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अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस 29 मई: हिलेरी-तेनजिंग की 1953 की ऐतिहासिक विजय का 72 साल बाद भी अमर उत्सव

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अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस 29 मई: हिलेरी-तेनजिंग की 1953 की ऐतिहासिक विजय का 72 साल बाद भी अमर उत्सव

सारांश

29 मई 1953 — वह तारीख जब दो इंसानों ने 'असंभव' को पैरों तले रौंदा। हिलेरी और तेनजिंग की एवरेस्ट विजय सिर्फ एक पर्वतीय रिकॉर्ड नहीं थी — यह मानवीय जिजीविषा का घोषणापत्र था। नेपाल ने 2008 में इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस का दर्जा दिया, जो आज शेरपा समुदाय और साहस की संस्कृति का उत्सव बन चुका है।

मुख्य बातें

29 मई 1953 को सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार माउंट एवरेस्ट ( 8,848 मीटर ) की चोटी पर कदम रखा।
नेपाल सरकार ने 2008 में, हिलेरी के निधन के बाद, 29 मई को अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस घोषित किया।
तेनजिंग नोर्गे का निधन 1986 में और हिलेरी का 88 वर्ष की आयु में हुआ था।
हिलेरी ने 1960 में हिमालयन ट्रस्ट की स्थापना की, जिसने नेपाल में स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनाईं।
तेनजिंग ने दार्जिलिंग के हिमालय पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना में योगदान दिया, जो आज भी सक्रिय है।

अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस हर वर्ष 29 मई को उन दो अदम्य पर्वतारोहियों — सर एडमंड हिलेरी (न्यूजीलैंड) और तेनजिंग नोर्गे (नेपाल) — की स्मृति में मनाया जाता है, जिन्होंने 29 मई 1953 को दक्षिणी नेपाल के मार्ग से माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) की चोटी पर पहली बार मानव पदचिह्न अंकित किए। यह दिवस केवल एक पर्वतीय उपलब्धि का उत्सव नहीं, बल्कि साहस, धैर्य और मानवीय संकल्प की उस विरासत को नमन है जो आज भी पर्वतारोहण की दुनिया को प्रेरित करती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: वह सुबह जिसने इतिहास बदल दिया

1953 का दशक पर्वतारोहण के लिए एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण युग था। तकनीक सीमित थी, ऑक्सीजन उपकरण प्राथमिक अवस्था में थे और एवरेस्ट को उस समय 'अजेय शिखर' माना जाता था। अनेक अभियान दल प्रयास करके लौट चुके थे। ऐसे में ब्रिटिश अभियान दल के सदस्य हिलेरी और उनके शेरपा साथी तेनजिंग ने दक्षिण-पूर्वी रिज के रास्ते शिखर तक पहुंचकर वह कर दिखाया जो असंभव माना जाता था। गौरतलब है कि यह उस वर्ष का तीसरा बड़ा प्रयास था और इससे पहले स्विस अभियान दल 1952 में लगभग सफल होते-होते रह गया था।

एवरेस्ट दिवस की स्थापना: नेपाल का ऐतिहासिक निर्णय

नेपाल सरकार ने 2008 में, सर एडमंड हिलेरी के निधन के बाद, 29 मई को आधिकारिक रूप से अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस घोषित किया। हिलेरी का निधन 88 वर्ष की आयु में हुआ था। तेनजिंग नोर्गे का निधन 1986 में हो चुका था, किंतु उनकी विरासत शेरपा समुदाय और पर्वतारोहण जगत में आज भी जीवंत है। यह दिवस प्रत्येक वर्ष नेपाल सहित विश्व के अनेक देशों में विशेष कार्यक्रमों के साथ मनाया जाता है।

शेरपा समुदाय: एवरेस्ट की अदृश्य रीढ़

अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस उन शेरपाओं और पर्वतीय गाइडों को सम्मान देने का भी अवसर है जो प्रत्येक अभियान की सफलता में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। तेनजिंग नोर्गे स्वयं शेरपा समुदाय से थे और उनकी उपलब्धि ने दुनिया को यह बताया कि हिमालय के ऊंचे दर्रों और बर्फीले रास्तों पर शेरपाओं की भूमिका अपरिहार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब आधुनिक पर्वतारोहण उद्योग में शेरपा अधिकारों और उचित मेहनताने की मांग तेज हो रही है।

