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जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन की जांच की मांग, 82% आंकड़े को बताया फर्जी

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जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन की जांच की मांग, 82% आंकड़े को बताया फर्जी

सारांश

सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने जल जीवन मिशन के 82% कवरेज के दावे को फर्जी बताते हुए व्यापक जांच की मांग की। साथ ही, यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस-सपा गठबंधन को ज़रूरी बताया और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट मामले में जेपीसी या सुप्रीम कोर्ट जज से जांच की अपील की।

मुख्य बातें

सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने 2 सितंबर को जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार की व्यापक जांच की मांग की।
सुमन ने सरकार के 82 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाने के दावे को 'फर्जी आंकड़ा' बताया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस-सपा गठबंधन को अनिवार्य बताया और जमीनी हकीकत के आधार पर सीट-बंटवारे की अपील की।
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन वार्ता के लिए अधिकृत किया गया है।
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के कथित भ्रष्टाचार मामले में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश या जेपीसी से जांच की मांग की गई।
सपा का मानना है कि राज्य सरकार की एसआईटी इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती।

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में तीन अहम मुद्दों पर अपना पक्ष रखा — जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन की ज़रूरत, और अयोध्या राम मंदिर प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच। सुमन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के तहत 82 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाने के जो आंकड़े पेश कर रही है, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।

जल जीवन मिशन: दावे और ज़मीनी हकीकत

केंद्र सरकार ने 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था। सुमन ने आरोप लगाया कि कई गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, खुदाई हुई और पानी की टंकियां भी बनाई गईं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को वास्तव में पानी नहीं मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग से जुड़े कथित घोटाले का मामला बेहद गंभीर है और इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए। सुमन के अनुसार, योजना को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, इसलिए जवाबदेही भी उन्हीं पर तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकार के 82 प्रतिशत कवरेज के दावे को 'फर्जी आंकड़ा' करार दिया।

कांग्रेस-सपा गठबंधन पर सुमन का रुख

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की ओर से कथित तौर पर 115 से 120 सीटों पर दावा किए जाने के सवाल पर सुमन ने कहा कि राजनीतिक दलों का रवैया व्यावहारिक होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन अनिवार्य है।

सुमन ने कहा कि गठबंधन की सफलता के लिए दोनों दलों को आत्मचिंतन करना होगा और जमीनी स्तर पर अपनी वास्तविक राजनीतिक स्थिति का ईमानदारी से आकलन करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि सपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन को लेकर बातचीत के लिए अधिकृत किया है।

अयोध्या राम मंदिर: जांच की मांग

अयोध्या राम मंदिर को नया सीईओ मिलने के सवाल पर सुमन ने कहा कि प्रशासनिक सुधार के लिए सीईओ की नियुक्ति एक अलग विषय है, लेकिन मंदिर निर्माण और ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई।

सपा की शुरुआत से यह राय रही है कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। सुमन ने मांग की कि जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए।

विशेषज्ञ और विपक्ष की नज़र में जल जीवन मिशन

यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न संसदीय समितियों और नागरिक समाज संगठनों ने भी जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में राज्यवार असमानताओं की ओर ध्यान दिलाया है। गौरतलब है कि मिशन पर अब तक लाखों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, और ऐसे में कवरेज के आंकड़ों की विश्वसनीयता एक राष्ट्रीय सवाल बन गई है।

सुमन के बयान ऐसे दौर में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं और विपक्षी गठबंधन की रूपरेखा अभी तय होनी बाकी है। आने वाले हफ्तों में कांग्रेस और सपा के बीच सीट-बंटवारे की बातचीत की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'फर्जी आंकड़े' जैसे सीधे आरोप इस बहस को एक नई तीव्रता देते हैं। असली सवाल यह है कि पाइपलाइन बिछाने की 'भौतिक प्रगति' और 'कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन' के बीच की खाई को कौन मापेगा और कैसे। अयोध्या मंदिर मामले में जेपीसी की मांग राजनीतिक रूप से तीखी है, क्योंकि यह सत्तारूढ़ दल के सबसे संवेदनशील प्रतीक को सीधे निशाने पर लेती है — और यूपी चुनाव की पृष्ठभूमि में इसका समय महत्वपूर्ण है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जल जीवन मिशन क्या है और इस पर क्या आरोप लगे हैं?
जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की 2019 में शुरू की गई योजना है, जिसका लक्ष्य हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना है। सपा सांसद रामजी लाल सुमन ने आरोप लगाया है कि कई गांवों में पाइपलाइन और टंकियां बनने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिल रहा और सरकार के 82% कवरेज के आंकड़े फर्जी हैं।
रामजी लाल सुमन ने जल जीवन मिशन की जांच किससे कराने की मांग की?
सुमन ने जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार की व्यापक जांच की मांग की है और कहा कि चूंकि योजना लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, इसलिए उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने जल शक्ति विभाग से जुड़े कथित घोटाले को गंभीर बताया।
उत्तर प्रदेश चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन पर सुमन का क्या कहना है?
सुमन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन बेहद जरूरी है। उन्होंने दोनों दलों से जमीनी हकीकत के आधार पर व्यावहारिक रुख अपनाने और केवल दावों पर नहीं, बल्कि वास्तविक राजनीतिक स्थिति के आधार पर सीट-बंटवारा तय करने की अपील की।
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट मामले में सपा की क्या मांग है?
सपा का मानना है कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के कथित भ्रष्टाचार मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। सुमन ने मांग की कि जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए।
क्या कांग्रेस ने यूपी में 115-120 सीटों का दावा किया है?
कथित तौर पर कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 115 से 120 सीटों पर दावा किए जाने की बात सामने आई है। सुमन ने इस पर कहा कि राजनीतिक दलों का दृष्टिकोण व्यावहारिक होना चाहिए और जमीनी स्तर पर वास्तविक स्थिति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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