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जंतर-मंतर प्रदर्शन का राजनीतिकरण हुआ, विपक्ष ने छात्रों को औज़ार बनाया: बांसुरी स्वराज

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जंतर-मंतर प्रदर्शन का राजनीतिकरण हुआ, विपक्ष ने छात्रों को औज़ार बनाया: बांसुरी स्वराज

सारांश

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने जंतर-मंतर प्रदर्शन को विपक्ष की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक पर सरकार ने 11 मई को ही कार्रवाई की, 13 आरोपी जेल में हैं और पुनर्परीक्षा 37 दिनों में हुई — फिर भी छात्रों को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है।

मुख्य बातें

BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने 22 मई को भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में जंतर-मंतर प्रदर्शन को विपक्ष की राजनीतिक साजिश बताया।
नीट पेपर लीक की जानकारी मिलते ही 11 मई को एफआईआर दर्ज हुई और जांच सीबीआई को सौंपी गई; 13 आरोपी अभी जेल में हैं।
नीट पुनर्परीक्षा 37 दिनों में संपन्न हुई और परिणाम 25 दिनों में घोषित; उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में 58% महिलाएं।
NTA ने पिछले 3 महीनों में JEE , CUET और नीट पुनर्परीक्षा — तीन राष्ट्रीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित कीं।
प्रदर्शनकारी 6 जून से 20 जुलाई तक जंतर-मंतर पर रहे; 20 जुलाई को संसद घेरने के प्रयास को सांसद ने 'अराजकता' करार दिया।
सरकार ने प्रदर्शनकारियों को BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने का तुरंत न्योता दिया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने 22 मई को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जंतर-मंतर पर हुए युवा विरोध प्रदर्शन को विपक्ष की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आड़ में राजनीतिक स्वार्थ साधे जा रहे हैं और नीट पेपर लीक मामले में मोदी सरकार ने त्वरित एवं जिम्मेदाराना कार्रवाई की है।

सरकार की प्राथमिकता: छात्र हित सर्वोपरि

बांसुरी स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं को राष्ट्र-निर्माता मानते हैं और विकसित भारत की नींव युवा नेतृत्व पर टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के लिए बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सांसद ने कहा, 'पीएम मोदी और केंद्र सरकार छात्रों के हितों को प्राथमिकता देती है। जब 11 मई को पेपर लीक की जानकारी मिली, तो मोदी सरकार ने तुरंत कार्रवाई की — शिक्षा मंत्रालय ने एफआईआर दर्ज कराई और जांच सीबीआई को सौंप दी। 13 आरोपी अभी भी जेल में हैं।'

नीट पुनर्परीक्षा और परिणाम

बांसुरी स्वराज ने बताया कि नीट की पुनर्परीक्षा मात्र 37 दिनों में संपन्न हुई और परिणाम 25 दिनों के भीतर घोषित किए गए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों में 58 प्रतिशत महिलाएं हैं — जिसे उन्होंने सरकार की समावेशी नीति का प्रमाण बताया।

उन्होंने कहा कि कमियों को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग किया गया और सरकार ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि ट्रायल दैनिक आधार पर हो ताकि आरोपियों को शीघ्र कड़ी सजा मिल सके और छात्रों को न्याय सुनिश्चित हो।

परीक्षा प्रणाली ध्वस्त होने के दावे को बताया झूठ

सांसद ने कहा कि यह आरोप 'सरासर असत्य और भ्रामक' है कि देश की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने पिछले 3 महीनों में JEE, CUET और नीट की पुनर्परीक्षा सहित तीन राष्ट्रीय स्तरीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नीट परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित प्रारूप में स्थानांतरित करने की दिशा में काम हो रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा उन्नत निगरानी प्रणाली से परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सरकार का रुख

बांसुरी स्वराज ने बताया कि जब प्रदर्शनकारी नेता 6 जून को अमेरिका से लौटे, तो दिल्ली पुलिस ने हवाई अड्डे पर ही आंदोलन की अनुमति दे दी थी — हालांकि वह अनुमति शाम 5 बजे तक के लिए थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर 21 दिनों तक डटे रहे और दिल्ली पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।

उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को संसद को घेरने का प्रयास किया गया, जिसे उन्होंने 'अराजकता का संकेत' बताया। इसके बावजूद सरकार बातचीत के लिए तत्पर रही। उन्होंने बताया कि 6 जून से 20 जुलाई के बीच प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का कोई अनुरोध नहीं आया, लेकिन जैसे ही संदेश मिला, सरकार ने उन्हें BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने के लिए तुरंत आमंत्रित किया।

विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप

बांसुरी स्वराज ने कहा कि एक ओर दावा किया जा रहा है कि यह छात्र आंदोलन है, लेकिन विपक्षी दल इसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'विपक्ष के नेता राहुल गांधी जंतर-मंतर के बजाय प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठे थे — जो एक हाई-सिक्योरिटी जोन है। राहुल गांधी को यह भली-भांति पता होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपने बचपन का कुछ समय वहाँ बिताया है।'

उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवा समझदार हैं और सत्य उनसे छुपा नहीं रहेगा — 'मेरे देश का युवा अराजकता का औजार नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता है।' आने वाले दिनों में सरकार नीट परीक्षा सुधारों पर और ठोस कदम उठाने की दिशा में काम करती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

और 37 दिनों में पुनर्परीक्षा कराना प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण हो सकता है, लेकिन मूल प्रश्न — कि पेपर लीक हुआ कैसे और NTA की जवाबदेही कहाँ है — इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अनुत्तरित रहा। विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाना स्वाभाविक राजनीतिक प्रतिक्रिया है, लेकिन छात्रों की मूल चिंताएं — परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और भविष्य की सुरक्षा — इससे हल नहीं होतीं। कंप्यूटर-आधारित परीक्षा और AI निगरानी की घोषणाएं सही दिशा में हैं, पर उनकी समयसीमा और क्रियान्वयन का ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांसुरी स्वराज ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के बारे में क्या कहा?
BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने 22 मई को कहा कि जंतर-मंतर पर हुए युवा प्रदर्शन का विपक्षी दलों ने राजनीतिकरण किया और छात्रों को अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रदर्शन को शांतिपूर्ण रहने तक जारी रहने दिया।
नीट पेपर लीक मामले में सरकार ने क्या कार्रवाई की?
11 मई को पेपर लीक की जानकारी मिलते ही शिक्षा मंत्रालय ने एफआईआर दर्ज कराई और जांच सीबीआई को सौंप दी। बांसुरी स्वराज के अनुसार, इस मामले में 13 आरोपी अभी भी जेल में हैं और सरकार ने न्यायालय से दैनिक आधार पर ट्रायल चलाने का अनुरोध किया है।
नीट पुनर्परीक्षा कितने दिनों में हुई और परिणाम कब आए?
बांसुरी स्वराज ने बताया कि नीट की पुनर्परीक्षा मात्र 37 दिनों में संपन्न हुई और परिणाम 25 दिनों के भीतर घोषित किए गए। उत्तीर्ण अभ्यर्थियों में 58 प्रतिशत महिलाएं हैं।
NTA ने पिछले 3 महीनों में कौन-सी परीक्षाएं आयोजित कीं?
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने पिछले 3 महीनों में JEE, CUET और नीट पुनर्परीक्षा — तीन राष्ट्रीय स्तरीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित कीं। सांसद ने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि परीक्षा प्रणाली ध्वस्त होने के दावे असत्य हैं।
राहुल गांधी के प्रदर्शन पर BJP ने क्या कहा?
बांसुरी स्वराज ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी जंतर-मंतर की बजाय प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठे, जो एक हाई-सिक्योरिटी जोन है। उन्होंने कहा कि यह विपक्ष की राजनीतिक मंशा को उजागर करता है, न कि छात्र हित की वास्तविक चिंता को।
राष्ट्र प्रेस
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