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जेपीएससी पेपर लीक: 14 दिन बाद राहुल गांधी की चिंता पर जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार का पलटवार

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जेपीएससी पेपर लीक: 14 दिन बाद राहुल गांधी की चिंता पर जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार का पलटवार

सारांश

झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक के खिलाफ 14 दिन से सड़कों पर बैठे छात्रों पर न हेमंत सोरेन सरकार ने ध्यान दिया, न विपक्ष ने — जब तक मुद्दा सुर्खियों में नहीं आया। जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने राहुल गांधी की देरी और सरकार की चुप्पी दोनों पर एक साथ निशाना साधा।

मुख्य बातें

जेपीएससी पेपर लीक के विरुद्ध झारखंड में छात्र 14 दिनों से आंदोलनरत हैं; सरकार की ओर से अब तक कोई संवाद नहीं।
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने राहुल गांधी की देरी से जताई चिंता और तेजस्वी यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए।
नीरज कुमार ने हेमंत सोरेन सरकार को संवाद न करने के लिए आड़े हाथों लिया; पेपर लीक को 'छात्रों के भविष्य से खिलवाड़' बताया।
RSS प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण बयान पर कहा — लाभ का मूल्यांकन ज़रूरी, डॉ.
अंबेडकर की मूल भावना अधूरी।
महिला आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना के बाद परिसीमन को संवैधानिक आवश्यकता बताया।
यूपीआई पर लेनदेन शुल्क और विदेशी फंडिंग के राजनीतिक दुरुपयोग पर भी नीरज कुमार ने चिंता जताई।

झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक के विरुद्ध 14 दिनों से सड़कों पर डटे छात्रों के आंदोलन को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने 7 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देर से जताई गई चिंता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को भी आड़े हाथों लिया।

राहुल गांधी की देरी पर सवाल

नीरज कुमार ने कहा, "मैं बार-बार यह सवाल पूछ रहा था कि राहुल गांधी चुप क्यों हैं? झारखंड के इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव चुप क्यों हैं? अगर छात्र वहाँ विरोध कर रहे हैं, तो वे उनसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं? जब यह मुद्दा चर्चा में आया, तब राहुल गांधी ने चिंता जताई।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दों पर निरंतर सजगता ज़रूरी है, न कि केवल तब जब विषय सुर्खियों में हो।

हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना

14 दिनों से आंदोलनरत छात्रों से सरकार की ओर से अब तक कोई संवाद न होने पर नीरज कुमार ने कहा, "लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ी पूंजी है। महात्मा गांधी और महात्मा बुद्ध ने भी संवाद को जीवन का केंद्र माना था। न आंदोलनकारी हठधर्मी हों, न सरकार — दोनों पक्षों को लचीला रुख अपनाना चाहिए।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और सरकार को तत्काल छात्रों से बातचीत कर एक सुदृढ़ परीक्षा प्रणाली स्थापित करनी चाहिए।

आरक्षण नीति पर विमर्श

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नीरज कुमार ने कहा कि आरक्षण आवश्यक है, किंतु इसका वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, "दलितों और ओबीसी के लिए आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक कितना पहुँचा, जिनके लिए इसे बनाया गया था — यह आकलन पहले होना चाहिए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूल भावना अभी पूरी नहीं हुई है और इस दिशा में एक समग्र नीति की आवश्यकता है।

महिला आरक्षण और परिसीमन

महिला आरक्षण विधेयक पर नीरज कुमार ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में इसे लागू करने के लिए परिसीमन संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। उन्होंने नीतीश कुमार के पंचायती राज में महिलाओं को भागीदारी दिलाने के कदम को एक राष्ट्रीय मॉडल बताया। उनके अनुसार जनगणना के बाद ही परिसीमन संभव है और इस प्रश्न पर राजनीतिक ईर्ष्या से प्रेरित मतभेद दुखद हैं।

विदेशी फंडिंग और यूपीआई शुल्क पर रुख

नीरज कुमार ने विदेशी फंडिंग को देश की राजनीति के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि एनजीओ की आड़ में विदेशी धन का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है और चुनाव आयोग तथा सरकार को मिलकर इस पर निगरानी रखनी चाहिए। यूपीआई पर लेनदेन शुल्क लगाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि व्यावसायिक लेनदेन के लिए शुल्क में कोई बुराई नहीं है, विशेषकर जब GST पंजीकृत कारोबारी डिजिटल प्रणाली का उपयोग करें।

गौरतलब है कि झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही और विपक्ष की प्रासंगिकता का सवाल भी बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार-छात्र संवाद की दिशा तय करेगी कि यह आंदोलन किस मोड़ पर जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राष्ट्रीय नेता मौन रहते हैं। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन, जिसमें जेडीयू की सहयोगी भूमिका है, स्वयं भी छात्रों से संवाद में विफल रहा है। पेपर लीक की पुनरावृत्ति — जो देशभर में एक स्थायी संकट बन चुकी है — यह दर्शाती है कि परीक्षा प्रणाली की संरचनात्मक खामियाँ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से कहीं गहरी हैं। असली सवाल यह है कि 14 दिन बाद भी सरकार ने छात्रों से बात क्यों नहीं की — और इसका जवाब किसी एक दल के पास नहीं है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक विवाद क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोपों के बाद राज्य में छात्र 14 दिनों से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की माँग है कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करे और परीक्षा प्रणाली में सुधार लाए।
नीरज कुमार ने राहुल गांधी की आलोचना क्यों की?
जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार ने कहा कि 14 दिनों तक छात्र आंदोलन करते रहे, लेकिन राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने तब तक चुप्पी साधे रखी जब तक यह मुद्दा राष्ट्रीय चर्चा में नहीं आया। उनके अनुसार यह प्रतिक्रिया देर से और दबाव में आई, न कि स्वतःस्फूर्त संवेदना से।
हेमंत सोरेन सरकार पर क्या आरोप लगाए गए?
नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने 14 दिनों के आंदोलन के बावजूद छात्रों से कोई संवाद नहीं किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ी पूंजी है और सरकार की यह हठधर्मिता अस्वीकार्य है।
नीरज कुमार ने आरक्षण पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आरक्षण आवश्यक है, परंतु यह मूल्यांकन ज़रूरी है कि दलितों और ओबीसी के लिए बने इस प्रावधान का लाभ वास्तव में लक्षित वर्ग तक पहुँचा या नहीं। उन्होंने डॉ. अंबेडकर की मूल भावना को अधूरा बताते हुए एक समग्र नीति की माँग की।
महिला आरक्षण लागू होने में देरी क्यों है?
नीरज कुमार के अनुसार संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन संवैधानिक रूप से अनिवार्य है, जो जनगणना के बाद ही संभव है। चूँकि जनगणना अभी नहीं हुई है, इसलिए इस प्रक्रिया में समय लगेगा।
राष्ट्र प्रेस
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