जन्माष्टमी 2025: द्वापर युग जैसा दुर्लभ ग्रह-संयोग, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा — कालकाजी मंदिर के महंत ने बताया महत्व
सारांश
मुख्य बातें
जन्माष्टमी 2025 इस वर्ष विशेष रूप से शुभ मानी जा रही है, क्योंकि 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का वही दुर्लभ संयोग बन रहा है जो कथित तौर पर द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय था। नई दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने इस ग्रह-संयोग की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि इस बार का कृष्ण जन्मोत्सव असाधारण आध्यात्मिक महत्व रखता है।
द्वापर युग जैसा दुर्लभ संयोग क्यों है खास
महंत सुरेंद्रनाथ अवधूत ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को कंस के कारागार में भगवान कृष्ण का अवतरण हुआ था। उस ऐतिहासिक क्षण में रोहिणी नक्षत्र सक्रिय था और चंद्रमा वृषभ राशि में विराजमान था, जिसने उस तिथि को असाधारण रूप से मंगलकारी बनाया था। उन्होंने कहा, 'भाद्रपद कृष्ण अष्टमी के दिन कंस के कारागार में भगवान कृष्ण का अवतरण हुआ था। उस दिन रोहिणी नक्षत्र था और वृषभ राशि में चंद्रमा था, जिससे वह दिन बहुत शुभ बन गया था। इस बार जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि में होगा और रोहिणी नक्षत्र भी होगा। ऐसे में इस बार कृष्ण जन्मोत्सव बहुत उत्साह के साथ मनाया जाएगा।'
गौरतलब है कि रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का एक साथ जन्माष्टमी पर आना हर वर्ष नहीं होता — यही कारण है कि धार्मिक विद्वान इस वर्ष के उत्सव को विशेष श्रेणी में रख रहे हैं।
अष्टमी तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि 3 सितंबर और 4 सितंबर की मध्यरात्रि 2:30 बजे से प्रारंभ होगी और 5 सितंबर की रात 12:30 बजे तक रहेगी। इस गणना के आधार पर जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। महंत के अनुसार इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:05 बजे से आरंभ होकर 12:35 बजे तक रहेगा। भक्त इस अवधि में पूरे विधि-विधान के साथ भगवान कृष्ण की आराधना कर सकते हैं।
व्रत और पारण की परंपरा
जन्माष्टमी पर श्रद्धालु पूरे दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं। मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण के जन्म के प्रतीकात्मक क्षण पर विशेष पूजन, अभिषेक और आरती की जाती है। इसके पश्चात भोग के रूप में चढ़ाए गए प्रसाद का सेवन करके व्रत का पारण किया जाता है। यह परंपरा सदियों से अपरिवर्तित चली आ रही है।
दिल्ली के मंदिरों में तैयारियाँ
नई दिल्ली के कालकाजी मंदिर सहित राजधानी के सभी प्रमुख कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियाँ जोरों पर हैं। इस वर्ष शुभ ग्रह-संयोग के कारण भक्तों में असाधारण उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने मध्यरात्रि के जन्मोत्सव के लिए विशेष सजावट, प्रकाश-व्यवस्था और भंडारे का प्रबंध किया है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं।
आगे क्या
4 सितंबर की रात मध्यरात्रि में देशभर के कृष्ण मंदिरों में जन्मोत्सव की झाँकियाँ सजाई जाएंगी और भजन-कीर्तन के कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस दुर्लभ ग्रह-संयोग के चलते इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रहने का अनुमान है।