30 अगस्त 2026
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जातिगत जनगणना के बिना आरक्षण वर्गीकरण बेमानी: राजद सांसद मनोज झा का NDA पर हमला

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जातिगत जनगणना के बिना आरक्षण वर्गीकरण बेमानी: राजद सांसद मनोज झा का NDA पर हमला

सारांश

राजद सांसद मनोज झा ने साफ कहा — जातिगत जनगणना के बिना OBC वर्गीकरण महज दिखावा है। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी को BJP की भाषा बोलने वाला बताते हुए उन्होंने NDA की आरक्षण नीति को 'मिसलीडिंग' करार दिया।

मुख्य बातें

राजद सांसद मनोज झा ने 30 अगस्त को पटना में NDA की आरक्षण नीति को 'भ्रामक' बताया।
झा के अनुसार, रोहिणी आयोग द्वारा OBC वर्गीकरण बिना जातिगत जनगणना के अधूरा और बेमानी है।
चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर आरोप — दोनों BJP के साथ बने रहने के लिए उनकी भाषा बोल रहे हैं।
बिहार में बाढ़ की स्थिति पर झा ने माना कि असर आशंका से कम रहा, लेकिन सरकार की आपदा तैयारी अभी भी प्रतिक्रियात्मक है।
नेपाल में आपदा के बाद बिहार की नदियों का जलस्तर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट पर।

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने 30 अगस्त को पटना में जातिगत आरक्षण, जातिगत जनगणना और बिहार में बाढ़ की स्थिति पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की नीतियों पर तीखा हमला बोला। झा ने कहा कि बिना ठोस जातिगत जनगणना के आरक्षण में वर्गीकरण का कोई अर्थ नहीं है और सरकार की मंशा पर उन्होंने सवाल खड़े किए।

जातिगत जनगणना के बिना वर्गीकरण अधूरा

मनोज झा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओबीसी में वर्गीकरण के लिए रोहिणी आयोग का गठन किया था, लेकिन बिना जातिगत जनगणना के यह कदम अधूरा है। उन्होंने कहा, "इस विषय को मैं पढ़ाता भी हूं। जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, यह वर्गीकरण उसी तरह है कि गाड़ी के आगे घोड़ा रख दो।" झा के अनुसार, जमीन का स्वामित्व, शिक्षा में पहुँच, आर्थिक स्थिति और रोज़गार की वास्तविकता जाने बिना कोई भी वर्गीकरण भ्रामक रहेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जातिगत जनगणना कर भी रही है और नहीं भी — "क्योंकि उनकी मंशा नहीं है।" यह ऐसे समय में आया है जब जातिगत जनगणना की माँग पूरे विपक्ष में तेज़ हो रही है और बिहार में पहले ही एक जाति सर्वेक्षण कराया जा चुका है।

चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर निशाना

झा ने केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, "दोनों इस तरह के सरोकारों को एक व्यापक पटल पर देखने के इच्छुक नहीं हैं।" उनका आरोप था कि दोनों नेता केवल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ बने रहने के लिए उनकी भाषा बोल रहे हैं।

झा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ हुई एक घटना का भी हवाला दिया और चिराग पासवान से इस पर स्पष्टीकरण माँगा। गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब NDA के दलित और पिछड़े वर्ग के घटक दलों की भूमिका पर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।

बिहार में बाढ़: सरकारी तैयारी पर सवाल

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद बिहार की नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है और प्रशासन अलर्ट पर है। झा ने माना कि इस बार बाढ़ का असर उतना गंभीर नहीं रहा जितनी आशंका थी, लेकिन उन्होंने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा, "बिहार में बाढ़ का असर उस स्तर का नहीं रहा, जिसकी हमें आशंका थी — कम से कम तीव्रता और पैमाने के लिहाज से तो नहीं। लेकिन बाढ़ और आपदा प्रबंधन के मामले में हमारी पार्टी का हमेशा से यह मानना रहा है कि इसे सिर्फ प्रतिक्रिया देने वाला नहीं, बल्कि पहले से तैयारी करने वाला होना चाहिए, और इस दिशा में अभी भी कमी है।"

आगे क्या

जातिगत जनगणना की माँग और आरक्षण वर्गीकरण का मुद्दा आने वाले समय में संसद और राज्य विधानसभाओं में और अधिक केंद्रीय बनने की संभावना है। विपक्षी दलों का दबाव बढ़ने के साथ, केंद्र सरकार को इस पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि आँकड़ों पर। लेकिन विडंबना यह है कि RJD शासन के दौरान भी बिहार में व्यापक जातिगत डेटा संग्रह की पहल सीमित रही। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर उनका हमला राजनीतिक रूप से तीखा है, पर यह सवाल भी उठता है कि विपक्ष के पास इस मुद्दे पर ठोस वैकल्पिक रोडमैप क्या है। बिहार में बाढ़ प्रबंधन की 'प्रोएक्टिव' माँग दशकों पुरानी है — और हर दल के शासन में यही शिकायत दोहराई जाती रही है।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज झा ने जातिगत जनगणना पर क्या कहा?
राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि बिना जातिगत जनगणना के OBC में वर्गीकरण भ्रामक है, क्योंकि जमीन स्वामित्व, शिक्षा, आर्थिक स्थिति और रोज़गार की वास्तविकता जाने बिना कोई भी वर्गीकरण अधूरा रहेगा। उन्होंने सरकार पर जनगणना को जानबूझकर अधूरा रखने का आरोप लगाया।
रोहिणी आयोग क्या है और इस पर झा की क्या आपत्ति है?
रोहिणी आयोग केंद्र सरकार द्वारा OBC वर्ग के भीतर उप-वर्गीकरण के लिए गठित आयोग है। मनोज झा की आपत्ति है कि जब तक जातिगत जनगणना के ज़रिए सटीक आँकड़े उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक यह वर्गीकरण तथ्यों पर नहीं, अनुमानों पर आधारित रहेगा।
मनोज झा ने चिराग पासवान और जीतन राम मांझी पर क्या आरोप लगाए?
झा ने आरोप लगाया कि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और जीतन राम मांझी दोनों आरक्षण के व्यापक सरोकारों को देखने के इच्छुक नहीं हैं और केवल BJP के साथ बने रहने के लिए उनकी भाषा बोल रहे हैं।
बिहार में बाढ़ की मौजूदा स्थिति क्या है?
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद बिहार की नदियों का जलस्तर बढ़ा है और प्रशासन अलर्ट पर है। मनोज झा के अनुसार इस बार बाढ़ का असर आशंका से कम रहा, लेकिन सरकार की आपदा प्रबंधन तैयारी अभी भी प्रतिक्रियात्मक बनी हुई है।
जातिगत जनगणना की माँग क्यों महत्वपूर्ण है?
जातिगत जनगणना से विभिन्न जातियों की जनसंख्या, आर्थिक स्थिति, शिक्षा और रोज़गार के सटीक आँकड़े मिलते हैं, जिनके आधार पर आरक्षण नीति को तर्कसंगत बनाया जा सकता है। इसके बिना, आलोचकों का कहना है कि कोई भी वर्गीकरण अनुमान पर आधारित रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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