यूएन रिपोर्ट में दाऊद को 'भारत आधारित' बताने पर भारत का तीखा विरोध, संयुक्त राष्ट्र की साख पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 22 अक्टूबर 2026 को यूएन के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की उस रिपोर्ट पर कड़ा एतराज जताया, जिसमें वांछित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को 'भारत आधारित' डी कंपनी गिरोह का सरगना बताया गया था। भारत ने स्पष्ट किया कि यह वर्णन तथ्यात्मक रूप से भ्रामक है और इस प्रकार की गलत जानकारी संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचाती है।
मुख्य घटनाक्रम
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को आतंकवाद और मानवाधिकार मामलों के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की जुलाई 2026 में जारी रिपोर्ट की सार्वजनिक आलोचना की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में 'गंभीर और साफ दिखाई देने वाली गलतियाँ' हैं तथा इसे तैयार करने में 'अयोग्यता' प्रदर्शित की गई है।
पुरी ने रिकॉर्ड पर स्पष्ट किया, "दाऊद इब्राहिम 2003 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने से काफी पहले भारत से भाग चुका था। भारत से बाहर रहते हुए ही उसे अल कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया था। दाऊद आज भी भारत में वांछित अपराधी है और संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार वह उसी देश में रह रहा है, जहाँ ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ पाया गया था।"
रिपोर्ट में क्या था और भारत की आपत्ति क्या है
बेन सॉल की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी संबंधों वाले 'भारत आधारित' डी कंपनी आपराधिक गिरोह का सरगना बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि उसे अल कायदा से संबंध रखने के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में डाला गया।
पुरी ने कहा कि सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत जारी आधिकारिक विवरण में यह स्पष्ट दर्ज है कि दाऊद भारत के बाहर रहता है और भारत उसे 1993 के आतंकी हमलों के सिलसिले में लंबे समय से तलाश रहा है। उन्होंने कहा, "अगर इस लाइन को अकेले पढ़ा जाए तो यह वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।"
बेन सॉल की फंडिंग पर सवाल
गौरतलब है कि निगरानी संगठन 'यूएन वॉच' के एक डेटाबेस के अनुसार, बेन सॉल को चीन से 1,50,000 डॉलर की फंडिंग मिली है। यूएन वॉच के मुताबिक, सिडनी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर और ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल फ्यूचर फेलो रहे सॉल को कुल 1.7 मिलियन डॉलर का वित्तीय सहयोग मिला है। इस फंडिंग में उनके विश्वविद्यालय के अलावा अमेरिका के तीन विश्वविद्यालयों तथा स्विट्जरलैंड और स्पेन की संस्थाओं का भी योगदान बताया गया है। उल्लेखनीय है कि विशेष रिपोर्टर सीधे संयुक्त राष्ट्र से वेतन नहीं लेते और उनसे स्वतंत्र रूप से काम करने की अपेक्षा की जाती है।
पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर पर भारत का रुख
कश्मीर का मुद्दा उठाने वाले पाकिस्तान को भी रघु पुरी ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति जानता है कि मेरे देश के खिलाफ कही गई बातें, जिनमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख का जिक्र भी शामिल है, बेहद संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए किया गया प्रचार है।" उन्होंने कहा कि ये आरोप पाकिस्तान के 'वास्तविक शासकों', यानी उसकी सेना की ओर से लगाए गए हैं।
पुरी ने दोहराया, "जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, हमेशा रहे हैं और हमेशा रहेंगे।"
आगे की राह
भारत के आग्रह पर दाऊद इब्राहिम के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी है, जिसके तहत दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसकी तलाश और गिरफ्तारी के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। पुरी ने उम्मीद जताई कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष पदाधिकारी "ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों का पालन करेंगे।" यह टकराव संयुक्त राष्ट्र मंचों पर भारत की भू राजनीतिक मुखरता का एक और उदाहरण बन गया है।