शहबाज शरीफ के ईरान-समर्थक बयान पर अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट का कड़ा जवाब: 'लादेन को पनाह देने वालों पर नज़र है'
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई को 'महान विद्वान' बताने और तेहरान को 'भाई देश' कहने पर अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने 7 जुलाई को कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सीनेटर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पाकिस्तान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया इस्लामाबाद की 'असली पहचान' नहीं भूली है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब मध्य-पूर्व में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर वाशिंगटन में पहले से ही गहरी बेचैनी है।
शरीफ का वायरल बयान और विवाद की जड़
मेमरी टीवी द्वारा साझा किए गए एक वायरल वीडियो में शहबाज शरीफ खामेनेई की प्रशंसा करते नज़र आए। उन्होंने कहा, 'वह एक महान विद्वान और नेता थे, जिन्होंने मजबूती, हिम्मत, सब्र और दूरदर्शिता दिखाई और पूरी लगन तथा अटूट निष्ठा के साथ ईरान की सेवा की। दुनिया भर के लाखों मुसलमान उन्हें याद रखेंगे।' शरीफ ने आगे कहा, 'पाकिस्तान और ईरान भाई जैसे देश हैं और हमारे दिल एक साथ धड़कते हैं। हम साथ खड़े रहेंगे और हर हालात में साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे।' इस बयान के सामने आते ही अमेरिका में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई।
सीनेटर स्कॉट की चेतावनी
सीनेटर रिक स्कॉट ने शरीफ के वीडियो को एक्स पर साझा करते हुए लिखा, 'दुनिया को पाकिस्तान की असली पहचान नहीं भूलनी चाहिए। पाकिस्तान वही देश है जहाँ अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन कई सालों तक छिपकर रहा। यही वह देश है जिसने ईशनिंदा के आरोप में ईसाइयों की हत्या की।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्लामाबाद संभल जाए क्योंकि अमेरिका उस पर करीब से नज़र बनाए हुए है। स्कॉट ने यह भी कहा कि पाकिस्तान किसी भी मध्यस्थता की भूमिका के योग्य नहीं है।
यह पहली बार नहीं
गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हों। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी मई में एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा था कि पाकिस्तान एक भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं है। कांग्रेस की सुनवाइयों में भी यही सुर दोहराया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य-पूर्व में बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता अमेरिकी नीति-निर्माताओं की निगाह में है।
पाकिस्तान-ईरान संबंधों की पृष्ठभूमि
पाकिस्तान और ईरान के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं। जनवरी 2024 में दोनों देशों ने एक-दूसरे के क्षेत्र में सैन्य कार्रवाइयाँ की थीं, जिससे तनाव चरम पर पहुँच गया था। इस पृष्ठभूमि में शरीफ का भावनात्मक समर्थन-भरा बयान न केवल कूटनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि वाशिंगटन में पाकिस्तान की छवि को लेकर नई बहस छेड़ता है।
आगे क्या
अमेरिकी सांसदों की यह प्रतिक्रिया पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों पर दीर्घकालिक असर डाल सकती है, विशेषकर तब जब इस्लामाबाद खुद को क्षेत्रीय मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, इस विवाद से पाकिस्तान को अमेरिकी कांग्रेस में पहले से कमज़ोर हो रही अपनी साख को और नुकसान उठाना पड़ सकता है।