18 जुलाई 2026
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परिसीमन पर विपक्षी एकता फेल? JDU प्रवक्ता राजीव रंजन का कांग्रेस पर तीखा प्रहार

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परिसीमन पर विपक्षी एकता फेल? JDU प्रवक्ता राजीव रंजन का कांग्रेस पर तीखा प्रहार

सारांश

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने 18 जुलाई को पटना से कांग्रेस की भीतरी दरारों और परिसीमन पर विपक्षी एकता की कोशिशों को निशाने पर लिया। चन्नी-नेतृत्व विवाद से लेकर राज्यवार सहयोगी दलों से टकराव तक — उनका तर्क है कि कांग्रेस अब क्षेत्रीय दलों का भरोसा खो चुकी है।

मुख्य बातें

जेडीयू राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने 18 जुलाई को पटना में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी और मौजूदा कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेदों को भूपेश बघेल भी नहीं सुलझा सके — JDU का दावा।
कांग्रेस पश्चिम बंगाल (TMC), उत्तर प्रदेश (SP), पंजाब (AAP) और केरल (वाम दल) में अपने संभावित सहयोगियों के ही खिलाफ लड़ती है।
राजीव रंजन का दावा — परिसीमन विधेयक पर विपक्षी एकजुटता की कांग्रेस की कोशिशें सफल नहीं होंगी।
PM नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को बेहतर बताते हुए कांग्रेस के शासन को भ्रष्टाचार-प्रभावित करार दिया।

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने 18 जुलाई को पटना में कांग्रेस के भीतरी कलह, विपक्षी गठबंधन की बिखरती स्थिति और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष की एकजुटता की कोशिशों को लेकर कड़े सवाल उठाए। उनका दावा है कि कांग्रेस संगठनात्मक रूप से लगातार कमज़ोर हो रही है और नेतृत्व को लेकर उसके भीतर इतने गहरे मतभेद हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों में इसका सीधा असर पड़ेगा।

चन्नी-नेतृत्व विवाद: भीतरी दरार की बड़ी मिसाल

राजीव रंजन ने कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और अनुसूचित जाति सहित कमज़ोर वर्गों के बीच उनकी मज़बूत पकड़ है। बावजूद इसके, मौजूदा नेतृत्व के साथ उनके मतभेद इतने गहरे हैं कि वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल भी उन्हें पाटने में नाकाम रहे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब भी किसी मुद्दे में हस्तक्षेप करते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। अब वे अनुशासन लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर बने हालात चुनावी नुकसान का कारण बन सकते हैं।

विपक्षी एकजुटता पर सवाल

जेडीयू प्रवक्ता ने तर्क दिया कि कांग्रेस अपने तमाम सहयोगी दलों के साथ एक साथ विरोधाभासी स्थिति में है। पश्चिम बंगाल में वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ चुनाव लड़ती है; उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ मतभेद हैं; पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) से सीधा मुकाबला है; और केरल में वह वाम दलों के विरुद्ध खड़ी है। उनके अनुसार, इन्हीं कारणों से क्षेत्रीय दल अब कांग्रेस की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।

राजीव रंजन ने दावा किया कि परिसीमन विधेयक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहयोगियों को एकजुट करने की कांग्रेस की कोशिशें इन्हीं अंतर्विरोधों के चलते सफल नहीं होंगी। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में पहले से ही गहरी आशंकाएँ हैं।

कांग्रेस शासन बनाम NDA कार्यकाल

राजीव रंजन ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लंबे शासनकाल की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल से की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का शासन भ्रष्टाचार और घोटालों से प्रभावित रहा, जिसके कारण जनता का भरोसा उससे लगातार कम होता गया। उन्होंने मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को बेहतर बताते हुए कहा कि इसी वजह से जनता लगातार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में जनादेश देती रही है।

गौरतलब है कि ये सभी दावे जेडीयू के राजनीतिक दृष्टिकोण से किए गए हैं और कांग्रेस की ओर से अभी तक इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

लोकतंत्र और जवाबदेही पर JDU का रुख

राजीव रंजन ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सत्ताधारी दल से सवाल पूछना हर नागरिक और विपक्ष का अधिकार है, लेकिन अंतिम फैसला जनता ही करती है। उन्होंने कहा कि कभी देश की सबसे मज़बूत राजनीतिक ताकत रही कांग्रेस अब धीरे-धीरे संगठन के रूप में अपनी अहमियत खो रही है।

आगे क्या

परिसीमन विधेयक पर विपक्षी एकता की असली परीक्षा संसद के आगामी सत्र में होगी, जहाँ यह देखना होगा कि क्षेत्रीय दल कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट होते हैं या अलग-अलग रणनीति अपनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विपक्षी एकता की असली चुनौती वे अंतर्विरोध हैं जिनकी ओर उन्होंने इशारा किया है — और ये तथ्यात्मक रूप से सत्यापन योग्य हैं। पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और उसके संभावित सहयोगियों के बीच चुनावी टकराव एक वास्तविकता है, न कि केवल BJP-NDA का प्रचार। असली सवाल यह है कि क्या 'INDIA' गठबंधन की छतरी इन ज़मीनी विरोधाभासों को संसदीय मुद्दों पर ढक सकती है, या परिसीमन जैसे राज्यों के हितों से जुड़े विधेयकों पर हर दल अपनी-अपनी राह चलेगा।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JDU ने परिसीमन विधेयक पर कांग्रेस की भूमिका पर क्या सवाल उठाए?
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि कांग्रेस अपने तमाम संभावित सहयोगी दलों — TMC, SP, AAP और वाम दलों — के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में चुनाव लड़ती है, इसलिए परिसीमन जैसे मुद्दे पर उनकी एकजुटता की कोशिशें विश्वसनीय नहीं हैं। उनका दावा है कि क्षेत्रीय दल अब कांग्रेस की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
चरणजीत सिंह चन्नी और कांग्रेस नेतृत्व के बीच विवाद क्या है?
जेडीयू के अनुसार, पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और मौजूदा कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद इतने गहरे हैं कि वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल भी उन्हें दूर नहीं कर सके। चन्नी का अनुसूचित जाति और कमज़ोर वर्गों में प्रभाव होने के बावजूद यह दरार बनी हुई है — हालाँकि कांग्रेस ने इस दावे पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
राजीव रंजन ने PM मोदी के कार्यकाल की तुलना कांग्रेस से कैसे की?
राजीव रंजन ने दावा किया कि कांग्रेस का शासनकाल भ्रष्टाचार और घोटालों से प्रभावित रहा, जबकि PM नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल में जनता का NDA के प्रति भरोसा लगातार बढ़ा है। यह जेडीयू का राजनीतिक आकलन है और विपक्ष इससे असहमत है।
परिसीमन विधेयक का विपक्षी एकता पर क्या असर पड़ सकता है?
परिसीमन विधेयक दक्षिण भारतीय राज्यों के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि इससे लोकसभा सीटों के वितरण में बदलाव की आशंका है। जेडीयू का तर्क है कि कांग्रेस इस मुद्दे पर क्षेत्रीय दलों को एकजुट करने में सक्षम नहीं होगी, क्योंकि उसके अपने सहयोगियों के साथ राज्यवार टकराव हैं।
JDU की कांग्रेस आलोचना का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
जनता दल (यूनाइटेड) NDA गठबंधन का हिस्सा है और केंद्र में BJP के साथ सत्ता में भागीदार है। इस पृष्ठभूमि में राजीव रंजन के बयान को सत्तापक्ष की राजनीतिक रणनीति के तहत देखा जाना चाहिए। कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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