झारखंड करीब-करीब नक्सल मुक्त: झामुमो नेता मनोज पांडे का बड़ा दावा, MMDR एक्ट पर भी कड़ा रुख
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेता मनोज पांडे ने 2 अक्टूबर 2026 को रांची में कहा कि झारखंड अब करीब-करीब नक्सल मुक्त हो चुका है और यह उपलब्धि राज्य सरकार तथा सुरक्षाबलों की निरंतर प्रतिबद्धता का प्रतिफल है। उन्होंने एक साथ कई अहम मुद्दों — एमएमडीआर एक्ट, एथेनॉल मिश्रण नीति, फॉर्म-6 में बदलाव और महात्मा गांधी जयंती — पर अपनी स्पष्ट राय रखी।
नक्सल मुक्त झारखंड का दावा
मनोज पांडे ने कहा, 'झारखंड करीब-करीब नक्सल मुक्त हो चुका है। इक्के-दुक्के नक्सली ही बचे होंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि कई बड़े नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और कई मुठभेड़ों में मारे गए। उनके अनुसार यह सब राज्य सरकार और सुरक्षाबलों के समन्वित प्रयासों से ही संभव हो पाया है।
गौरतलब है कि झारखंड लंबे समय से नक्सली हिंसा से प्रभावित रहा है और इस क्षेत्र को देश के 'रेड कॉरिडोर' का हिस्सा माना जाता था। पांडे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में सुरक्षा अभियानों में तेज़ी देखी गई है।
एमएमडीआर एक्ट पर कड़ा रुख
खनन से जुड़े एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन) एक्ट पर पांडे ने साफ़ शब्दों में कहा, 'शेष पर रोक लगाना गैर-कानूनी है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह अधिकार हमको दिया था — यह हमारा अधिकार और हक है। इस पर कुठाराघात हम बरदाश्त नहीं करेंगे। हम अपने अधिकार की लड़ाई को न्यायालय तक लड़ेंगे और शेष वसूलने का काम जारी रखेंगे।' यह बयान राज्य सरकार की खनिज राजस्व वसूली के अधिकार को लेकर केंद्र से जारी विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।
एथेनॉल मिश्रण पर चिंता
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की नीति पर पांडे ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'एथेनॉल से गाड़ियाँ खराब हो रही हैं, खुद हमारी गाड़ी खराब हो गई है। गाड़ियों की माइलेज कम हो गई।' उनका तर्क था कि 'गाड़ियों में अभी ऐसी तकनीक नहीं है जिससे एथेनॉल डालकर बेहतर परफॉर्मेंस मिले।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जहाँ एक ओर मिलावट बेचने पर कानूनी कार्रवाई होती है, वहीं दूसरी ओर सरकार खुलेआम एथेनॉल मिला कर पेट्रोल बेच रही है — जिसे उन्होंने विरोधाभासी बताया।
फॉर्म-6 में बदलाव पर असंवैधानिक का आरोप
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए फॉर्म-6 में बदलाव के मुद्दे पर पांडे ने कहा, 'यह बदलाव गैर-कानूनी और असंवैधानिक है। इसमें बदलाव का अधिकार संसद को है और इसे एक व्यक्ति ने कर दिया — यह गलत है।' यह मुद्दा मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं में हुए परिवर्तन से संबंधित है।
गांधी जयंती पर श्रद्धांजलि
महात्मा गांधी की जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर पांडे ने कहा, 'गांधी प्रासंगिक थे, हैं और रहेंगे। 70 वर्ष पहले जिन्हें राष्ट्रपिता की उपाधि दी गई, उन्हें आज पूरा विश्व मान रहा है।' उनके इस वक्तव्य को गांधीवादी मूल्यों की आज की राजनीति में प्रासंगिकता की स्वीकृति के रूप में देखा जा सकता है।
पांडे के ये तमाम बयान ऐसे समय में आए हैं जब झारखंड में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज़ है तथा खनन नीति, ईंधन मिश्रण और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दे राज्य की राजनीति को नई दिशा दे रहे हैं।