29 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

झारखंड में वज्रपात का कहर: 15 दिनों में 30 से अधिक मौतें, 35 घायल; येलो अलर्ट जारी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड में वज्रपात का कहर: 15 दिनों में 30 से अधिक मौतें, 35 घायल; येलो अलर्ट जारी

सारांश

झारखंड में मानसून का मौसम इस बार मौत बनकर बरस रहा है। सिर्फ 15 दिनों में वज्रपात ने 30 से अधिक जिंदगियाँ छीन लीं — किसान, बच्चे, वनकर्मी, खिलाड़ी। एक दशक में 1,669 मौतों का राज्य अब भी हर मानसून में उसी त्रासदी को दोहराता है।

मुख्य बातें

12 जून से 29 जून 2025 के बीच झारखंड में वज्रपात से 30 से अधिक लोगों की मौत और 35 से ज्यादा घायल ।
रविवार को रांची के सोनाहातू में वनरक्षक रोशन श्रीवास्तव की वज्रपात से मौत; दो वनकर्मी झुलसे।
पश्चिमी सिंहभूम के टोकलो में फुटबॉल मैच और खूंटी के कर्रा में क्रिकेट के दौरान भी बिजली गिरने से मौतें।
CROPC और मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक वज्रपात की घटनाएँ; पिछले दशक में 1,669 मौतें ।
मौसम विभाग ने अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया; आपदा प्रबंधन विभाग ने सुरक्षित स्थान पर रहने की अपील की।

झारखंड में मानसून की दस्तक के साथ ही आकाशीय बिजली ने भारी तबाही मचाई है। 12 जून 2025 से 29 जून 2025 तक महज 15 दिनों में वज्रपात की विभिन्न घटनाओं में 30 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। राज्य के एक दर्जन से अधिक जिले इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में हैं।

ताज़ा घटनाक्रम: रविवार को कई जिलों में मौतें

रविवार को रांची जिले के सोनाहातू में वॉच टावर का निरीक्षण कर रहे वनरक्षक रोशन श्रीवास्तव की वज्रपात से मौत हो गई, जबकि दो अन्य वनकर्मी गंभीर रूप से झुलस गए। लोहरदगा में एक तीन वर्षीय बच्ची, रांची के बेड़ो में एक किसान, सिल्ली में एक नाबालिग तथा गढ़वा जिले के रंका में आम चुनने गए दो बच्चों की भी बिजली गिरने से मौत की पुष्टि हुई है।

15 दिनों का तबाही का सिलसिला

24 से 26 जून के बीच चतरा, पलामू, जामताड़ा, कोडरमा, देवघर और लोहरदगा सहित कई जिलों में 12 लोगों की मौत हुई और करीब 18 लोग घायल हुए। लोहरदगा में दो अलग-अलग घटनाओं में दो महिलाओं की जान चली गई, जबकि आठ लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

21 से 23 जून के बीच पश्चिमी सिंहभूम के टोकलो में फुटबॉल मैच के दौरान मैदान पर बिजली गिरने से दो खिलाड़ियों की मौत हो गई। खूंटी जिले के कर्रा में क्रिकेट खेल रहे युवकों पर वज्रपात होने से एक खिलाड़ी की मौत हुई और 11 अन्य घायल हो गए।

17 से 19 जून के बीच हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, लोहरदगा, गोड्डा और पश्चिमी सिंहभूम में आठ लोगों की मौत दर्ज की गई। मानसून के प्रवेश के पहले 24 घंटों के भीतर ही रांची, गढ़वा, चतरा, गिरिडीह, जामताड़ा और सरायकेला-खरसावां में आठ लोगों की जान चली गई थी।

झारखंड क्यों है वज्रपात का 'हॉटस्पॉट'

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की भौगोलिक संरचना इसे वज्रपात के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। पठारी भूभाग, घने जंगल, ऊँचे वृक्ष, खनिज संपदा और मानसून के दौरान गर्म एवं ठंडी हवाओं के टकराव से वातावरण में तेज़ी से विद्युत ऊर्जा विकसित होती है। रांची, गुमला, पलामू, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम को राज्य के प्रमुख 'लाइटनिंग हॉटस्पॉट' माना जाता है।

