22 अक्टूबर 2026
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यूएन रिपोर्ट में दाऊद को 'भारत आधारित' बताने पर भारत का तीखा विरोध, संयुक्त राष्ट्र की साख पर उठाए सवाल

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यूएन रिपोर्ट में दाऊद को 'भारत आधारित' बताने पर भारत का तीखा विरोध, संयुक्त राष्ट्र की साख पर उठाए सवाल

सारांश

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया जिसमें दाऊद इब्राहिम को 'भारत आधारित' बताया गया — जबकि वह दशकों से भारत का वांछित भगोड़ा है। यह कूटनीतिक टकराव संयुक्त राष्ट्र के विशेष तंत्र की निष्पक्षता और फंडिंग पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े करता है।

मुख्य बातें

भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने 22 अक्टूबर 2026 को यूएन में विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की जुलाई 2026 की रिपोर्ट को 'गंभीर गलतियों' से भरा और 'अयोग्य' करार दिया।
रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को 'भारत आधारित' डी कंपनी का सरगना बताया गया था, जबकि वह 1993 से भारत का वांछित भगोड़ा है।
पुरी ने स्पष्ट किया कि दाऊद 2003 में यूएन प्रतिबंध सूची में शामिल होने से पहले ही भारत छोड़ चुका था और उसे उसी देश में बताया जाता है जहाँ ओसामा बिन लादेन पाया गया था।
निगरानी संगठन यूएन वॉच के अनुसार, बेन सॉल को चीन से 1,50,000 डॉलर सहित कुल 1.7 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है।
भारत ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख पर पाकिस्तान के आरोपों को 'संकीर्ण राजनीतिक हितों' का प्रचार बताते हुए खारिज किया।
इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस दाऊद इब्राहिम के खिलाफ भारत के आग्रह पर जारी है।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने 22 अक्टूबर 2026 को यूएन के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की उस रिपोर्ट पर कड़ा एतराज जताया, जिसमें वांछित अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी दाऊद इब्राहिम को 'भारत आधारित' डी कंपनी गिरोह का सरगना बताया गया था। भारत ने स्पष्ट किया कि यह वर्णन तथ्यात्मक रूप से भ्रामक है और इस प्रकार की गलत जानकारी संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुँचाती है।

मुख्य घटनाक्रम

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने बुधवार को आतंकवाद और मानवाधिकार मामलों के विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की जुलाई 2026 में जारी रिपोर्ट की सार्वजनिक आलोचना की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में 'गंभीर और साफ दिखाई देने वाली गलतियाँ' हैं तथा इसे तैयार करने में 'अयोग्यता' प्रदर्शित की गई है।

पुरी ने रिकॉर्ड पर स्पष्ट किया, "दाऊद इब्राहिम 2003 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किए जाने से काफी पहले भारत से भाग चुका था। भारत से बाहर रहते हुए ही उसे अल कायदा और ओसामा बिन लादेन से संबंधों के कारण प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया था। दाऊद आज भी भारत में वांछित अपराधी है और संयुक्त राष्ट्र की सूची के अनुसार वह उसी देश में रह रहा है, जहाँ ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ पाया गया था।"

रिपोर्ट में क्या था और भारत की आपत्ति क्या है

बेन सॉल की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी संबंधों वाले 'भारत आधारित' डी कंपनी आपराधिक गिरोह का सरगना बताया गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि उसे अल कायदा से संबंध रखने के कारण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में डाला गया।

पुरी ने कहा कि सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत जारी आधिकारिक विवरण में यह स्पष्ट दर्ज है कि दाऊद भारत के बाहर रहता है और भारत उसे 1993 के आतंकी हमलों के सिलसिले में लंबे समय से तलाश रहा है। उन्होंने कहा, "अगर इस लाइन को अकेले पढ़ा जाए तो यह वास्तविक स्थिति से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है।"

बेन सॉल की फंडिंग पर सवाल

गौरतलब है कि निगरानी संगठन 'यूएन वॉच' के एक डेटाबेस के अनुसार, बेन सॉल को चीन से 1,50,000 डॉलर की फंडिंग मिली है। यूएन वॉच के मुताबिक, सिडनी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर और ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल फ्यूचर फेलो रहे सॉल को कुल 1.7 मिलियन डॉलर का वित्तीय सहयोग मिला है। इस फंडिंग में उनके विश्वविद्यालय के अलावा अमेरिका के तीन विश्वविद्यालयों तथा स्विट्जरलैंड और स्पेन की संस्थाओं का भी योगदान बताया गया है। उल्लेखनीय है कि विशेष रिपोर्टर सीधे संयुक्त राष्ट्र से वेतन नहीं लेते और उनसे स्वतंत्र रूप से काम करने की अपेक्षा की जाती है।

पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर पर भारत का रुख

कश्मीर का मुद्दा उठाने वाले पाकिस्तान को भी रघु पुरी ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, "इस कमरे में मौजूद हर व्यक्ति जानता है कि मेरे देश के खिलाफ कही गई बातें, जिनमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख का जिक्र भी शामिल है, बेहद संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए किया गया प्रचार है।" उन्होंने कहा कि ये आरोप पाकिस्तान के 'वास्तविक शासकों', यानी उसकी सेना की ओर से लगाए गए हैं।

पुरी ने दोहराया, "जम्मू कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं, हमेशा रहे हैं और हमेशा रहेंगे।"

आगे की राह

भारत के आग्रह पर दाऊद इब्राहिम के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी है, जिसके तहत दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को उसकी तलाश और गिरफ्तारी के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। पुरी ने उम्मीद जताई कि संयुक्त राष्ट्र के विशेष पदाधिकारी "ईमानदारी, निष्पक्षता और पारदर्शिता के सर्वोच्च मानकों का पालन करेंगे।" यह टकराव संयुक्त राष्ट्र मंचों पर भारत की भू राजनीतिक मुखरता का एक और उदाहरण बन गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ बाहरी फंडिंग और स्वतंत्रता के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। बेन सॉल को चीन से मिली कथित फंडिंग — खासकर तब जब रिपोर्ट भारत को गलत तरीके से चित्रित करती है — इस तंत्र की विश्वसनीयता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। भारत की प्रतिक्रिया इस बार मात्र खंडन तक सीमित नहीं रही; उसने यूएन के जवाबदेही ढाँचे की माँग को सीधे वैश्विक मंच पर रखा। मुख्यधारा की कवरेज इस फंडिंग कोण को नज़रअंदाज़ कर रही है, जो असली कहानी है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएन रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को लेकर क्या कहा गया था?
यूएन विशेष रिपोर्टर बेन सॉल की जुलाई 2026 की रिपोर्ट में दाऊद इब्राहिम को 'भारत आधारित' डी कंपनी आपराधिक गिरोह का सरगना बताया गया था। इसमें यह भी उल्लेख था कि उसे अल कायदा से संबंध रखने के कारण यूएन सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में रखा गया है।
भारत ने यूएन रिपोर्ट पर क्यों आपत्ति जताई?
भारत ने कहा कि दाऊद इब्राहिम 1993 से भारत का वांछित भगोड़ा है और वह 2003 में यूएन प्रतिबंध सूची में शामिल होने से पहले ही भारत छोड़ चुका था। रिपोर्ट में उसे 'भारत आधारित' बताना तथ्यात्मक रूप से भ्रामक है और यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के आधिकारिक विवरण से भी मेल नहीं खाता।
बेन सॉल कौन हैं और उनकी फंडिंग को लेकर क्या विवाद है?
बेन सॉल सिडनी विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर और यूएन के आतंकवाद व मानवाधिकार मामलों के विशेष रिपोर्टर हैं। निगरानी संगठन 'यूएन वॉच' के अनुसार, उन्हें चीन से 1,50,000 डॉलर सहित कुल 1.7 मिलियन डॉलर की फंडिंग मिली है, जिसमें अमेरिका, स्विट्जरलैंड और स्पेन की संस्थाएँ भी शामिल हैं।
दाऊद इब्राहिम के खिलाफ भारत ने क्या कदम उठाए हैं?
भारत के आग्रह पर इंटरपोल ने दाऊद इब्राहिम के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है, जिससे दुनिया भर की कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ उसकी तलाश और गिरफ्तारी के लिए सतर्क हैं। वह 1993 के भारत में हुए आतंकी हमलों के मामलों में वांछित है।
इस विवाद में पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर का क्या संदर्भ है?
यूएन सत्र में पाकिस्तान द्वारा जम्मू कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत के प्रथम सचिव रघु पुरी ने करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ये आरोप पाकिस्तान की सेना की ओर से संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए किया गया प्रचार है और जम्मू कश्मीर व लद्दाख भारत का अभिन्न अंग हैं।
राष्ट्र प्रेस
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