हिलेरी और तेनजिंग की स्थायी विरासत

सर एडमंड हिलेरी एवरेस्ट विजय के बाद नेपाल के विकास के लिए समर्पित हो गए। उन्होंने 1960 में हिमालयन ट्रस्ट की स्थापना की, जिसके माध्यम से नेपाल के सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनाई गईं। इन प्रयासों से हजारों शेरपा परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आया। तेनजिंग नोर्गे ने दार्जिलिंग स्थित हिमालय पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो आज भी पर्वतारोहियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए प्रसिद्ध है। उन्होंने साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक ट्रेकिंग कंपनी भी स्थापित की।

आज भी चुनौती बरकरार: एवरेस्ट की कठोर वास्तविकता

हर वर्ष दुनिया भर से सैकड़ों पर्वतारोही एवरेस्ट पर चढ़ने का स्वप्न लेकर नेपाल पहुंचते हैं। किंतु 8,848 मीटर की इस चोटी पर बर्फीले तूफान, अत्यंत कम ऑक्सीजन और जानलेवा रास्ते आज भी इस यात्रा को असाधारण जोखिम भरी बनाते हैं। आंकड़ों के अनुसार अब तक एवरेस्ट पर 300 से अधिक पर्वतारोहियों की जान जा चुकी है। यह दिवस उन सभी की याद में भी मनाया जाता है जो शिखर की तलाश में अपना सर्वस्व न्योछावर कर गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि इस उपलब्धि का गहरा भू-राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ अनदेखा रह जाता है — 1953 में यह ब्रिटिश साम्राज्य की प्रतिष्ठा का सवाल भी था, और तेनजिंग की बराबर की भागीदारी को शुरुआती रिपोर्टिंग में जानबूझकर कम आंका गया था। शेरपा समुदाय की भूमिका आज भी उचित मान्यता और मेहनताने के मामले में उपेक्षित है — यह दिवस उस बातचीत को केंद्र में लाने का अवसर है। हिमालयन ट्रस्ट और हिमालय पर्वतारोहण संस्थान जैसी संस्थाएं बताती हैं कि असली विरासत शिखर पर नहीं, बल्कि नीचे की घाटियों में बसे लोगों के जीवन में है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस प्रत्येक वर्ष 29 मई को मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1953 में सर एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर कदम रखा था। नेपाल सरकार ने 2008 में इस दिन को आधिकारिक दर्जा दिया।
माउंट एवरेस्ट पर पहली चढ़ाई किसने और कैसे की?
न्यूजीलैंड के सर एडमंड हिलेरी और नेपाली शेरपा तेनजिंग नोर्गे ने 29 मई 1953 को दक्षिणी नेपाल के मार्ग से 8,848 मीटर ऊंचे माउंट एवरेस्ट पर पहली सफल चढ़ाई की। वे एक ब्रिटिश अभियान दल का हिस्सा थे।
नेपाल ने एवरेस्ट दिवस की घोषणा कब की?
नेपाल सरकार ने 2008 में, सर एडमंड हिलेरी के निधन के बाद, 29 मई को अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस घोषित किया। हिलेरी 88 वर्ष की आयु में दिवंगत हुए थे, जबकि तेनजिंग नोर्गे का निधन 1986 में हो चुका था।
तेनजिंग नोर्गे और एडमंड हिलेरी की विरासत क्या है?
हिलेरी ने 1960 में हिमालयन ट्रस्ट की स्थापना की, जिससे नेपाल के दूरदराज इलाकों में स्कूल, अस्पताल और सड़कें बनीं। तेनजिंग ने दार्जिलिंग के हिमालय पर्वतारोहण संस्थान की स्थापना में योगदान दिया, जो आज भी पर्वतारोहियों को प्रशिक्षित करता है।
एवरेस्ट पर चढ़ाई आज भी इतनी कठिन क्यों है?
8,848 मीटर की ऊंचाई पर बर्फीले तूफान, अत्यंत कम ऑक्सीजन और खतरनाक रास्ते एवरेस्ट को आज भी जानलेवा बनाते हैं। आंकड़ों के अनुसार अब तक 300 से अधिक पर्वतारोही इस अभियान में जान गंवा चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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