5 सितंबर 2026
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चिलिमे सुरंग बचाव अभियान: भारतीय दल ने की गहरी पैठ, भारी उपकरणों के लिए अस्थायी ट्रैक तैयार

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चिलिमे सुरंग बचाव अभियान: भारतीय दल ने की गहरी पैठ, भारी उपकरणों के लिए अस्थायी ट्रैक तैयार

सारांश

चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारतीय दल ने नेपाली सेना के साथ मिलकर अभियान तेज़ किया है — सुरंग में गहरी पैठ, अस्थायी ट्रैक निर्माण और स्वास्थ्य शिविर एक साथ चल रहे हैं। यह 26 अगस्त की विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत का अब तक का सबसे बड़ा बहु-आयामी राहत प्रयास है।

मुख्य बातें

भारतीय सुरंग बचाव दल ने 5 सितंबर को चिलिमे सुरंग में और गहराई तक प्रवेश किया।
भारी उपकरणों की आवाजाही के लिए अस्थायी ट्रैक का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है।
सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियाँ , अस्थायी फ्लोट और पंप तैनात किए गए हैं।
भारतीय चिकित्सा दल ने स्थानीय समुदाय के लिए स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया।
भारत ने अब तक 166 भारतीय नागरिकों को बचाया और व्यापक राहत सामग्री भेजी।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्र: रसुवा जिले का स्याब्रुबेसी गाँव , जहाँ 26 अगस्त को बाढ़ आई थी।

भारतीय सुरंग बचाव दल ने 5 सितंबर को नेपाल के रसुवा जिले स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में और गहराई तक प्रवेश करते हुए बचाव अभियान को नई गति दी। 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद से फंसे लोगों की तलाश जारी है और भारी उपकरण पहुँचाने के लिए एक अस्थायी ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है।

मुख्य घटनाक्रम

बचाव दल ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियाँ स्थापित की हैं और जलमग्न तथा अवरुद्ध हिस्सों से पानी निकालने के लिए अस्थायी फ्लोट और पंप तैनात किए गए हैं। सुरंग के प्रभावित खंडों तक भारी मशीनरी की पहुँच सुनिश्चित करने के लिए अस्थायी मार्ग का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

चिलिमे जलविद्युत परियोजना स्थल, जो स्याब्रुबेसी गाँव के निकट स्थित है, उन सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल था जहाँ अगस्त की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित और सुलभ बनाकर खोज कार्य को और तेज़ करना है।

भारतीय राजदूत की प्रतिक्रिया

नेपाल में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'नेपाली सेना के साथ काम कर रही भारतीय सुरंग बचाव टीम ने कल चिलिमे सुरंग में और गहराई तक खुदाई करके पानी निकाला। सुरंग तक अधिक भारी उपकरण पहुँचाने के लिए एक अस्थायी मार्ग भी बनाया जा रहा है और टीम के डॉक्टरों ने स्थानीय समुदाय के लिए एक स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया।'

यह बयान इस बात का प्रमाण है कि भारत-नेपाल के बीच बचाव अभियान में समन्वय किस स्तर पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि दोनों देशों के दल मिलकर न केवल सुरंग में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं, बल्कि व्यापक राहत कार्य भी चला रहे हैं।

चिकित्सा सहायता और राहत कार्य

विशेष बचाव दल के साथ-साथ उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों और पैरामेडिक्स से युक्त भारतीय चिकित्सा दल भी नेपाल में सक्रिय हैं। ये दल बाढ़ से विस्थापित और प्रभावित स्थानीय निवासियों को आपातकालीन उपचार, चिकित्सा सहायता और मानवीय सहायता प्रदान कर रहे हैं।

भारत ने अब तक नेपाल को बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है, जिसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएँ, शल्य चिकित्सा उपकरण, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, कंबल और जल शोधन की गोलियाँ शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 166 भारतीय नागरिकों को विनाशकारी बाढ़ के बाद सुरक्षित निकाला जा चुका है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल के पहाड़ी इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन से हज़ारों लोग प्रभावित हुए हैं। स्थानीय समुदायों को न केवल बचाव की ज़रूरत है, बल्कि बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की भी सख्त दरकार है। भारतीय चिकित्सा दल द्वारा आयोजित स्वास्थ्य शिविर इस कमी को कुछ हद तक पूरा कर रहे हैं।

क्या होगा आगे

अस्थायी ट्रैक के पूरा होने के बाद भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुँचाया जाएगा, जिससे खोज अभियान की गति और तेज़ होने की उम्मीद है। भारतीय और नेपाली दल मिलकर जलमग्न और मलबे से भरे खंडों को साफ करने में जुटे हैं ताकि अभी भी फंसे लोगों तक पहुँचा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

सुरंग में फंसे लोगों की संख्या और उनकी स्थिति के बारे में आधिकारिक स्तर पर पारदर्शिता अभी भी सीमित है, जो जवाबदेही की दृष्टि से चिंताजनक है। बचाव की सफलता अंततः उस अस्थायी ट्रैक की गति पर निर्भर करेगी जो अभी बन रहा है — देर होने पर परिणाम अपरिवर्तनीय हो सकते हैं।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिलिमे सुरंग बचाव अभियान क्या है और यह कहाँ चल रहा है?
यह नेपाल के रसुवा जिले में स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंग में चल रहा बचाव अभियान है, जो 26 अगस्त 2026 की विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरू किया गया। भारतीय सुरंग बचाव दल नेपाली सेना के साथ मिलकर फंसे लोगों की तलाश कर रहा है।
भारतीय बचाव दल ने चिलिमे सुरंग में क्या कदम उठाए हैं?
दल ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियाँ लगाई हैं, पानी निकालने के लिए पंप और अस्थायी फ्लोट तैनात किए हैं, और भारी उपकरणों की आवाजाही के लिए एक अस्थायी ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है। इससे खोज अभियान को और तेज़ किया जा सकेगा।
भारत ने नेपाल को अब तक कितनी राहत सामग्री भेजी है?
भारत ने नेपाल को एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएँ, शल्य चिकित्सा उपकरण, तिरपाल, स्लीपिंग बैग, कंबल और जल शोधन की गोलियाँ भेजी हैं। इसके अलावा 166 भारतीय नागरिकों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
चिलिमे जलविद्युत परियोजना बाढ़ से कैसे प्रभावित हुई?
26 अगस्त को नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गाँव के पास स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना को बुरी तरह प्रभावित किया। सुरंग के कई हिस्से जलमग्न और मलबे से अवरुद्ध हो गए, जिसमें कई लोग फंस गए।
भारतीय चिकित्सा दल नेपाल में क्या कर रहा है?
उच्च प्रशिक्षित डॉक्टरों और पैरामेडिक्स से युक्त भारतीय चिकित्सा दल बाढ़ से विस्थापित स्थानीय निवासियों को आपातकालीन उपचार और मानवीय सहायता प्रदान कर रहा है। दल ने स्थानीय समुदाय के लिए स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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