13 अगस्त 2026
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मेकेदाटु परियोजना में तेजी लाएं: कर्नाटक के नए जल मंत्री चेलुवरायस्वामी का अधिकारियों को कड़ा निर्देश

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मेकेदाटु परियोजना में तेजी लाएं: कर्नाटक के नए जल मंत्री चेलुवरायस्वामी का अधिकारियों को कड़ा निर्देश

सारांश

नए जल मंत्री चेलुवरायस्वामी ने पदभार संभालते ही मेकेदाटु परियोजना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी — DPR, वन मंजूरी और केंद्र से समन्वय पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश। बेंगलुरु के बढ़ते जल संकट के बीच यह कदम राज्य सरकार की मंशा को स्पष्ट करता है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के नए जल संसाधन मंत्री एन.
चेलुवरायस्वामी ने 13 अगस्त 2026 को पदभार संभालते ही मेकेदाटु पेयजल परियोजना में तेजी लाने के निर्देश दिए।
बैठक में DPR , पर्यावरण एवं वन मंजूरी , भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास सहित सभी लंबित पहलुओं की समीक्षा की गई।
मंत्री ने कहा — परियोजना बेंगलुरु सहित राज्य के शहरी क्षेत्रों की दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
अपर मुख्य सचिव गौरव गुप्ता सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित रहे।
विभाग को समयबद्ध कार्ययोजना और व्यापक प्रस्ताव शीघ्र सौंपने के निर्देश दिए गए।

कर्नाटक के नवनियुक्त जल संसाधन मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने 13 अगस्त 2026 को पदभार संभालते ही विभागीय अधिकारियों को मेकेदाटु पेयजल परियोजना के क्रियान्वयन में तत्काल गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है, बल्कि बेंगलुरु सहित राज्य के प्रमुख शहरी क्षेत्रों की दीर्घकालिक पेयजल सुरक्षा की आधारशिला है।

मुख्य घटनाक्रम

पदभार ग्रहण करने के तत्काल बाद चेलुवरायस्वामी ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में परियोजना की मौजूदा स्थिति, सामने आ रही चुनौतियों और आगे की कार्ययोजना पर गहन चर्चा हुई। अपर मुख्य सचिव गौरव गुप्ता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस बैठक में उपस्थित रहे।

मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के किसी भी चरण में विलंब स्वीकार्य नहीं होगा और सभी आवश्यक कदम समयबद्ध तरीके से उठाए जाएं।

परियोजना की प्राथमिकताएं

बैठक में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), केंद्र सरकार एवं अन्य प्राधिकरणों से अपेक्षित मंजूरियों, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास तथा तकनीकी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री ने कहा, 'किसी भी परिस्थिति में कर्नाटक की जनता के पेयजल अधिकारों और राज्य के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। परियोजना के हर चरण में कानूनी और तकनीकी मानकों का पालन होना चाहिए तथा जरूरी मंजूरियां हासिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जानी चाहिए।'

उन्होंने अधिकारियों को एक व्यापक प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें अब तक उठाए गए कदम, लंबित मंजूरियां और अगले चरण के उपाय स्पष्ट रूप से दर्ज हों।

बेंगलुरु की जल सुरक्षा पर ज़ोर

चेलुवरायस्वामी ने रेखांकित किया कि बेंगलुरु और आसपास के शहरी क्षेत्रों की तेजी से बढ़ती आबादी को देखते हुए भविष्य की पेयजल मांग को पूरा करना एक गंभीर चुनौती है। उनके अनुसार मेकेदाटु जैसी परियोजनाओं को केवल वर्तमान जरूरतों के नजरिए से नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु पहले ही गंभीर जल संकट का सामना कर चुका है और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।

समन्वय और केंद्र से संवाद

मंत्री ने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार के संबंधित विभागों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने के निर्देश दिए ताकि कर्नाटक का पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने कहा, 'पानी लोगों की बुनियादी जरूरत है। जब बात पेयजल की हो तो जनकल्याण राजनीतिक मतभेदों से अधिक महत्वपूर्ण है। सरकार राज्य के कानूनी अधिकारों की रक्षा करने और मेकेदाटु परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।'

आगे की राह

जल संसाधन विभाग को सभी तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की समीक्षा कर शीघ्र कार्ययोजना रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि मेकेदाटु परियोजना लंबे समय से कानूनी और अंतर-राज्यीय विवादों के कारण अटकी हुई है, और नए मंत्री का यह कदम परियोजना को नई गति देने के सरकारी इरादे का संकेत माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा केंद्रीय मंजूरियों और तमिलनाडु के साथ कावेरी जल विवाद की जटिलताओं से पार पाने में होगी। गौरतलब है कि DPR और पर्यावरण मंजूरी जैसे अहम पड़ाव अभी भी लंबित हैं। बेंगलुरु का जल संकट वास्तविक और गहराता हुआ है, लेकिन बिना स्पष्ट समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, यह बैठक भी पिछली कई बैठकों की तरह महज़ इरादे की घोषणा बनकर रह सकती है।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेकेदाटु परियोजना क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
मेकेदाटु परियोजना कर्नाटक की एक प्रस्तावित पेयजल एवं जलाशय योजना है, जो कावेरी नदी पर बेंगलुरु के निकट बनाई जानी है। यह बेंगलुरु और आसपास के शहरी क्षेत्रों की दीर्घकालिक पेयजल मांग को पूरा करने के लिए अनिवार्य मानी जाती है।
नए जल मंत्री चेलुवरायस्वामी ने 13 अगस्त को क्या निर्देश दिए?
मंत्री एन. चेलुवरायस्वामी ने पदभार संभालते ही अधिकारियों को मेकेदाटु परियोजना के क्रियान्वयन में तत्काल तेजी लाने, DPR, पर्यावरण मंजूरी और केंद्र से समन्वय सहित सभी लंबित प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने एक व्यापक कार्ययोजना रिपोर्ट भी शीघ्र सौंपने को कहा।
मेकेदाटु परियोजना में अब तक देरी क्यों हुई है?
परियोजना मुख्य रूप से कावेरी जल विवाद में तमिलनाडु के विरोध, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंजूरियों की लंबित स्थिति और DPR की अधूरी प्रक्रिया के कारण अटकी रही है। अंतर-राज्यीय और कानूनी जटिलताएं भी इसमें बाधक रही हैं।
इस परियोजना से बेंगलुरु को क्या फायदा होगा?
मेकेदाटु परियोजना के पूरा होने पर बेंगलुरु और आसपास के शहरी क्षेत्रों को टिकाऊ पेयजल आपूर्ति मिलेगी। बढ़ती जनसंख्या और गिरते भूजल स्तर के मद्देनजर यह परियोजना आने वाले दशकों की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
बैठक में कौन-से अधिकारी शामिल थे और अगला कदम क्या होगा?
बैठक में अपर मुख्य सचिव गौरव गुप्ता सहित जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अगले चरण में विभाग को सभी लंबित मुद्दों और उनके समाधान की समयबद्ध कार्ययोजना रिपोर्ट शीघ्र सौंपनी है।
राष्ट्र प्रेस
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