11 जुलाई 2026
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कल्लाडी टनल हादसा: वायनाड में मिट्टी हटाने के लिए केरल सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति

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कल्लाडी टनल हादसा: वायनाड में मिट्टी हटाने के लिए केरल सरकार ने गठित की तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति

सारांश

वायनाड के कल्लाडी टनल निर्माण स्थल पर भूस्खलन से हुई मौतों के बाद केरल सरकार ने तीन विशेषज्ञों की समिति बनाई है। ठेकेदार पर 20 जून के निर्देश अनदेखी का आरोप है। मॉनसून में राज्यभर के हाईवे प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा समीक्षा भी शुरू।

मुख्य बातें

केरल सरकार ने 11 जुलाई 2026 को वायनाड कल्लाडी टनल साइट से मिट्टी सुरक्षित हटाने के लिए तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की।
थम्पी (एनआईटी कालीकट), डॉ.
जूड इमैनुएल (डीओईसीसी) और एनसीईएसएस के प्रतिनिधि शामिल हैं।
जिला कलेक्टर ने 20 जून को ही ठेकेदार को मिट्टी हटाने के निर्देश दिए थे, जिनका पालन नहीं हुआ।
सतीशन ने ठेकेदार कंपनी पर निर्देशों की अनदेखी का आरोप लगाया।
मॉनसून को देखते हुए राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को जोखिम वाले निर्माण स्थलों की पहचान और निरीक्षण के निर्देश दिए गए।

केरल के वायनाड जिले में कल्लाडी टनल परियोजना के निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी को सुरक्षित रूप से हटाने की प्रक्रिया तय करने के लिए केरल सरकार ने 11 जुलाई 2026 को एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने यह जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। गौरतलब है कि इसी निर्माण स्थल पर भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में कई लोगों की जान जा चुकी है।

समिति का गठन और सदस्य

मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन, गृह मंत्री और लोक निर्माण मंत्री की एक उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। समिति में तीन विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं — डॉ. संतोष जी. थम्पी (प्रोफेसर, एनआईटी कालीकट), डॉ. जूड इमैनुएल (पर्यावरण वैज्ञानिक, डीओईसीसी-संयोजक) और एनसीईएसएस के एक प्रतिनिधि। यह पैनल निर्माण स्थल का निरीक्षण कर मिट्टी हटाने के सुरक्षित उपाय सुझाएगा और सरकार को रिपोर्ट सौंपेगा।

हादसे की पृष्ठभूमि

मुख्यमंत्री सतीशन ने मंगलवार को स्पष्ट किया था कि निर्माण स्थल के निकट जमा खुदाई की मिट्टी और मलबे का खिसकना इस हादसे का प्रमुख कारण बना। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार कंपनी ने प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। वायनाड के जिला कलेक्टर और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 20 जून को ही ठेकेदार को साइट से खोदी गई मिट्टी हटाने के निर्देश दिए थे — बावजूद इसके मिट्टी वहीं पड़ी रही।

सरकार की प्रतिक्रिया और व्यापक चिंता

केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) के मुख्यालय का दौरा करने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री सतीशन ने मॉनसून सीजन को देखते हुए केरल में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को जोखिम वाली जगहों की पहचान कर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञ समिति स्थल का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर मिट्टी हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब केरल में मॉनसून सक्रिय है और भूस्खलन का खतरा राज्य के पहाड़ी जिलों में बना हुआ है। विशेषज्ञों की सिफारिशें भविष्य में ऐसी परियोजनाओं के लिए एक मिसाल बन सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि निर्माण परियोजनाओं में जवाबदेही की व्यापक विफलता का प्रतीक है — जिला प्रशासन ने 20 जून को ही चेतावनी दी थी, फिर भी मिट्टी नहीं हटाई गई। विशेषज्ञ समिति का गठन स्वागतयोग्य है, लेकिन असली सवाल यह है कि ठेकेदार के विरुद्ध क्या कार्रवाई होगी। केरल में मॉनसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की निगरानी का ढाँचा स्पष्ट रूप से कमज़ोर है, और जब तक दंडात्मक तंत्र नहीं बनता, ऐसी समितियाँ महज़ कागज़ी कवायद बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्लाडी टनल हादसा क्या है?
वायनाड जिले में कल्लाडी टनल के निर्माण स्थल पर भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसमें कई लोगों की जान गई। निर्माण स्थल के पास जमा खुदाई की मिट्टी और मलबा खिसकना इस हादसे का प्रमुख कारण बताया गया है।
केरल सरकार ने विशेषज्ञ समिति क्यों बनाई?
निर्माण स्थल पर जमा मिट्टी को सुरक्षित रूप से हटाने की प्रक्रिया तय करने और इस पर रिपोर्ट सौंपने के लिए यह समिति बनाई गई है। मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और लोक निर्माण मंत्री की उच्च स्तरीय बैठक में यह फैसला लिया गया।
इस समिति में कौन-कौन शामिल हैं?
समिति में डॉ. संतोष जी. थम्पी (प्रोफेसर, एनआईटी कालीकट), डॉ. जूड इमैनुएल (पर्यावरण वैज्ञानिक, डीओईसीसी-संयोजक) और एनसीईएसएस के एक प्रतिनिधि शामिल हैं। यह पैनल साइट का निरीक्षण कर सुरक्षित मिट्टी हटाने के उपाय सुझाएगा।
ठेकेदार पर क्या आरोप हैं?
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने आरोप लगाया कि ठेकेदार कंपनी ने 20 जून को जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए मिट्टी हटाने के निर्देशों का पालन नहीं किया। इस लापरवाही को हादसे का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
मॉनसून में अन्य निर्माण स्थलों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
केरल सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को राज्य में राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण परियोजनाओं के जोखिम वाले स्थलों की पहचान कर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। मॉनसून सीजन में सुरक्षा मानकों को लेकर मुख्यमंत्री ने गंभीर चिंता जताई है।
राष्ट्र प्रेस
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