जेपीएससी मेधा घोटाला: CID की 97 पन्नों की चार्जशीट पर कोर्ट का संज्ञान, पूर्व अध्यक्ष ख्यांग्ते सहित 12 पर मुकदमा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के बहुचर्चित मेधा घोटाले में सीआईडी द्वारा दाखिल 97 पन्नों की चार्जशीट पर रांची की सीआईडी विशेष अदालत के न्यायाधीश योगेश कुमार ने 27 अक्टूबर 2026 को संज्ञान लिया। राज्य सरकार से आवश्यक विभागीय अभियोजन स्वीकृति (सैंक्शन ऑर्डर) मिलने के बाद जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता सहित सभी 12 नामजद आरोपियों पर मुकदमा चलाया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को निर्धारित की गई है।
मुख्य आरोपी और हिरासत की स्थिति
चार्जशीट में नामजद 12 आरोपियों में परीक्षा संचालन करने वाली निजी एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर व मुख्य मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी, एजेंसी कर्मी मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद शामिल हैं। इनके अलावा हेमंत कुमार वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह, संजय कुमार, सुमन सौरभ और अरविंद कुमार भी आरोपी हैं।
इन सभी आरोपियों को पिछले जुलाई और अगस्त माह में गिरफ्तार किया गया था। तब से ये होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में बंद हैं और उनकी जमानत याचिकाएँ भी खारिज हो चुकी हैं। मंगलवार को सुनवाई के दौरान सभी 12 आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए विशेष अदालत के सामने पेश किया गया।
चार्जशीट में चौंकाने वाले खुलासे
जाँच एजेंसी ने डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट्स और कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर दावा किया है कि जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए ₹5 लाख और अंतिम चयन की गारंटी के लिए ₹10 लाख से ₹25 लाख तक की रकम वसूली जाती थी। जाँच के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते इस पैसों के खेल में '10 रुपये के नोट के सीरियल नंबर' को कोड के रूप में इस्तेमाल करते थे।
चार्जशीट के मुताबिक, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को बिना टेंडर के काम देने के बदले ₹2 करोड़ नकद और कुल बिलिंग का 10 प्रतिशत कमीशन तय किया गया था। जाँच के दौरान ख्यांग्ते के मिजोरम (आइजोल) स्थित निजी आवास पर ₹2.5 लाख नकद पहुँचाने से जुड़े हवाई यात्रा विवरण और मोबाइल लोकेशन के साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।
डेटा लीक और परिणाम से पहले खुलासा
जाँच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आधिकारिक रूप से प्रकाशित होने से पहले ही पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने एजेंसी कर्मी मोहम्मद उस्मान के व्हाट्सएप पर गोपनीय डेटा लीक कर दिया था। व्हाट्सएप चैट के तकनीकी विश्लेषण से यह खुलासा हुआ कि परिणाम से पहले ही 267 चयनित अभ्यर्थियों का संवेदनशील डेटा साझा किया जा चुका था।
इन 267 अभ्यर्थियों में 146 बिहार के, 82 उत्तर प्रदेश के और 14 हरियाणा के निवासी थे। इसके अलावा मुख्य परीक्षा के प्रश्न, उत्तर और श्रेणीवार कट-ऑफ से जुड़ी जानकारियाँ भी पहले ही लीक कर दी गई थीं। ख्यांग्ते के आवासीय कार्यालय और लैपटॉप बैग की तलाशी में 15 सफल अभ्यर्थियों की एक गोपनीय सूची और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर मुख्य परीक्षा के 8 मूल एडमिट कार्ड बरामद हुए, जिनमें से 10 अभ्यर्थियों का चयन पहले ही कराया जा चुका था।
गुप्त होटल मुख्यालय और साक्ष्य नष्ट करने की कोशिश
चार्जशीट के अनुसार मुख्य मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी ने रांची के स्टेशन रोड स्थित एक पूरे होटल को 11 महीने की लीज पर ले रखा था, जिसका उपयोग अयोग्य अभ्यर्थियों को ठहराने और ओएमआर शीट भरने की 'सेटिंग' के लिए गुप्त मुख्यालय के रूप में किया जाता था। स्ट्रॉन्ग रूम से बिना सील की हुई मूल ओएमआर शीट और उसकी वीडियोग्राफी बरामद होने से सुरक्षा व्यवस्था में जानबूझकर की गई चूक की पुष्टि होती है।
गिरफ्तारी से ठीक पहले पूर्व अध्यक्ष ख्यांग्ते द्वारा अपना मोबाइल फॉर्मेट करने और लैपटॉप तोड़ने जैसे डिजिटल साक्ष्य नष्ट करने के प्रयासों का भी चार्जशीट में स्पष्ट उल्लेख किया गया है। यह घोटाला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पहले से ही सवालों के घेरे में है।
आगे क्या होगा
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर 2026 की तिथि तय की है। राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति मिलते ही सभी 12 आरोपियों पर औपचारिक मुकदमे की कार्यवाही शुरू हो जाएगी। यह मामला आगे झारखंड में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और नियामक व्यवस्था पर व्यापक बहस को नई दिशा दे सकता है।