कर्जत पंप स्टोरेज परियोजना: BJP ने CM फडणवीस से माँगा वृक्ष प्रत्यारोपण तकनीक का इस्तेमाल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के कर्जत में प्रस्तावित टॉरेंट पंप स्टोरेज परियोजना को लेकर जारी विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 1 नवंबर 2026 को अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी क्षेत्र के जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। पार्टी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दोनों उपमुख्यमंत्रियों से आग्रह किया है कि परियोजना क्षेत्र में पेड़ों को काटने की बजाय आधुनिक वृक्ष प्रत्यारोपण (ट्री ट्रांसप्लांटेशन) तकनीकों का उपयोग किया जाए।
BJP का सुझाव: विकास और पर्यावरण साथ-साथ
BJP नेताओं ने कहा कि कर्जत में विकास कार्य निरंतर प्रगति पर हैं और 3,000 मेगावाट क्षमता की यह परियोजना राज्य के ऊर्जा भंडारण ढाँचे के लिए अहम है। हालाँकि, उनका यह भी मानना है कि परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर होने वाली पेड़ों की कटाई से स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में उत्पन्न हुई चिंता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि चीन, अमेरिका और जापान जैसे देशों में बड़े पैमाने पर वृक्ष प्रत्यारोपण की सफल तकनीकें अपनाई जा चुकी हैं और महाराष्ट्र सरकार को भी इसी दिशा में कदम उठाने चाहिए। BJP नेताओं के अनुसार, विशेषज्ञों की सहायता से यह अध्ययन किया जाना चाहिए कि परियोजना क्षेत्र में अधिकतम संख्या में पेड़ों को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया जा सके।
मुख्यमंत्री फडणवीस का बचाव
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परियोजना का दृढ़ता से बचाव करते हुए इसे महाराष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनिवार्य बताया है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य को स्वच्छ ऊर्जा भंडारण की सुविधा देगी और कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता को कम करेगी।
फडणवीस ने यह भी तर्क दिया कि हालाँकि सौर और पवन ऊर्जा स्वच्छ हैं, किंतु वे 24/7 संचालित नहीं हो सकतीं। उनके अनुसार, पंप स्टोरेज हाइड्रो तकनीक नवीकरणीय स्रोतों को संतुलित कर चौबीसों घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का एक प्रदूषण-रहित समाधान है।
विवाद की जड़: पेड़ों की कटाई और पर्यावरणीय चिंताएँ
यह परियोजना मुख्यतः इसलिए चर्चा में आई क्योंकि इसके लिए कर्जत क्षेत्र में व्यापक स्तर पर वृक्ष कटाई अपेक्षित है। पर्यावरणविदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र सहित पूरे देश में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और वन संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज़ हो रही है।
विपक्ष ने भी परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं, जिसके जवाब में मुख्यमंत्री ने परियोजना को पर्यावरण के अनुकूल और बिजली ग्रिड की स्थिरता के लिए ज़रूरी करार दिया था।
विकास और पर्यावरण: BJP का संतुलन-सूत्र
BJP का कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए। पार्टी ने सरकार से अपील की है कि परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले वृक्ष प्रत्यारोपण की व्यवहार्यता पर विशेषज्ञ अध्ययन कराया जाए।
यह माँग सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से आई है, जो बताती है कि परियोजना के पर्यावरणीय पहलू पर सहयोगियों के बीच भी सर्वसम्मति नहीं है। आने वाले हफ्तों में राज्य सरकार का जवाब इस परियोजना की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगा।