जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा विवाद: बाबूलाल मरांडी का आरोप — नियामतपुर होटल प्रकरण की सीआईडी जांच अधूरी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोमवार, 17 अगस्त को जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर राज्य सरकार और अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निकट नियामतपुर में एक होटल में करीब 120 अभ्यर्थियों के ठहरने से जुड़े अहम सुराग की प्रभावी जांच नहीं की गई, जबकि सीआईडी ने स्वयं उस होटल का सत्यापन किया था।
मुख्य आरोप: नियामतपुर होटल प्रकरण
मरांडी के अनुसार, जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया था कि 2024 में आयोजित जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा से पहले करीब 120 परीक्षार्थियों को पश्चिम बंगाल के आसनसोल के पास नियामतपुर स्थित एक होटल में एक साथ ठहराया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि इन अभ्यर्थियों को वहाँ परीक्षा में संभावित रूप से पूछे जाने वाले प्रश्नों की पूर्व-तैयारी कराई गई थी। मरांडी ने कहा कि सीआईडी ने उस होटल का सत्यापन किया और वहाँ जेएसएससी-सीजीएल परीक्षार्थियों के ठहरने के साक्ष्य भी मिले थे।
जांच में कथित लापरवाही
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि होटल में साक्ष्य मिलने के बावजूद पश्चिम बंगाल जाकर संबंधित अभ्यर्थियों और पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह महत्वपूर्ण तथ्य उच्च न्यायालय के समक्ष पूरी तरह नहीं रखा गया और पूरा मामला बाद में ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने लंबित बिंदुओं पर जांच के लिए सीआईडी को अतिरिक्त समय भी दिया था।
परीक्षा का दायरा और प्रभावित अभ्यर्थी
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा वर्ष 2024 में आयोजित हुई थी, जिसके माध्यम से 2,000 से अधिक पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। सीआईडी की जांच मुख्य रूप से उन अभ्यर्थियों पर केंद्रित रही, जिन्हें परीक्षा से पहले कथित तौर पर नेपाल भेजकर उत्तर रटवाए जाने की बात सामने आई थी। मरांडी का दावा है कि पश्चिम बंगाल से जुड़े कई अभ्यर्थी बाद में इस परीक्षा के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए।
ईमानदार अभ्यर्थियों पर असर
मरांडी ने कहा कि यदि परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को प्रश्नों की जानकारी उपलब्ध कराई गई थी, तो यह पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में सबसे बड़ा नुकसान उन युवाओं को हुआ है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच से संबंधित कई दस्तावेज अभ्यर्थियों के पास मौजूद हैं।
आगे क्या होगा
मरांडी ने माँग की है कि जेएसएससी-सीजीएल मामले के सभी पहलुओं की निष्पक्ष और व्यापक जांच होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में परीक्षा पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थी पहले से ही आंदोलनरत हैं और मामला न्यायालयों में विचाराधीन है। सरकार और सीआईडी की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।