इस्लामाबाद में 5 महीनों में 432 यौन उत्पीड़न व अपहरण केस, सदर और सोआन जोन सबसे अधिक प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जनवरी से मई 2026 के बीच यौन उत्पीड़न और अपहरण के कुल 432 मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्टों के अनुसार, इनमें 55 मामले यौन उत्पीड़न से जुड़े हैं, जबकि 377 मामले अपहरण के हैं। यह आँकड़े इस्लामाबाद में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
जोन-वार यौन उत्पीड़न के आँकड़े
पाकिस्तानी अखबार डॉन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यौन उत्पीड़न के 55 मामलों में सर्वाधिक 15 मामले सोआन जोन में दर्ज हुए। सदर जोन में 13, रूरल जोन में 12, इंडस्ट्रियल एरिया जोन में 9 और सिटी जोन में 6 मामले सामने आए। इन मामलों में पीड़ितों में 15 लड़कियाँ, 3 महिलाएँ और 1 लड़का शामिल रहे।
अपहरण के मामले और गंभीर घटनाएँ
अपहरण के 377 मामलों में सबसे अधिक 99 केस सदर जोन में दर्ज हुए। सोआन जोन में 89, रूरल जोन में 76, सिटी जोन में 44 और इंडस्ट्रियल एरिया जोन में 29 मामले दर्ज किए गए। इनमें से कई मामले पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 365 के तहत दर्ज हुए, जो बंधक बनाने से संबंधित है। इन अपहरण मामलों में 64 पुरुष और 5 महिलाएँ पीड़ित बताए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
28 फरवरी को पिंडोरियन इलाके में तीन लोगों पर एक लड़के के साथ दुष्कर्म का आरोप लगा। 19 मार्च को I-16 इलाके में एक लड़की के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला दर्ज हुआ, जबकि 31 मार्च को सिहाला में एक लड़के के साथ यौन उत्पीड़न की घटना सामने आई। एक मामले में 15 वर्षीय लड़के के साथ बंदूक की नोक पर मारपीट और यौन उत्पीड़न का आरोप भी दर्ज हुआ।
अपहरण के एक गंभीर मामले में एक व्यक्ति को इस्लामाबाद से अगवा कर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मृत पाया गया। इसी तरह, 4 मई को सेक्टर एफ-6/1 से अगवा किए गए एक व्यक्ति का शव अगले दिन मर्दान में मिला।
व्यापक सामाजिक संदर्भ
रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान में यौन हिंसा की घटनाएँ कोई अलग-थलग मामला नहीं हैं, बल्कि एक गहरे सामाजिक पैटर्न का हिस्सा हैं। विश्लेषकों का कहना है कि न्याय प्रणाली में कमज़ोरियाँ और सज़ा से बच निकलने की धारणा ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान में महिला सुरक्षा कानूनों के क्रियान्वयन पर पहले से ही सवाल उठाए जाते रहे हैं।
आगे क्या
रिपोर्टों में यह भी रेखांकित किया गया है कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मज़बूत संस्थागत सुधारों की ज़रूरत है। आलोचकों का कहना है कि जब तक जवाबदेही तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता, इस्लामाबाद जैसे राजधानी शहर में भी ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।