जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन की जांच की मांग, 82% आंकड़े को बताया फर्जी
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद रामजी लाल सुमन ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में तीन अहम मुद्दों पर अपना पक्ष रखा — जल जीवन मिशन में कथित भ्रष्टाचार, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन की ज़रूरत, और अयोध्या राम मंदिर प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच। सुमन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जल जीवन मिशन के तहत 82 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचाने के जो आंकड़े पेश कर रही है, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते।
जल जीवन मिशन: दावे और ज़मीनी हकीकत
केंद्र सरकार ने 2019 में जल जीवन मिशन की शुरुआत की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के हर ग्रामीण घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाना था। सुमन ने आरोप लगाया कि कई गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई, खुदाई हुई और पानी की टंकियां भी बनाई गईं, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीणों को वास्तव में पानी नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग से जुड़े कथित घोटाले का मामला बेहद गंभीर है और इसकी व्यापक जांच होनी चाहिए। सुमन के अनुसार, योजना को लागू करने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की है, इसलिए जवाबदेही भी उन्हीं पर तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकार के 82 प्रतिशत कवरेज के दावे को 'फर्जी आंकड़ा' करार दिया।
कांग्रेस-सपा गठबंधन पर सुमन का रुख
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की ओर से कथित तौर पर 115 से 120 सीटों पर दावा किए जाने के सवाल पर सुमन ने कहा कि राजनीतिक दलों का रवैया व्यावहारिक होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा परिस्थितियों में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन अनिवार्य है।
सुमन ने कहा कि गठबंधन की सफलता के लिए दोनों दलों को आत्मचिंतन करना होगा और जमीनी स्तर पर अपनी वास्तविक राजनीतिक स्थिति का ईमानदारी से आकलन करना होगा। उन्होंने यह भी बताया कि सपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन को लेकर बातचीत के लिए अधिकृत किया है।
अयोध्या राम मंदिर: जांच की मांग
अयोध्या राम मंदिर को नया सीईओ मिलने के सवाल पर सुमन ने कहा कि प्रशासनिक सुधार के लिए सीईओ की नियुक्ति एक अलग विषय है, लेकिन मंदिर निर्माण और ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में छोटे कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराया गया, जबकि प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई।
सपा की शुरुआत से यह राय रही है कि राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। सुमन ने मांग की कि जांच सर्वोच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश या संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराई जाए।
विशेषज्ञ और विपक्ष की नज़र में जल जीवन मिशन
यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न संसदीय समितियों और नागरिक समाज संगठनों ने भी जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में राज्यवार असमानताओं की ओर ध्यान दिलाया है। गौरतलब है कि मिशन पर अब तक लाखों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, और ऐसे में कवरेज के आंकड़ों की विश्वसनीयता एक राष्ट्रीय सवाल बन गई है।
सुमन के बयान ऐसे दौर में आए हैं जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं और विपक्षी गठबंधन की रूपरेखा अभी तय होनी बाकी है। आने वाले हफ्तों में कांग्रेस और सपा के बीच सीट-बंटवारे की बातचीत की दिशा तय होगी।