24 अगस्त 2026
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झामुमो का पलटवार: देवेंद्र नाथ महतो की भर्ती सुधार यात्रा पर बोले मनोज पांडे, एमएमडीआर एक्ट को बताया 'काला कानून'

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झामुमो का पलटवार: देवेंद्र नाथ महतो की भर्ती सुधार यात्रा पर बोले मनोज पांडे, एमएमडीआर एक्ट को बताया 'काला कानून'

सारांश

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने देवेंद्र नाथ महतो की यात्रा को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए सरकारी दखल से इनकार किया — लेकिन असली तीखापन एमएमडीआर संशोधन पर था। पांडे ने इसे 'काला कानून' कहा और चेताया कि इससे झारखंड की आदिवासी कल्याण योजनाएँ खतरे में पड़ गई हैं।

मुख्य बातें

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने 23 अगस्त 2026 को देवेंद्र नाथ महतो की भर्ती सुधार यात्रा पर कहा — सरकार बल-प्रयोग से नहीं रोकेगी, लोकतांत्रिक तरीके अपनाएँ।
पांडे ने दावा किया कि छात्र आंदोलन अब 'पूरी तरह खत्म' हो चुका है और प्रदर्शनकारियों में अधिकांश छात्र नहीं थे।
एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 को झामुमो ने 'काला कानून' करार दिया; राज्यव्यापी विरोध की घोषणा।
झामुमो के अनुसार इस कानून से राज्य का खनिज सेस अधिकार छिना, जिससे 'मैया सम्मान योजना' और 'अबुआ आवास योजना' संकट में।
पार्टी ने कहा — यह विरोध प्रतीकात्मक नहीं, हर स्तर पर संगठित अभियान होगा।

झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने 23 अगस्त 2026 को रांची में देवेंद्र नाथ महतो की भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार उन्हें बल-प्रयोग से नहीं रोकेगी, लेकिन उन्हें लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखनी चाहिए। साथ ही, पांडे ने एमएमडीआर (खान और खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को 'काला कानून' करार देते हुए इसका पुरज़ोर विरोध किया।

भर्ती सुधार यात्रा पर झामुमो का रुख

झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने देवेंद्र नाथ महतो की यात्रा पर कहा, 'उन्हें करने दो। उन्हें कौन रोक रहा है? यह लोकतंत्र है। उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए। सरकार उन्हें फोर्स या ऐसी किसी चीज़ से नहीं रोकेगी। उन्हें प्रदर्शन और लोकतांत्रिक तरीकों से अपने मुद्दे उठाने चाहिए।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भर्ती प्रक्रिया को लेकर सामाजिक आंदोलनों की लहर देखी जा रही है।

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और आंदोलन की स्थिति

छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के सवाल पर मनोज पांडे ने कहा, 'जो लोग गलत हरकतें करेंगे, उन्हें कानून का सामना करना पड़ेगा। सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है। लोगों को छात्र कहकर गुमराह करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उनमें कुछ ही छात्र हैं — वे गुमराह स्टूडेंट्स हैं।' उन्होंने आंदोलन की व्यापकता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस जल्दबाज़ी में पुतला जलाया गया, उसका छात्रों के एक बड़े गुट ने विरोध किया था। गौरतलब है कि पांडे के अनुसार कई जगहों पर आयोजकों को पर्याप्त छात्र भी नहीं मिले।

पांडे ने दावा किया, 'अब कहीं कोई आंदोलन नहीं है। पूरा मामला अब पूरी तरह से खत्म हो गया है।' हालाँकि, विपक्षी दलों की ओर से इस दावे पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

एमएमडीआर संशोधन अधिनियम पर तीखा हमला

एमएमडीआर संशोधन अधिनियम, 2026 पर झामुमो प्रवक्ता ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, 'यह एक काला कानून है। केंद्र का एक काला कानून राज्यों पर थोपा गया है। इसका विरोध होगा और यह हर स्तर पर होगा। यह तो शुरुआत है — पूरे झारखंड में पोस्टर और नारे दिखेंगे।'

