उधमपुर की कलाड़ी को 'मन की बात' से मिली नई पहचान, देशभर में डिमांड में जबरदस्त उछाल

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उधमपुर की कलाड़ी को 'मन की बात' से मिली नई पहचान, देशभर में डिमांड में जबरदस्त उछाल

सारांश

PM मोदी के 'मन की बात' में एक ज़िक्र ने उधमपुर की सदियों पुरानी कलाड़ी को राष्ट्रीय मंच दे दिया। GI टैग की मान्यता के साथ यह डोगरा विरासत अब सिर्फ गाँव की रसोई तक सीमित नहीं — देशभर के बाज़ारों और पर्यटकों की थाली तक पहुँच चुकी है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में उधमपुर की पारंपरिक कलाड़ी का उल्लेख किया, जिसके बाद देशभर में माँग में तेज़ उछाल आया।
कलाड़ी को हाल ही में जीआई टैग मिला है, जिससे इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान और मज़बूत हुई है।
कलाड़ी निर्माता पोविंदर शर्मा के अनुसार उत्पादन के साथ ही स्टॉक बिक जाता है, माँग आपूर्ति से अधिक है।
करीब 50 साल पुरानी दुकान चलाने वाले गुरबख्श सिंह ने बताया कि बढ़ती लोकप्रियता से कई नई दुकानें खुली हैं और स्थानीय रोज़गार बढ़ा है।
हाईवे पर्यटक अब खासतौर पर कटरा, उधमपुर और जम्मू में कलाड़ी का स्वाद लेने रुक रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में उल्लेख किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के उधमपुर की पारंपरिक कलाड़ी की माँग देशभर में तेज़ी से बढ़ी है। 'जम्मू की देसी मोजरेला' के नाम से प्रसिद्ध यह पारंपरिक डेयरी उत्पाद अब शहरी बाज़ारों, हाईवे ढाबों और पर्यटकों की पहली पसंद बन चुका है।

क्या है कलाड़ी और क्यों है खास

कलाड़ी जम्मू-कश्मीर, विशेषकर जम्मू क्षेत्र का एक अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक डेयरी उत्पाद है, जिसे 'डोगरा कलाड़ी' भी कहा जाता है। भैंस या गाय के दूध से तैयार होने वाली यह चीज़ स्वाद में हल्की नमकीन और स्मोकी होती है तथा बनावट में लचीली होती है। हाल ही में इसे जीआई टैग (भौगोलिक संकेत) मिलने के बाद इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान और भी मज़बूत हुई है।

मन की बात के बाद बदली तस्वीर

कलाड़ी निर्माता पोविंदर शर्मा ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि उनका परिवार पीढ़ियों से यह काम करता आ रहा है और उन्होंने भी अपने बुजुर्गों से ही यह हुनर सीखा है। उन्होंने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

असली सवाल यह है कि क्या यह माँग टिकाऊ होगी या मीडिया चक्र के थमने के साथ फीकी पड़ जाएगी। GI टैग और बढ़ती पहचान के बावजूद, उधमपुर के कारीगरों को संगठित आपूर्ति श्रृंखला, कोल्ड स्टोरेज और ई-कॉमर्स तक पहुँच की ज़रूरत है — अन्यथा यह 'मोमेंट' एक मौका चूकने की कहानी बन जाएगी।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलाड़ी क्या है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
कलाड़ी जम्मू-कश्मीर के जम्मू क्षेत्र का पारंपरिक डेयरी उत्पाद है, जिसे भैंस या गाय के दूध से बनाया जाता है। इसका स्वाद हल्का नमकीन और स्मोकी होता है तथा बनावट लचीली होती है, इसीलिए इसे 'जम्मू की देसी मोजरेला' कहा जाता है।
'मन की बात' में कलाड़ी का जिक्र कब हुआ?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' के 133वें एपिसोड में कलाड़ी का उल्लेख किया और कहा कि जब भी वे कटरा, उधमपुर या जम्मू आएंगे तो कलाड़ी ज़रूर खाएंगे। इस उल्लेख के बाद से उधमपुर और आसपास के क्षेत्रों में कलाड़ी की बिक्री में तेज़ उछाल आया है।
कलाड़ी को GI टैग कब मिला और इसका क्या महत्व है?
कलाड़ी को हाल ही में जीआई टैग (भौगोलिक संकेत) प्रदान किया गया है, जिससे इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त हुई है। GI टैग यह सुनिश्चित करता है कि केवल उधमपुर क्षेत्र में पारंपरिक विधि से बनाई गई कलाड़ी ही इस नाम का उपयोग कर सकती है।
कलाड़ी की बढ़ती माँग से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ा है?
उधमपुर में करीब 50 साल पुरानी दुकान चलाने वाले गुरबख्श सिंह के अनुसार, कलाड़ी की बढ़ती लोकप्रियता से कई नई दुकानें खुली हैं और स्थानीय लोगों को रोज़गार मिल रहा है। कलाड़ी निर्माता पोविंदर शर्मा ने बताया कि उत्पादन के साथ ही पूरा स्टॉक बिक जाता है।
कलाड़ी कहाँ मिलती है और पर्यटक इसे कैसे आज़माएँ?
कलाड़ी उधमपुर के स्थानीय बाज़ारों, हाईवे ढाबों और जम्मू-कश्मीर के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे कटरा और जम्मू में उपलब्ध है। हाईवे पर्यटक अब खासतौर पर कलाड़ी का स्वाद लेने के लिए रुक रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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