कल्याण-अभिषेक पर हमले 'स्क्रिप्टेड': अभिजीत सरकार के भाई बिस्वजीत का टीएमसी पर सीधा हमला
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेताओं — राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी — पर हुए हमलों को लेकर एक नई आवाज़ उठी है। 2021 के चुनाव-पश्चात हिंसा में मारे गए भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के भाई बिस्वजीत सरकार ने इन हमलों को 'पूरी तरह स्क्रिप्टेड' करार दिया है और टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी नेता इन हमलों के लिए भाजपा पर दोषारोपण कर रहे हैं।
बिस्वजीत सरकार का सीधा आरोप
बिस्वजीत सरकार ने कहा कि कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले 'पूरी तरह से स्क्रिप्टेड' हैं। उनके अनुसार, 'एक-दो दिन में ये लोग कोर्ट जाएंगे और सुरक्षा की माँग करेंगे। यह सब खुद ही कर रहे हैं और लोगों को दिखा रहे हैं — वे सिर्फ अतिरिक्त सुरक्षा लेना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जब 2021 में टीएमसी नेताओं, विधायकों, पार्षदों और पुलिस ने मिलकर उनके भाई की हत्या की थी, तब ये लोग कहाँ थे?
अभिजीत सरकार हत्याकांड: पृष्ठभूमि
2 मई 2021 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई हिंसा में कोलकाता के कांकुड़गाछी इलाके में भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या कर दी गई थी। बिस्वजीत सरकार के अनुसार, चुनाव-पश्चात हिंसा में सबसे पहले शहीद होने वाले उनके भाई ही थे। इस मामले की शुरुआती जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने जाँच अपने हाथ में ली। अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुआवज़े और न्याय की अनसुनी पुकार
बिस्वजीत सरकार ने बताया कि वे वर्षों से न्याय के लिए अदालत के दरवाज़े खटखटाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ओर से मुआवज़ा देने की बात कही गई थी, परंतु वह भी अब तक नहीं दिया गया।
2021 और 2026 सरकार की तुलना
बिस्वजीत सरकार ने 2021 और 2026 में सरकार बनने के बाद की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि सबसे बड़ा अंतर यह है कि अभिजीत सरकार के हत्यारे अब जेल में हैं। उन्होंने कहा, 'मुझसे ज़्यादा अत्याचार किस पर हुआ? उन लोगों ने मेरे भाई की हत्या कर दी। अब भाजपा सरकार आई है, तो हम बदला ले सकते थे — लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यही टीएमसी और भाजपा सरकार के बीच का अंतर है।'
एफआईआर की संख्या से दिखता है फ़र्क
बिस्वजीत सरकार ने यह भी कहा कि 2021 में चुनाव-पश्चात हिंसा में कितने लोगों के खिलाफ़ और किन लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई, यह सर्वविदित है। उन्होंने कहा कि आज जो घटनाएँ हो रही हैं, उनकी एफआईआर से तुलना करने पर दोनों सरकारों के बीच का फ़र्क स्पष्ट हो जाएगा। यह विवाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और जवाबदेही की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।