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असम बाढ़: 7 जिलों में 25,083 लोग प्रभावित, मृतकों की संख्या 108 हुई

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असम बाढ़: 7 जिलों में 25,083 लोग प्रभावित, मृतकों की संख्या 108 हुई

सारांश

असम में बाढ़ का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। ASDMA के अनुसार मृतकों की संख्या 108 पहुँच गई है, 7 जिलों के 155 गाँवों में 25,083 लोग प्रभावित हैं और 6,477 हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र जलमग्न है। धनसिरी और कटखाल नदियाँ अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

मुख्य बातें

ASDMA के अनुसार असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 108 हो गई है।
7 जिलों के 155 गाँवों में 25,083 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
विस्थापितों के लिए 13 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं।
लगभग 6,477.31 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलभराव से प्रभावित हुआ है।
नुमालीगढ़ में धनसिरी और मतिजुरी में कटखाल नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

असम में बाढ़ का प्रकोप जारी है — असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के नवीनतम आकलन के अनुसार, 3 सितंबर 2026 तक राज्य में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 108 हो गई है। पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में एक महिला की मौत के बाद यह आँकड़ा सामने आया है, जबकि 7 जिलों के 155 गाँवों में 25,083 लोग अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं।

प्रभावित जिले और राहत शिविर

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित जिलों में गोलपारा, शिवसागर, बिश्वनाथ, नागांव, मोरीगांव, पश्चिम कार्बी आंगलोंग और कछार शामिल हैं। विस्थापित लोगों को आश्रय देने के लिए प्रशासन ने 13 राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहाँ बाढ़ पीड़ितों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कृषि भूमि को भारी नुकसान

ASDMA के आँकड़ों के अनुसार, बाढ़ से लगभग 6,477.31 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलभराव की चपेट में आ गया है। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ फसल का मौसम चरम पर है, जिससे प्रभावित जिलों के किसानों की आजीविका पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। अधिकारी कृषि भूमि, मकानों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।

नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर

कुछ नदियों का जलस्तर अभी भी चिंताजनक बना हुआ है। नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी और मतिजुरी में कटखाल नदी अपने-अपने खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं। अधिकारी नदी के जलस्तर, निचले इलाकों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।

राहत और बचाव अभियान जारी

प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी हैं। स्थानीय प्रशासन बाढ़ पीड़ितों तक सहायता पहुँचाने में लगा है और उन क्षेत्रों पर विशेष नज़र रखी जा रही है जो आगे भी बाढ़ की चपेट में आने की आशंका रखते हैं। गौरतलब है कि असम में मानसून के दौरान बार-बार बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होती है, जिससे राज्य के नदी तटीय और निचले इलाके हर साल भारी तबाही झेलते हैं। स्थिति में बदलाव के साथ प्रशासन आवश्यक कदम उठाता रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस प्रगति नदारद है। 108 मौतें और 25,000 से अधिक विस्थापित लोग केवल इस सीज़न का आँकड़ा नहीं हैं — ये दशकों की नीतिगत विफलता के संकेतक हैं। ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के तटबंध प्रबंधन पर सवाल बार-बार उठते हैं, लेकिन जवाबदेही तय करने की बजाय हर बार राहत-केंद्रित प्रतिक्रिया ही सामने आती है। 6,477 हेक्टेयर से अधिक फसल क्षेत्र का नुकसान यह भी बताता है कि बाढ़ का असर आपदा के बाद भी महीनों तक किसानों की आजीविका को प्रभावित करता रहेगा।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम बाढ़ 2026 में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
ASDMA के नवीनतम आकलन के अनुसार, 3 सितंबर 2026 तक असम में बाढ़ से मरने वालों की कुल संख्या 108 हो गई है। पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले में एक महिला की मौत के बाद यह आँकड़ा सामने आया है।
असम के कौन-से जिले बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं?
अधिकारियों के अनुसार, गोलपारा, शिवसागर, बिश्वनाथ, नागांव, मोरीगांव, पश्चिम कार्बी आंगलोंग और कछार — कुल 7 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इन जिलों के 155 गाँवों में 25,083 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या राहत व्यवस्था की गई है?
विस्थापित लोगों को ठहराने के लिए प्रभावित जिलों में 13 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव अभियान चला रहा है और बाढ़ पीड़ितों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
असम बाढ़ से कृषि को कितना नुकसान हुआ है?
ASDMA के अनुसार, लगभग 6,477.31 हेक्टेयर फसल क्षेत्र जलभराव से प्रभावित हुआ है। इससे प्रभावित जिलों के किसानों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
असम में कौन-सी नदियाँ अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?
नुमालीगढ़ में धनसिरी नदी और मतिजुरी में कटखाल नदी अपने-अपने खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं। अधिकारी इन नदियों के जलस्तर और निचले इलाकों पर कड़ी नज़र रख रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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