17 जुलाई 2026
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कल्याण-अभिषेक पर हमले 'स्क्रिप्टेड': अभिजीत सरकार के भाई बिस्वजीत का टीएमसी पर सीधा हमला

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कल्याण-अभिषेक पर हमले 'स्क्रिप्टेड': अभिजीत सरकार के भाई बिस्वजीत का टीएमसी पर सीधा हमला

सारांश

2021 की चुनाव-पश्चात हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के भाई बिस्वजीत ने टीएमसी सांसदों पर हुए हमलों को 'स्क्रिप्टेड' बताया — और सवाल उठाया कि जब उनके भाई की हत्या हुई थी, तब ये नेता कहाँ थे? NHRC मुआवज़ा आज भी नहीं मिला।

मुख्य बातें

बिस्वजीत सरकार ने कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमलों को 'पूरी तरह स्क्रिप्टेड' करार दिया।
उनके भाई अभिजीत सरकार की हत्या 2 मई 2021 को कोलकाता के कांकुड़गाछी में चुनाव-पश्चात हिंसा में हुई थी।
कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर CBI ने मामले की जाँच अपने हाथ में ली; कई आरोपी गिरफ्तार।
NHRC द्वारा मुआवज़े का वादा किए जाने के बावजूद परिवार को अब तक राशि नहीं मिली।
बिस्वजीत सरकार ने 2021 और 2026 की सरकारों की एफआईआर संख्या से तुलना कर दोनों के बीच का फ़र्क रेखांकित किया।

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेताओं — राष्ट्रीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी — पर हुए हमलों को लेकर एक नई आवाज़ उठी है। 2021 के चुनाव-पश्चात हिंसा में मारे गए भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता अभिजीत सरकार के भाई बिस्वजीत सरकार ने इन हमलों को 'पूरी तरह स्क्रिप्टेड' करार दिया है और टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी नेता इन हमलों के लिए भाजपा पर दोषारोपण कर रहे हैं।

बिस्वजीत सरकार का सीधा आरोप

बिस्वजीत सरकार ने कहा कि कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले 'पूरी तरह से स्क्रिप्टेड' हैं। उनके अनुसार, 'एक-दो दिन में ये लोग कोर्ट जाएंगे और सुरक्षा की माँग करेंगे। यह सब खुद ही कर रहे हैं और लोगों को दिखा रहे हैं — वे सिर्फ अतिरिक्त सुरक्षा लेना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि जब 2021 में टीएमसी नेताओं, विधायकों, पार्षदों और पुलिस ने मिलकर उनके भाई की हत्या की थी, तब ये लोग कहाँ थे?

अभिजीत सरकार हत्याकांड: पृष्ठभूमि

2 मई 2021 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद हुई हिंसा में कोलकाता के कांकुड़गाछी इलाके में भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार की हत्या कर दी गई थी। बिस्वजीत सरकार के अनुसार, चुनाव-पश्चात हिंसा में सबसे पहले शहीद होने वाले उनके भाई ही थे। इस मामले की शुरुआती जाँच पश्चिम बंगाल पुलिस ने की थी, लेकिन बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने जाँच अपने हाथ में ली। अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

मुआवज़े और न्याय की अनसुनी पुकार

बिस्वजीत सरकार ने बताया कि वे वर्षों से न्याय के लिए अदालत के दरवाज़े खटखटाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की ओर से मुआवज़ा देने की बात कही गई थी, परंतु वह भी अब तक नहीं दिया गया।

2021 और 2026 सरकार की तुलना

बिस्वजीत सरकार ने 2021 और 2026 में सरकार बनने के बाद की स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि सबसे बड़ा अंतर यह है कि अभिजीत सरकार के हत्यारे अब जेल में हैं। उन्होंने कहा, 'मुझसे ज़्यादा अत्याचार किस पर हुआ? उन लोगों ने मेरे भाई की हत्या कर दी। अब भाजपा सरकार आई है, तो हम बदला ले सकते थे — लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यही टीएमसी और भाजपा सरकार के बीच का अंतर है।'

एफआईआर की संख्या से दिखता है फ़र्क

बिस्वजीत सरकार ने यह भी कहा कि 2021 में चुनाव-पश्चात हिंसा में कितने लोगों के खिलाफ़ और किन लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई, यह सर्वविदित है। उन्होंने कहा कि आज जो घटनाएँ हो रही हैं, उनकी एफआईआर से तुलना करने पर दोनों सरकारों के बीच का फ़र्क स्पष्ट हो जाएगा। यह विवाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा और जवाबदेही की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल स्वाभाविक है कि 2021 की व्यापक हिंसा पर उनकी चुप्पी क्यों रही। NHRC के मुआवज़े का वादा अधूरा रहना संस्थागत जवाबदेही की विफलता को उजागर करता है। दोनों दौर की एफआईआर की तुलना एक ऐसा वस्तुनिष्ठ पैमाना है जिसे पत्रकार और अदालतें दोनों जाँच सकती हैं — और यही इस पूरे विवाद की असली कसौटी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिस्वजीत सरकार ने कल्याण और अभिषेक बनर्जी पर हमलों को 'स्क्रिप्टेड' क्यों कहा?
बिस्वजीत सरकार का आरोप है कि ये हमले पूर्वनियोजित हैं और इनका उद्देश्य टीएमसी नेताओं को अतिरिक्त सुरक्षा दिलाना है। उनके अनुसार, हमलों के एक-दो दिन बाद ये नेता कोर्ट जाकर सुरक्षा की माँग करेंगे।
अभिजीत सरकार कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
अभिजीत सरकार भाजपा कार्यकर्ता थे जिनकी हत्या 2 मई 2021 को कोलकाता के कांकुड़गाछी इलाके में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद हुई हिंसा में कर दी गई थी। उनके भाई बिस्वजीत के अनुसार, वे चुनाव-पश्चात हिंसा में सबसे पहले शहीद होने वाले व्यक्ति थे।
अभिजीत सरकार हत्याकांड की जाँच कहाँ तक पहुँची है?
शुरुआत में पश्चिम बंगाल पुलिस ने जाँच की, लेकिन बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर CBI ने जाँच अपने हाथ में ली। अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
NHRC ने परिवार को मुआवज़ा क्यों नहीं दिया?
बिस्वजीत सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मुआवज़ा देने का वादा किया था, लेकिन वर्षों बाद भी वह राशि परिवार को नहीं मिली है। इस मुद्दे पर परिवार लगातार अदालत का दरवाज़ा खटखटाता रहा है।
2021 और 2026 की सरकारों के बीच बिस्वजीत सरकार क्या फ़र्क देखते हैं?
बिस्वजीत सरकार का कहना है कि 2026 में भाजपा सरकार बनने के बाद अभिजीत के हत्यारे जेल में हैं, जबकि 2021 में टीएमसी शासन के दौरान न्याय नहीं मिला। उन्होंने दोनों कालखंडों की एफआईआर की संख्या और स्वरूप की तुलना को जवाबदेही का सबसे स्पष्ट पैमाना बताया।
राष्ट्र प्रेस
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