जेपीएससी पेपर लीक: 14 दिन बाद राहुल गांधी की चिंता पर जेडीयू एमएलसी नीरज कुमार का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक के विरुद्ध 14 दिनों से सड़कों पर डटे छात्रों के आंदोलन को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने 7 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा देर से जताई गई चिंता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को भी आड़े हाथों लिया।
राहुल गांधी की देरी पर सवाल
नीरज कुमार ने कहा, "मैं बार-बार यह सवाल पूछ रहा था कि राहुल गांधी चुप क्यों हैं? झारखंड के इस मुद्दे पर तेजस्वी यादव चुप क्यों हैं? अगर छात्र वहाँ विरोध कर रहे हैं, तो वे उनसे बात क्यों नहीं कर रहे हैं? जब यह मुद्दा चर्चा में आया, तब राहुल गांधी ने चिंता जताई।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मुद्दों पर निरंतर सजगता ज़रूरी है, न कि केवल तब जब विषय सुर्खियों में हो।
हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना
14 दिनों से आंदोलनरत छात्रों से सरकार की ओर से अब तक कोई संवाद न होने पर नीरज कुमार ने कहा, "लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ी पूंजी है। महात्मा गांधी और महात्मा बुद्ध ने भी संवाद को जीवन का केंद्र माना था। न आंदोलनकारी हठधर्मी हों, न सरकार — दोनों पक्षों को लचीला रुख अपनाना चाहिए।" उन्होंने स्पष्ट किया कि पेपर लीक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और सरकार को तत्काल छात्रों से बातचीत कर एक सुदृढ़ परीक्षा प्रणाली स्थापित करनी चाहिए।
आरक्षण नीति पर विमर्श
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए नीरज कुमार ने कहा कि आरक्षण आवश्यक है, किंतु इसका वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन भी होना चाहिए। उन्होंने कहा, "दलितों और ओबीसी के लिए आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक कितना पहुँचा, जिनके लिए इसे बनाया गया था — यह आकलन पहले होना चाहिए।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूल भावना अभी पूरी नहीं हुई है और इस दिशा में एक समग्र नीति की आवश्यकता है।
महिला आरक्षण और परिसीमन
महिला आरक्षण विधेयक पर नीरज कुमार ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में इसे लागू करने के लिए परिसीमन संवैधानिक रूप से अनिवार्य है। उन्होंने नीतीश कुमार के पंचायती राज में महिलाओं को भागीदारी दिलाने के कदम को एक राष्ट्रीय मॉडल बताया। उनके अनुसार जनगणना के बाद ही परिसीमन संभव है और इस प्रश्न पर राजनीतिक ईर्ष्या से प्रेरित मतभेद दुखद हैं।
विदेशी फंडिंग और यूपीआई शुल्क पर रुख
नीरज कुमार ने विदेशी फंडिंग को देश की राजनीति के लिए गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि एनजीओ की आड़ में विदेशी धन का राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है और चुनाव आयोग तथा सरकार को मिलकर इस पर निगरानी रखनी चाहिए। यूपीआई पर लेनदेन शुल्क लगाने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि व्यावसायिक लेनदेन के लिए शुल्क में कोई बुराई नहीं है, विशेषकर जब GST पंजीकृत कारोबारी डिजिटल प्रणाली का उपयोग करें।
गौरतलब है कि झारखंड में जेपीएससी पेपर लीक विवाद अब केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही और विपक्ष की प्रासंगिकता का सवाल भी बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार-छात्र संवाद की दिशा तय करेगी कि यह आंदोलन किस मोड़ पर जाता है।