क्लाइमेट रेजिलिएंट ऑब्ज़र्विंग सिस्टम्स प्रमोशन काउंसिल (CROPС) और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आँकड़ों के अनुसार, झारखंड में पिछले पाँच वर्षों में हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक बार आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएँ दर्ज की गई हैं। पिछले एक दशक में वज्रपात से राज्य में कम से कम 1,669 लोगों की मौत हो चुकी है।

सबसे अधिक प्रभावित कौन

विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक मृत्यु संख्या आधिकारिक आँकड़ों से अधिक हो सकती है, क्योंकि दूरदराज के ग्रामीण इलाकों की कई घटनाएँ आधिकारिक रिकॉर्ड तक नहीं पहुँच पातीं। वज्रपात से होने वाली मौतों में सबसे अधिक संख्या किसानों, खेतिहर मज़दूरों, मवेशी चराने वालों, महिलाओं और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों की होती है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में ग्रामीण आजीविका पहले से ही मौसमी दबाव में है।

अलर्ट और सावधानियाँ

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों से गरज-चमक के दौरान खुले खेतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और जलाशयों से दूर रहने की सलाह दी है। राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अपील की है कि मौसम खराब होने पर लोग तुरंत सुरक्षित स्थान पर शरण लें और किसी भी स्थिति में खुले मैदान में न रुकें। आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता और बढ़ने की आशंका को देखते हुए प्रशासन की सतर्कता और अधिक ज़रूरी हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अलर्ट जारी होते हैं, और फिर सब भुला दिया जाता है। एक दशक में 1,669 मौतें और सालाना 4.36 लाख से अधिक वज्रपात की घटनाएँ बताती हैं कि यह संकट 'प्राकृतिक' से अधिक 'प्रशासनिक विफलता' का मामला है। किसान, मज़दूर और बच्चे — यानी वे लोग जो खुले में काम करने के लिए मजबूर हैं — सबसे अधिक मर रहे हैं, जबकि सामुदायिक शेल्टर और अर्ली-वार्निंग सिस्टम की पहुँच अभी भी सीमित है। जब तक वज्रपात को राज्य की आपदा प्रबंधन नीति में केंद्रीय प्राथमिकता नहीं दी जाती, येलो अलर्ट महज औपचारिकता बने रहेंगे।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में इस मानसून वज्रपात से कितनी मौतें हुई हैं?
12 जून से 29 जून 2025 के बीच यानी महज 15 दिनों में झारखंड में वज्रपात से 30 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 35 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। मौतें रांची, लोहरदगा, गढ़वा, पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी सहित एक दर्जन से अधिक जिलों में दर्ज की गई हैं।
झारखंड में वज्रपात इतना अधिक क्यों होता है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड का पठारी भूभाग, घने जंगल, ऊँचे वृक्ष और खनिज संपदा मिलकर मानसून के दौरान वातावरण में तेज़ी से विद्युत ऊर्जा विकसित करते हैं। रांची, गुमला, पलामू, बोकारो और पूर्वी सिंहभूम को राज्य के प्रमुख 'लाइटनिंग हॉटस्पॉट' माना जाता है।
वज्रपात से सबसे अधिक कौन प्रभावित होते हैं?
वज्रपात से होने वाली मौतों में सबसे अधिक संख्या किसानों, खेतिहर मज़दूरों, मवेशी चराने वालों, महिलाओं और खुले स्थानों पर काम करने वाले लोगों की होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक मृत्यु संख्या आधिकारिक आँकड़ों से अधिक हो सकती है।
मौसम विभाग ने झारखंड के लिए क्या अलर्ट जारी किया है?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने झारखंड के अधिकांश जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। लोगों को गरज-चमक के दौरान खुले खेतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और जलाशयों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
पिछले एक दशक में झारखंड में वज्रपात से कितनी मौतें हुई हैं?
CROPC और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के आँकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में झारखंड में वज्रपात से कम से कम 1,669 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में हर साल औसतन 4.36 लाख से अधिक बार आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएँ दर्ज की जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 16 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले