम ने कल चिलिमे सुरंग में और गहराई तक खुदाई करके पानी निकाला। सुरंग तक अधिक भारी उपकरण पहुँचाने के लिए एक अस्थायी मार्ग भी बनाया जा रहा है और टीम के डॉक्टरों ने स्थानीय समुदाय के लिए एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया।'
यह बयान इस बात का प्रमाण है कि भारत-नेपाल के बीच बचाव अभियान में समन्वय किस स्तर पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि दोनों देशों के दल मिलकर न केवल सुरंग में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, बल्कि व्यापक राहत कार्य भी चला रहे हैं।
चिकित्सा सहायता और राहत कार्य
विशेष बचाव दल के साथ-साथ उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों और पैरामेडिक्स से युक्त भारतीय चिकित्सा दल भी नेपाल में सक्रिय हैं। ये दल बाढ़ से विस्थापित और प्रभावित स्थानीय निवासियों को आपातकालीन उपचार, चिकित्सा सहायता और मानवीय सहायता प्रदान कर रहे हैं।
भारत ने अब तक नेपाल को बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है, जिसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएँ, शल्य चिकित्सा उपकरण, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, कंबल और जल शोधन की गोलियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 166 भारतीय नागरिकों को विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरक्षित निकाला जा चुका है।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं। स्थानीय समुदायों को न केवल बचाव की ज़रूरत है, बल्कि बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की भी सख्त दरकार है। भारतीय चिकित्सा दल द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर इस कमी को कुछ हद तक पूरा कर रहे हैं।
क्या होगा आगे
अस्थायी ट्रैक के पूरा होने के बाद भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुँचाया जाएगा, जिससे खोज अभियान की गति और तेज़ होने की उम्मीद है। भारतीय और नेपाली दल मिलकर जलमग्न और मलबे से भरे खंडों को साफ करने में जुटे हैं ताकि अभी भी फंसे लोगों तक पहुँचा जा सके।