जेपीएससी घोटाला: सीआईडी ने 5 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, ₹70 लाख तक की वसूली का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) परीक्षा घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने 22 अक्टूबर 2026 को रांची की अदालत में पाँच मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहली औपचारिक चार्जशीट दाखिल कर दी है। ओएमआर शीट की हेराफेरी, गोपनीय आंसर-की की लीक और अयोग्य अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए की वसूली वाले इस 'मेधा सिंडिकेट' के खिलाफ यह कानूनी शिकंजे की पहली ठोस कड़ी है।
चार्जशीट में नामजद पाँच आरोपी
सीआईडी ने 90 दिनों की वैधानिक समयसीमा समाप्त होने से ठीक पहले यह चार्जशीट दाखिल की, जिससे गिरफ्तार अभियुक्तों के लिए 'डिफॉल्ट बेल' पाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है। पहली चार्जशीट में जिन पाँच आरोपियों को नामजद किया गया है, उनमें तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल एजेंसी के निदेशक एवं इस घोटाले के मास्टरमाइंड रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह, मार्केटिंग मैनेजर व किंगपिन अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी, तथा एजेंसी कर्मी मो. उस्मान और मो. एबाद शामिल हैं।
मेधा सिंडिकेट का 'रेट कार्ड'
सीआईडी द्वारा अदालत को सौंपी गई केस डायरी और जाँच रिपोर्ट से एक सुनियोजित 'मेधा सिंडिकेट' का पर्दाफाश हुआ है, जो अयोग्य अभ्यर्थियों को चयन की गारंटी देने के लिए एक निर्धारित 'रेट कार्ड' के अनुसार काम करता था। जाँच में सामने आया है कि प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए ₹5 लाख, मुख्य परीक्षा व साक्षात्कार में अंक बढ़ाने के लिए ₹10 से ₹15 लाख, और अंतिम चयन सुनिश्चित करने के लिए ₹60 से ₹70 लाख तक की रकम वसूली जाती थी।
आरोपियों द्वारा अभ्यर्थियों से सुरक्षा के तौर पर उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज, कोरे चेक और सादे कागजात भी ऐंठ लिए जाते थे, ताकि वे बाद में मुकर न सकें।
फॉरेंसिक सबूत और डिजिटल छेड़छाड़
फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री की रिपोर्ट और जब्त डिजिटल उपकरणों की जाँच ने पुष्टि की है कि ओएमआर शीटें जानबूझकर खाली छोड़ी जाती थीं और बाद में स्कैनिंग व बैकएंड सर्वर में सीधे हेरफेर कर उन्हें भर दिया जाता था। गौरतलब है कि गोपनीय आंसर-की को आधिकारिक जारी होने से पहले ही व्हाट्सएप के ज़रिए लीक किया गया। इसके बदले में तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक और उनके परिजनों के लिए दिल्ली और बेंगलुरु की हवाई टिकटें बुक कराई गई थीं।
कानूनी धाराएँ और अगली सुनवाई
सीआईडी ने आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ-साथ झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 की कड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अदालत ने इस मामले में पहली आधिकारिक सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर 2026 की तिथि निर्धारित की है।
आगे क्या होगा
सीआईडी के अनुसार, इस मामले में बचे हुए अन्य आरोपियों और लाभ उठाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ जल्द ही दूसरी पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट दाखिल की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सार्वजनिक सेवा भर्ती की विश्वसनीयता को लेकर बड़े सवाल उठे हुए हैं, और जाँच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।