पांडे ने आरोप लगाया कि इस कानून के ज़रिए राज्य सरकार का खनिज खरीद पर सेस लगाने का अधिकार छीन लिया गया है, जिससे 'मैया सम्मान योजना' और 'अबुआ आवास योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाएँ बंद होने की कगार पर आ गई हैं। उनके अनुसार, 'केंद्र सरकार वो पैसा नहीं देती थी — राज्य सरकार अपनी खरीद पर सेस लगाती थी। यह राज्य का अधिकार था, जिसे बंद कर दिया गया।'

आम जनता और आदिवासी समुदाय पर असर

झामुमो प्रवक्ता ने कहा कि यह संदेश झारखंड के गरीब, पिछड़े, आदिवासी और मूलनिवासी समुदायों तक पहुँच चुका है कि केंद्र सरकार के इस फैसले से उनकी कल्याण योजनाएँ प्रभावित हो रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में आदिवासी अधिकारों को लेकर पहले से ही राजनीतिक संवेदनशीलता बनी हुई है। आलोचकों का कहना है कि एमएमडीआर संशोधन राज्यों की राजकोषीय स्वायत्तता को सीधे प्रभावित करता है।

आगे क्या होगा

झामुमो ने संकेत दिया है कि एमएमडीआर अधिनियम के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान आने वाले दिनों में और तेज़ होगा। पार्टी के अनुसार यह विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि संगठित और बहु-स्तरीय होगा। देवेंद्र नाथ महतो की भर्ती सुधार यात्रा की आगे की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह चुनावी ध्रुवीकरण की रणनीति है — इसका जवाब स्वतंत्र वित्तीय विश्लेषण के बिना नहीं मिलेगा। देवेंद्र नाथ महतो की यात्रा को 'लोकतांत्रिक' बताकर उदारता दिखाना और साथ ही छात्र आंदोलन को 'गुमराह' कहना — यह दोहरा स्वर झामुमो की असुरक्षा को उजागर करता है। आदिवासी और मूलनिवासी समुदायों को सीधे संबोधित करना बताता है कि पार्टी इस मुद्दे को राजनीतिक पूँजी में बदलने की कोशिश में है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

देवेंद्र नाथ महतो की भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा क्या है?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड में भर्ती प्रक्रिया में सुधार की माँग को लेकर यात्रा निकाल रहे हैं। झामुमो ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए कहा है कि सरकार इसे बल-प्रयोग से नहीं रोकेगी, लेकिन प्रदर्शन लोकतांत्रिक दायरे में होने चाहिए।
एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 क्या है और झामुमो इसका विरोध क्यों कर रही है?
एमएमडीआर (खान और खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 केंद्र सरकार द्वारा पारित एक कानून है। झामुमो का आरोप है कि इससे राज्य का खनिज खरीद पर सेस लगाने का अधिकार छिन गया है, जिसके कारण 'मैया सम्मान योजना' और 'अबुआ आवास योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं का वित्तपोषण खतरे में पड़ गया है।
झामुमो प्रवक्ता ने छात्र आंदोलन पर क्या कहा?
झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने दावा किया कि छात्र आंदोलन अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों में अधिकांश वास्तविक छात्र नहीं थे और जल्दबाज़ी में पुतला जलाने का विरोध खुद छात्रों के एक बड़े गुट ने किया था।
'मैया सम्मान योजना' और 'अबुआ आवास योजना' पर एमएमडीआर का क्या असर पड़ेगा?
झामुमो के अनुसार, झारखंड सरकार खनिज खरीद पर सेस लगाकर इन योजनाओं को वित्तपोषित करती थी। एमएमडीआर संशोधन से यह सेस अधिकार समाप्त होने के कारण इन योजनाओं का भविष्य अनिश्चित हो गया है। हालाँकि, केंद्र सरकार की ओर से इस दावे पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
झामुमो एमएमडीआर के खिलाफ आगे क्या कदम उठाएगी?
झामुमो ने राज्यव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है — पोस्टर, नारे और हर स्तर पर संगठित विरोध। पार्टी ने इसे केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक आंदोलन बताया है जो आदिवासी, पिछड़े और मूलनिवासी समुदायों तक सीधे पहुँचेगा।
राष्ट्र प्रेस
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