जम्मू-कश्मीर: NDPS मामले में ८ साल से फरार अमजद अली नाइक क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच (ईओडब्ल्यू) जम्मू ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को एक लंबे समय से फरार आरोपी को गिरफ्तार किया, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज पुराने मादक पदार्थ मामले में न्यायिक कार्यवाही से बचता रहा था। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शोपियां जिले के रत्नीपोरा निवासी अमजद अली नाइक (पिता: अब्दुल कदीर नाइक) के रूप में हुई है।
मामले का पृष्ठभूमि
अमजद अली नाइक के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 और 20 के तहत एफआईआर संख्या 44/2004 दर्ज है। यह मामला वर्ष 2004 का है और तब से आरोपी न्यायालय की कार्यवाही से बचता रहा। क्राइम ब्रांच के अनुसार, इस मामले में चार्जशीट पहले ही द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जम्मू की अदालत में दाखिल की जा चुकी थी — केवल आरोपी की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई लंबित पड़ी थी।
गिरफ्तारी और न्यायिक कार्रवाई
क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू जम्मू की टीम ने जाँच के दौरान आरोपी का ठिकाना तलाश किया और उसे हिरासत में लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद अमजद अली नाइक को द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जम्मू की अदालत में पेश किया गया, जहाँ आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू की गई। यह गिरफ्तारी उस मामले में निर्णायक मोड़ है जो लगभग दो दशकों तक अधर में लटका रहा।
एसएसपी की चेतावनी
एसएसपी क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू जम्मू, फैसल कुरैशी ने इस गिरफ्तारी के बाद स्पष्ट संदेश दिया है कि जो भी व्यक्ति कानूनी प्रक्रिया से बच रहे हैं, वे शीघ्र आत्मसमर्पण करें और न्यायिक कार्यवाही में सहयोग करें। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे फरार आरोपियों का पता लगाना और उन्हें सक्षम अदालतों के समक्ष प्रस्तुत करना क्राइम ब्रांच की प्राथमिकता बनी हुई है।
क्राइम ब्रांच ईओडब्ल्यू की भूमिका
ईओडब्ल्यू (इकोनॉमिक ऑफेंसेज़ विंग) जम्मू-कश्मीर अपराध शाखा की विशेष इकाई है, जो उच्च प्रोफ़ाइल आर्थिक एवं गंभीर अपराधों की जाँच में विशेषज्ञता रखती है। यह इकाई तकनीकी सहायता से लैस समर्पित जाँचकर्ताओं की टीमों के साथ काम करती है, जो सामान्य कानून-व्यवस्था पुलिस के कार्यक्षेत्र से बाहर के जटिल मामलों को संभालती है।
आगे क्या
अब जब अमजद अली नाइक न्यायिक हिरासत में है, अदालत में मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। यह मामला जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों की रोकथाम के व्यापक प्रयासों की दिशा में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ दशकों पुराने लंबित मामलों को भी बंद करने की कोशिश जारी है।