परिसीमन पर विपक्षी एकता फेल? JDU प्रवक्ता राजीव रंजन का कांग्रेस पर तीखा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने 18 जुलाई को पटना में कांग्रेस के भीतरी कलह, विपक्षी गठबंधन की बिखरती स्थिति और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष की एकजुटता की कोशिशों को लेकर कड़े सवाल उठाए। उनका दावा है कि कांग्रेस संगठनात्मक रूप से लगातार कमज़ोर हो रही है और नेतृत्व को लेकर उसके भीतर इतने गहरे मतभेद हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों में इसका सीधा असर पड़ेगा।
चन्नी-नेतृत्व विवाद: भीतरी दरार की बड़ी मिसाल
राजीव रंजन ने कहा कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और अनुसूचित जाति सहित कमज़ोर वर्गों के बीच उनकी मज़बूत पकड़ है। बावजूद इसके, मौजूदा नेतृत्व के साथ उनके मतभेद इतने गहरे हैं कि वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल भी उन्हें पाटने में नाकाम रहे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब भी किसी मुद्दे में हस्तक्षेप करते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। अब वे अनुशासन लागू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के भीतर बने हालात चुनावी नुकसान का कारण बन सकते हैं।
विपक्षी एकजुटता पर सवाल
जेडीयू प्रवक्ता ने तर्क दिया कि कांग्रेस अपने तमाम सहयोगी दलों के साथ एक साथ विरोधाभासी स्थिति में है। पश्चिम बंगाल में वह तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ चुनाव लड़ती है; उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के साथ मतभेद हैं; पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) से सीधा मुकाबला है; और केरल में वह वाम दलों के विरुद्ध खड़ी है। उनके अनुसार, इन्हीं कारणों से क्षेत्रीय दल अब कांग्रेस की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।
राजीव रंजन ने दावा किया कि परिसीमन विधेयक जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सहयोगियों को एकजुट करने की कांग्रेस की कोशिशें इन्हीं अंतर्विरोधों के चलते सफल नहीं होंगी। यह ऐसे समय में आया है जब परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में पहले से ही गहरी आशंकाएँ हैं।
कांग्रेस शासन बनाम NDA कार्यकाल
राजीव रंजन ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लंबे शासनकाल की तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल से की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का शासन भ्रष्टाचार और घोटालों से प्रभावित रहा, जिसके कारण जनता का भरोसा उससे लगातार कम होता गया। उन्होंने मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को बेहतर बताते हुए कहा कि इसी वजह से जनता लगातार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पक्ष में जनादेश देती रही है।
गौरतलब है कि ये सभी दावे जेडीयू के राजनीतिक दृष्टिकोण से किए गए हैं और कांग्रेस की ओर से अभी तक इन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
लोकतंत्र और जवाबदेही पर JDU का रुख
राजीव रंजन ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में सत्ताधारी दल से सवाल पूछना हर नागरिक और विपक्ष का अधिकार है, लेकिन अंतिम फैसला जनता ही करती है। उन्होंने कहा कि कभी देश की सबसे मज़बूत राजनीतिक ताकत रही कांग्रेस अब धीरे-धीरे संगठन के रूप में अपनी अहमियत खो रही है।
आगे क्या
परिसीमन विधेयक पर विपक्षी एकता की असली परीक्षा संसद के आगामी सत्र में होगी, जहाँ यह देखना होगा कि क्षेत्रीय दल कांग्रेस के नेतृत्व में एकजुट होते हैं या अलग-अलग रणनीति अपनाते हैं।