जंतर-मंतर प्रदर्शन का राजनीतिकरण हुआ, विपक्ष ने छात्रों को औज़ार बनाया: बांसुरी स्वराज
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने 22 मई को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जंतर-मंतर पर हुए युवा विरोध प्रदर्शन को विपक्ष की सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आड़ में राजनीतिक स्वार्थ साधे जा रहे हैं और नीट पेपर लीक मामले में मोदी सरकार ने त्वरित एवं जिम्मेदाराना कार्रवाई की है।
सरकार की प्राथमिकता: छात्र हित सर्वोपरि
बांसुरी स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के युवाओं को राष्ट्र-निर्माता मानते हैं और विकसित भारत की नींव युवा नेतृत्व पर टिकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के लिए बच्चों के भविष्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सांसद ने कहा, 'पीएम मोदी और केंद्र सरकार छात्रों के हितों को प्राथमिकता देती है। जब 11 मई को पेपर लीक की जानकारी मिली, तो मोदी सरकार ने तुरंत कार्रवाई की — शिक्षा मंत्रालय ने एफआईआर दर्ज कराई और जांच सीबीआई को सौंप दी। 13 आरोपी अभी भी जेल में हैं।'
नीट पुनर्परीक्षा और परिणाम
बांसुरी स्वराज ने बताया कि नीट की पुनर्परीक्षा मात्र 37 दिनों में संपन्न हुई और परिणाम 25 दिनों के भीतर घोषित किए गए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों में 58 प्रतिशत महिलाएं हैं — जिसे उन्होंने सरकार की समावेशी नीति का प्रमाण बताया।
उन्होंने कहा कि कमियों को दूर करने के लिए प्रौद्योगिकी का भरपूर उपयोग किया गया और सरकार ने न्यायालय से अनुरोध किया है कि ट्रायल दैनिक आधार पर हो ताकि आरोपियों को शीघ्र कड़ी सजा मिल सके और छात्रों को न्याय सुनिश्चित हो।
परीक्षा प्रणाली ध्वस्त होने के दावे को बताया झूठ
सांसद ने कहा कि यह आरोप 'सरासर असत्य और भ्रामक' है कि देश की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने पिछले 3 महीनों में JEE, CUET और नीट की पुनर्परीक्षा सहित तीन राष्ट्रीय स्तरीय परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि नीट परीक्षा को कंप्यूटर-आधारित प्रारूप में स्थानांतरित करने की दिशा में काम हो रहा है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा उन्नत निगरानी प्रणाली से परीक्षा प्रक्रिया को और मजबूत किया जा रहा है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन पर सरकार का रुख
बांसुरी स्वराज ने बताया कि जब प्रदर्शनकारी नेता 6 जून को अमेरिका से लौटे, तो दिल्ली पुलिस ने हवाई अड्डे पर ही आंदोलन की अनुमति दे दी थी — हालांकि वह अनुमति शाम 5 बजे तक के लिए थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर 21 दिनों तक डटे रहे और दिल्ली पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की।
उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को संसद को घेरने का प्रयास किया गया, जिसे उन्होंने 'अराजकता का संकेत' बताया। इसके बावजूद सरकार बातचीत के लिए तत्पर रही। उन्होंने बताया कि 6 जून से 20 जुलाई के बीच प्रदर्शनकारियों की ओर से बातचीत का कोई अनुरोध नहीं आया, लेकिन जैसे ही संदेश मिला, सरकार ने उन्हें BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिलने के लिए तुरंत आमंत्रित किया।
विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप
बांसुरी स्वराज ने कहा कि एक ओर दावा किया जा रहा है कि यह छात्र आंदोलन है, लेकिन विपक्षी दल इसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'विपक्ष के नेता राहुल गांधी जंतर-मंतर के बजाय प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठे थे — जो एक हाई-सिक्योरिटी जोन है। राहुल गांधी को यह भली-भांति पता होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने अपने बचपन का कुछ समय वहाँ बिताया है।'
उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवा समझदार हैं और सत्य उनसे छुपा नहीं रहेगा — 'मेरे देश का युवा अराजकता का औजार नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माता है।' आने वाले दिनों में सरकार नीट परीक्षा सुधारों पर और ठोस कदम उठाने की दिशा में काम करती रहेगी।