कल्लाडी टनल हादसा: वायनाड में मिट्टी हटाने के लिए केरल सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति
सारांश
मुख्य बातें
केरल के वायनाड जिले में कल्लाडी टनल परियोजना के निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी को सुरक्षित रूप से हटाने की प्रक्रिया तय करने के लिए केरल सरकार ने 11 जुलाई 2026 को एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। गौरतलब है कि इसी निर्माण स्थल पर भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कई लोगों की जान जा चुकी है।
समिति का गठन और सदस्य
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, गृह मंत्री और लोक निर्माण मंत्री की एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति में तीन विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं — डॉ. संतोष जी. थम्पी (प्रोफेसर, एनआईटी कालीकट), डॉ. जूड इमैनुएल (पर्यावरण वैज्ञानिक, डीओईसीसी-संयोजक) और एनसीईएसएस के एक प्रतिनिधि। यह पैनल निर्माण स्थल का निरीक्षण कर मिट्टी हटाने के सुरक्षित उपाय सुझाएगा और सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा।
हादसे की पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री सतीशन ने मंगलवार को स्पष्ट किया था कि निर्माण स्थल के निकट जमा खुदाई की मिट्टी और मलबे का खिसकना इस हादसे का प्रमुख कारण बना। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार कंपनी ने प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। वायनाड के जिला कलेक्टर और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 20 जून को ही ठेकेदार को साइट से खोदी गई मिट्टी हटाने के निर्देश दिए थे — बावजूद इसके मिट्टी वहीं पड़ी रही।
सरकार की प्रतिक्रिया और व्यापक चिंता
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के मुख्यालय का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने मॉनसून सीजन को देखते हुए केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को जोखिम वाली जगहों की पहचान कर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञ समिति स्थल का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर मिट्टी हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब केरल में मॉनसून सक्रिय है और भूस्खलन का खतरा राज्य के पहाड़ी जिलों में बना हुआ है। विशेषज्ञों की सिफारिशें भविष्य में ऐसी परियोजनाओं के लिए एक मिसाल बन सकती हैं।