झारखंड में 4,619 एकड़ अवैध अफीम की खेती नष्ट, 2025-26 में 77 मामले दर्ज और 48 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड पुलिस ने वर्ष 2025-26 में राज्यभर में अभियान चलाकर 4,619.34 एकड़ में उगाई गई अवैध अफीम की फसल नष्ट की है। राज्य सीआईडी मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में 77 प्राथमिकियाँ दर्ज की गईं और 48 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई राज्य के कई जिलों में एक साथ चलाई गई, जिसमें चतरा सर्वाधिक प्रभावित ज़िले के रूप में सामने आया।
जिलावार कार्रवाई का विवरण
सबसे व्यापक अभियान चतरा जिले में चला, जहाँ 2,742.22 एकड़ में लगी अवैध फसल नष्ट की गई और 21 प्राथमिकियाँ दर्ज हुईं। लातेहार में 832.14 एकड़ (11 मामले), हजारीबाग में 393 एकड़ (8 मामले), पलामू में 314.62 एकड़ और खूंटी में 215.71 एकड़ (10 मामले) में अवैध खेती नष्ट की गई।
इसके अतिरिक्त पश्चिमी सिंहभूम में 52.69 एकड़ (12 मामले), रांची में 34.50 एकड़ (7 मामले), सरायकेला-खरसावां में 24.70 एकड़ (3 मामले), सिमडेगा में 3.50 एकड़ (2 मामले), लोहरदगा में 3.25 एकड़, कोडरमा में 3 एकड़ और देवघर में 0.01 एकड़ में अवैध फसल नष्ट की गई। उल्लेखनीय है कि लातेहार में अफीम के साथ-साथ गांजे की दो अवैध फसलें भी नष्ट की गईं।
पिछले वर्ष की तुलना में बड़ी गिरावट
सीआईडी के आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024-25 की तुलना में इस वर्ष अवैध अफीम की खेती का दायरा उल्लेखनीय रूप से घटा है। पिछले वर्ष राज्य में 27,015.03 एकड़ में अफीम की खेती चिन्हित हुई थी, जो इस वर्ष घटकर 4,619.34 एकड़ रह गई — यानी एक वर्ष में लगभग 22,400 एकड़ की कमी दर्ज की गई।
वर्ष 2024-25 में 313 मामले दर्ज हुए थे और 237 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस वर्ष सर्वाधिक 15,246.79 एकड़ में अफीम की खेती खूंटी जिले में पाई गई थी।
पाँच वर्षों का रुझान
सीआईडी मुख्यालय के अभिलेखों के अनुसार, वर्ष 2021-22 में 2,871.02 एकड़, 2022-23 में 5,494.10 एकड़ और 2023-24 में 4,853.99 एकड़ में अवैध अफीम की फसल नष्ट की गई थी। इस प्रकार वर्ष 2024-25 में रकबे में असाधारण उछाल के बाद 2025-26 में तेज़ गिरावट देखी गई है।
अवैध खेती के केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में अफीम की अवैध खेती मुख्य रूप से चतरा, खूंटी, लातेहार, रांची, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और हजारीबाग जिलों में केंद्रित रही है। ये जिले राज्य के वन-बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों में हैं, जहाँ निगरानी तंत्र की पहुँच ऐतिहासिक रूप से सीमित रही है। आगे की कार्रवाई और निगरानी के लिए पुलिस का अभियान जारी रहने की उम्मीद है।