1962 के वीर जसवंत सिंह रावत का घर बनेगा स्मारक और संग्रहालय, सांसद अनिल बलूनी ने पैतृक गांव में किया ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद अनिल बलूनी ने रविवार, 27 सितंबर 2026 को पौड़ी गढ़वाल स्थित 1962 के भारत-चीन युद्ध के महानायक राइफलमैन जसवंत सिंह रावत के पैतृक गांव का दौरा किया और उनके घर को एक संरक्षित स्मारक एवं संग्रहालय के रूप में विकसित करने की औपचारिक घोषणा की। इस यात्रा के दौरान बलूनी ने वीर जवान की पुण्य भूमि को नमन करते हुए वहाँ की मिट्टी को माथे से लगाया और ग्रामीणों की समस्याएँ सुनीं।
सांसद बलूनी ने क्या कहा
पत्रकारों से बातचीत में सांसद बलूनी ने कहा, 'आज मेरे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण दिन है। आज मैं जसवंत सिंह रावत जी के गांव गया, जो 1962 के चीन युद्ध के हीरो थे। मैंने उनके गांव का दौरा किया, उन्हें श्रद्धांजलि दी और उस जमीन की मिट्टी को अपने सिर पर लगाया।'
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने जसवंत सिंह रावत के परिवार के सदस्यों से उनके घर पर और बाद में फोन पर भी बातचीत की। बलूनी ने कहा, 'मैंने तय किया है कि उनके घर और उसके आसपास के पूरे गांव को एक संरक्षित धरोहर स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।'
संग्रहालय परियोजना की रूपरेखा
सांसद ने घोषणा की कि रावत के पैतृक घर को स्मारक और संग्रहालय के रूप में तैयार किया जाएगा और इसकी तैयारियाँ शुरू कर दी गई हैं। ग्रामीणों की माँग पर वहाँ एक भव्य प्रवेश द्वार भी बनाया जाएगा। बलूनी ने स्पष्ट किया कि 17 नवंबर को संग्रहालय परियोजना की विधिवत शुरुआत की जाएगी — उस ऐतिहासिक भूमि से लाई गई मिट्टी का उपयोग करके, जहाँ जसवंत सिंह रावत ने अपना अदम्य शौर्य दिखाया था।
बलूनी ने कहा, 'हम वहाँ पर एक शानदार म्यूज़ियम तैयार करेंगे, जिससे देश-दुनिया के लोग वहाँ आएं और प्रेरणा लें कि फोर्थ गढ़वाल राइफल के जसवंत रावत ने दुश्मनों के दाँत खट्टे किए थे।'
जसवंत सिंह रावत की अमर वीरगाथा
गौरतलब है कि राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की वीरता की कहानी भारतीय सेना के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। स्थानीय लोग उन्हें श्रद्धा से 'जसवंत बाबा' कहते हैं। 17 नवंबर 1962 के दिन उन्होंने अकेले दम पर 300 चीनी सैनिकों को मार गिराया था और पूरी चीनी सेना को 72 घंटों तक रोके रखा था — यह कारनामा भारतीय सैन्य इतिहास में अद्वितीय माना जाता है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा तनाव को लेकर राष्ट्रीय स्मृति और सैन्य धरोहर के संरक्षण पर सार्वजनिक संवाद तेज़ हुआ है।
आम जनता और ग्रामीणों पर असर
सांसद बलूनी ने शनिवार की रात एक गांव में ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी समस्याएँ सुनीं। प्रस्तावित संग्रहालय और स्मारक स्थल से पौड़ी गढ़वाल क्षेत्र में पर्यटन, सांस्कृतिक जागरूकता और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा मिलने की संभावना है। ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया और भव्य प्रवेश द्वार की माँग रखी, जिसे बलूनी ने स्वीकार किया।
आगे क्या होगा
17 नवंबर 2026 को संग्रहालय परियोजना की औपचारिक शुरुआत प्रस्तावित है। उस दिन उस ऐतिहासिक स्थल की मिट्टी का उपयोग कर इस परियोजना का शुभारंभ होगा। बलूनी के अनुसार, यह स्मारक न केवल देश के लिए, बल्कि विश्व के उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा जो भारतीय सैनिकों की वीरता को जानना चाहते हैं।