17 अगस्त 2026
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जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा विवाद: बाबूलाल मरांडी का आरोप — नियामतपुर होटल प्रकरण की सीआईडी जांच अधूरी

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जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा विवाद: बाबूलाल मरांडी का आरोप — नियामतपुर होटल प्रकरण की सीआईडी जांच अधूरी

सारांश

झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेएसएससी-सीजीएल जांच पर बड़ा सवाल उठाया है — पश्चिम बंगाल के नियामतपुर होटल में 120 अभ्यर्थियों के ठहरने के साक्ष्य मिलने के बावजूद सीआईडी ने आगे जांच क्यों नहीं की? 2,000 से अधिक नियुक्तियों की निष्पक्षता दाँव पर है।

मुख्य बातें

बाबूलाल मरांडी ने 17 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल जांच में गंभीर खामियों का आरोप लगाया।
करीब 120 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित एक होटल में ठहराए जाने के साक्ष्य कथित तौर पर सीआईडी को मिले थे।
मरांडी के अनुसार, होटल सत्यापन के बाद भी पश्चिम बंगाल में विस्तृत जांच नहीं की गई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
जेएसएससी-सीजीएल 2024 परीक्षा के माध्यम से 2,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियाँ हो चुकी हैं।
उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने लंबित बिंदुओं पर जांच के लिए सीआईडी को अतिरिक्त समय दिया था।
मरांडी ने सभी पहलुओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच की माँग की है।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोमवार, 17 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर राज्य सरकार और अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट नियामतपुर में एक होटल में करीब 120 अभ्यर्थियों के ठहरने से जुड़े अहम सुराग की प्रभावी जांच नहीं की गई, जबकि सीआईडी ने स्वयं उस होटल का सत्यापन किया था।

मुख्य आरोप: नियामतपुर होटल प्रकरण

मरांडी के अनुसार, जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि 2024 में आयोजित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से पहले करीब 120 परीक्षार्थियों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल के पास नियामतपुर स्थित एक होटल में एक साथ ठहराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों को वहाँ परीक्षा में संभावित रूप से पूछे जाने वाले प्रश्नों की पूर्व-तैयारी कराई गई थी। मरांडी ने कहा कि सीआईडी ने उस होटल का सत्यापन किया और वहाँ जेएसएससी-सीजीएल परीक्षार्थियों के ठहरने के साक्ष्य भी मिले थे।

जांच में कथित लापरवाही

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि होटल में साक्ष्य मिलने के बावजूद पश्चिम बंगाल जाकर संबंधित अभ्यर्थियों और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह महत्वपूर्ण तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष पूरी तरह नहीं रखा गया और पूरा मामला बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने लंबित बिंदुओं पर जांच के लिए सीआईडी को अतिरिक्त समय भी दिया था।

परीक्षा का दायरा और प्रभावित अभ्यर्थी

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा वर्ष 2024 में आयोजित हुई थी, जिसके माध्यम से 2,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। सीआईडी की जांच मुख्य रूप से उन अभ्यर्थियों पर केंद्रित रही, जिन्हें परीक्षा से पहले कथित तौर पर नेपाल भेजकर उत्तर रटवाए जाने की बात सामने आई थी। मरांडी का दावा है कि पश्चिम बंगाल से जुड़े कई अभ्यर्थी बाद में इस परीक्षा के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए।

ईमानदार अभ्यर्थियों पर असर

मरांडी ने कहा कि यदि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी, तो यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को हुआ है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच से संबंधित कई दस्तावेज अभ्यर्थियों के पास मौजूद हैं।

आगे क्या होगा

मरांडी ने माँग की है कि जेएसएससी-सीजीएल मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थी पहले से ही आंदोलनरत हैं और मामला न्यायालयों में विचाराधीन है। सरकार और सीआईडी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

साक्ष्य मिले, फिर भी पश्चिम बंगाल में आगे की जांच न होना और उच्च न्यायालय को पूरी तस्वीर न दिखाना — ये आरोप अगर सही हैं तो यह जांच की विफलता नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई चूक होगी। 2,000 से अधिक सरकारी नियुक्तियाँ दाँव पर हैं और ईमानदार अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है। मुख्यधारा की कवरेज नेपाल कनेक्शन पर केंद्रित रही, लेकिन नियामतपुर का पहलू उतना ही गंभीर है — और अब तक उतना ही अनसुना।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा विवाद क्या है?
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा वर्ष 2024 में झारखंड में आयोजित हुई थी, जिसके माध्यम से 2,000 से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र और उत्तर पहले से उपलब्ध कराए जाने समेत कई अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं और निष्पक्ष जांच की माँग की है।
बाबूलाल मरांडी ने सीआईडी पर क्या आरोप लगाए हैं?
मरांडी ने आरोप लगाया है कि सीआईडी ने पश्चिम बंगाल के नियामतपुर स्थित होटल में करीब 120 अभ्यर्थियों के ठहरने के साक्ष्य मिलने के बावजूद आगे प्रभावी जांच नहीं की। उनका कहना है कि यह अहम तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष भी पूरी तरह नहीं रखा गया।
नियामतपुर होटल प्रकरण क्या है?
मरांडी के अनुसार, जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से पहले करीब 120 परीक्षार्थियों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट नियामतपुर स्थित एक होटल में एक साथ ठहराया गया था। आरोप है कि वहाँ उन्हें परीक्षा में संभावित प्रश्नों की पूर्व-तैयारी कराई गई। सीआईडी ने होटल का सत्यापन किया और साक्ष्य भी मिले, लेकिन आगे जांच नहीं हुई।
इस मामले में न्यायालय की क्या भूमिका रही है?
उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने लंबित बिंदुओं पर जांच के लिए सीआईडी को अतिरिक्त समय दिया था। मरांडी का आरोप है कि इस अतिरिक्त समय का उपयोग पश्चिम बंगाल में विस्तृत जांच के लिए नहीं किया गया।
इस विवाद से किन अभ्यर्थियों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है?
मरांडी के अनुसार, सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को हुआ है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी। यदि कुछ अभ्यर्थियों को पहले से प्रश्नों की जानकारी मिली थी, तो पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता संदिग्ध हो जाती है और मेधावी अभ्यर्थियों के चयन पर सवाल उठता है।
राष्ट्र प्रेस
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