ईरान के विदेश मंत्री अराघची की अमेरिका को कड़ी चेतावनी: बड़ी कार्रवाई पर होंगे गंभीर नतीजे
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 2 अगस्त 2026 को अमेरिका को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि किसी भी बड़ी या 'दुस्साहसिक' कार्रवाई के लिए जिम्मेदार लोगों को गंभीर नतीजे भुगतने होंगे। ईरानी अर्धसरकारी मेहर न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह चेतावनी अराघची ने कई क्षेत्रीय नेताओं के साथ अलग-अलग टेलीफोनिक वार्ताओं के दौरान दी।
किन नेताओं से हुई बातचीत
रिपोर्टों के अनुसार, अराघची ने पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल असीम मुनीर, तुर्किए के विदेश मंत्री हकन फिदान और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद से अलग-अलग फोन पर बात की। इन वार्ताओं में उन्होंने क्षेत्र के ताज़ा घटनाक्रमों पर ईरान का पक्ष रखा।
मुनीर और फिदान के साथ बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी हमले का कड़ा जवाब देगा।
सऊदी विदेश मंत्री को विशेष संदेश
अपने सऊदी समकक्ष के साथ बातचीत में अराघची ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका या इज़रायल की किसी भी शत्रुतापूर्ण कार्रवाई का — और उसमें किसी भी क्षेत्रीय देश के सहयोग का — ईरानी सेना की ओर से कड़ा और उसी अनुपात में जवाब दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर है।
शांति समझौते के उल्लंघन का आरोप
ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को अमेरिका पर जून में हुए शांति समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। मंत्रालय के अनुसार, अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर लगातार हमले किए, ईरानी बंदरगाहों और व्यावसायिक शिपिंग पर रोक लगाई तथा आर्थिक दबाव भी बढ़ाया।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ईरान अमेरिका के 'गैर-कानूनी हमलों' का विरोध जारी रखेगा और अपने देश की संप्रभुता एवं स्वाधीनता की मजबूती से रक्षा करेगा। गौरतलब है कि कुछ समय पहले दोनों देशों ने हमले रोकने पर सहमति जताई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद संघर्ष फिर भड़क उठा।
ब्रिटेन को भी चेतावनी
इससे पहले शुक्रवार को अराघची ने ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड से फोन पर बातचीत की और ब्रिटेन को भी स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी सैन्य सहयोग — चाहे वह मौजूदा रक्षा समझौतों की आड़ में ही क्यों न हो — को ईरान स्वीकार नहीं करेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों पर ईरानी हमलों का हवाला देते हुए ईरानी ठिकानों पर कई हमले किए थे और कहा था कि इनका मकसद व्यावसायिक शिपिंग को खतरा पहुंचाने की ईरान की क्षमता को कमज़ोर करना था।
क्या होगा आगे
क्षेत्रीय राजनयिक गतिविधियों में तेज़ी आई है और ईरान की तरफ से पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब को एक साथ संदेश देना यह संकेत देता है कि तेहरान व्यापक क्षेत्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, आने वाले दिनों में कूटनीतिक दबाव और बढ़ सकता है।