पाकिस्तान की मध्यस्थता पर रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम के तीखे सवाल, अब्राहम अकॉर्ड का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने 27 मई 2025 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए, ऐसे समय में जब इस्लामाबाद खुद को अमेरिका-ईरान वार्ता में शांति दूत के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ग्राहम ने पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की एक साल पुरानी पोस्ट टैग करते हुए स्पष्ट कहा कि उन्हें पाकिस्तान पर मध्यस्थ के रूप में भरोसा नहीं है।
ग्राहम ने क्या कहा
ग्राहम ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'एक मीडिएटर के तौर पर पाकिस्तान बहुत बड़ी प्रॉब्लम है।' उन्होंने ख्वाजा आसिफ की उस पुरानी टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान अब्राहम अकॉर्ड्स में कभी शामिल नहीं होगा क्योंकि उसे इजरायल पर भरोसा नहीं है। ग्राहम ने लिखा, 'यह क्लिप एक साल पुरानी हो सकती है, लेकिन मुझे डर है कि यह भावना अभी भी जस की तस है।'
चिंता की तीन वजहें
ग्राहम ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर तीन प्रमुख आधारों पर सवाल उठाए — इजरायल के प्रति पाकिस्तान का ऐतिहासिक विरोध और नकारात्मक रुख; अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने से इनकार; और ईरानी सैन्य विमानों को पाकिस्तानी एयरबेस पर जगह देने की खबरें। इन तीनों बिंदुओं को मिलाकर उन्होंने इस्लामाबाद की मध्यस्थता की नीयत को कठघरे में खड़ा किया।
अब्राहम अकॉर्ड्स क्या हैं
अब्राहम अकॉर्ड्स वह ऐतिहासिक कूटनीतिक समझौता है जिसकी शुरुआत सितंबर 2020 में अमेरिकी मध्यस्थता में हुई थी। इसके तहत इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की पहल की गई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन ने सबसे पहले इजरायल के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए, इसके बाद सूडान और मोरक्को भी इस प्रक्रिया से जुड़े।
'अब्राहम' नाम यहूदी, ईसाई और इस्लाम — तीनों धर्मों में साझा माने जाने वाले पैगंबर इब्राहिम के नाम पर रखा गया है, जो आपसी भाईचारे और शांति का प्रतीक हैं। इस समझौते का मकसद मध्य पूर्व में व्यापार, पर्यटन और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
पाकिस्तान पर ट्रंप का दबाव
ग्राहम ने अपनी पोस्ट में यह भी कहा कि पाकिस्तान को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जल्द स्पष्ट करना चाहिए कि वह अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होगा या नहीं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में अमेरिका ने सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देशों को भी इस समझौते में शामिल करने की कोशिशें तेज की हैं, लेकिन अब तक दोनों देशों ने इजरायल को मान्यता देने से इनकार किया है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान कूटनीतिक मोर्चे पर अपनी साख बनाने की कोशिश में है। ग्राहम की टिप्पणी से वाशिंगटन में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि इस्लामाबाद इन आरोपों का जवाब किस रूप में देता है और ट्रंप प्रशासन की प्रतिक्रिया क्या होती है।