जातिगत जनगणना के बिना आरक्षण वर्गीकरण बेमानी: राजद सांसद मनोज झा का NDA पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने 30 अगस्त को पटना में जातिगत आरक्षण, जातिगत जनगणना और बिहार में बाढ़ की स्थिति पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की नीतियों पर तीखा हमला बोला। झा ने कहा कि बिना ठोस जातिगत जनगणना के आरक्षण में वर्गीकरण का कोई अर्थ नहीं है और सरकार की मंशा पर उन्होंने सवाल खड़े किए।
जातिगत जनगणना के बिना वर्गीकरण अधूरा
मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी में वर्गीकरण के लिए रोहिणी आयोग का गठन किया था, लेकिन बिना जातिगत जनगणना के यह कदम अधूरा है। उन्होंने कहा, "इस विषय को मैं पढ़ाता भी हूं। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, यह वर्गीकरण उसी तरह है कि गाड़ी के आगे घोड़ा रख दो।" झा के अनुसार, जमीन का स्वामित्व, शिक्षा में पहुँच, आर्थिक स्थिति और रोज़गार की वास्तविकता जाने बिना कोई भी वर्गीकरण भ्रामक रहेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना कर भी रही है और नहीं भी — "क्योंकि उनकी मंशा नहीं है।" यह ऐसे समय में आया है जब जातिगत जनगणना की माँग पूरे विपक्ष में तेज़ हो रही है और बिहार में पहले ही एक जाति सर्वेक्षण कराया जा चुका है।
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर निशाना
झा ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, "दोनों इस तरह के सरोकारों को एक व्यापक पटल पर देखने के इच्छुक नहीं हैं।" उनका आरोप था कि दोनों नेता केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ बने रहने के लिए उनकी भाषा बोल रहे हैं।
झा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुई एक घटना का भी हवाला दिया और चिराग पासवान से इस पर स्पष्टीकरण माँगा। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब NDA के दलित और पिछड़े वर्ग के घटक दलों की भूमिका पर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।
बिहार में बाढ़: सरकारी तैयारी पर सवाल
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद बिहार की नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है और प्रशासन अलर्ट पर है। झा ने माना कि इस बार बाढ़ का असर उतना गंभीर नहीं रहा जितनी आशंका थी, लेकिन उन्होंने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा, "बिहार में बाढ़ का असर उस स्तर का नहीं रहा, जिसकी हमें आशंका थी — कम से कम तीव्रता और पैमाने के लिहाज से तो नहीं। लेकिन बाढ़ और आपदा प्रबंधन के मामले में हमारी पार्टी का हमेशा से यह मानना रहा है कि इसे सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाला नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करने वाला होना चाहिए, और इस दिशा में अभी भी कमी है।"
आगे क्या
जातिगत जनगणना की माँग और आरक्षण वर्गीकरण का मुद्दा आने वाले समय में संसद और राज्य विधानसभाओं में और अधिक केंद्रीय बनने की संभावना है। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ, केंद्र सरकार को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।