काशी के 32 जीआई उत्पाद, ₹25,500 करोड़ का कारोबार: पद्मश्री डॉ. रजनीकांत का मोदी की कार्यशैली को समर्थन
सारांश
मुख्य बातें
वाराणसी में पद्मश्री डॉ. रजनीकांत — जिन्हें 'जीआई मैन' के नाम से जाना जाता है — ने 20 सितंबर 2026 को काशी के भौगोलिक संकेत (जीआई) मॉडल की उल्लेखनीय सफलता को रेखांकित किया और कहा कि इस इकोसिस्टम से 20 से 24 लाख लोग प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। उन्होंने यह बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कही।
काशी का जीआई इकोसिस्टम: आँकड़े जो बोलते हैं
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि वाराणसी और आसपास के जिलों में जीआई-टैग वाले 32 उत्पाद सालाना लगभग ₹25,500 करोड़ का कारोबार करते हैं। उन्होंने कहा, 'अगर हम काशी और उसके आसपास के जिलों को मिलाकर देखें तो जीआई-टैग वाले 32 उत्पाद सालाना लगभग 25,500 करोड़ रुपए का कारोबार करते हैं। इस इकोसिस्टम से लगभग 20 से 24 लाख लोग सीधे और परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं।'
उन्होंने विशेष रूप से यह भी जोड़ा कि लाभान्वित होने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएँ, अल्पसंख्यक, दलित समुदाय के लोग, कारीगर, कुशल कामगार और ओबीसी समुदाय के लोग शामिल हैं — जिससे यह मॉडल सामाजिक सशक्तिकरण का भी वाहक बना है।
2014 से अब तक: दो से 32 जीआई टैग तक का सफर
डॉ. रजनीकांत के अनुसार, 2014 में जब नरेंद्र मोदी काशी से सांसद बने और प्रधानमंत्री पद संभाला, तब बनारस और आसपास के क्षेत्र में केवल दो जीआई टैग थे — बनारसी साड़ी और भदोही कालीन। आज यह संख्या बढ़कर 32 हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि ये 32 जीआई टैग मोटे तौर पर विरासत के तीन अहम पहलुओं — शिल्प, खान-पान और संस्कृति — को दर्शाते हैं। गौरतलब है कि यह वृद्धि न केवल संख्यात्मक है, बल्कि स्थानीय कारीगरों और बुनकरों की आजीविका पर इसका ठोस असर भी देखने को मिला है।
काशी की विरासत और वैश्विक पहचान
काशी की ऐतिहासिक विरासत को याद करते हुए डॉ. रजनीकांत ने कहा, 'हम दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक में बैठे हैं — एक ऐसा शहर जिसे अक्सर इतिहास से भी पुराना कहा जाता है। काशी ने शिल्प, कला, परंपराओं और हुनर की अद्भुत विविधता को संजोकर रखा है।' उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की वजह से बनारसी उत्पादों को वैश्विक पहचान मिली है और स्थानीय व्यापार को नई उड़ान मिली है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक राष्ट्रव्यापी 'सेवा संकल्प अभियान' चला रही है — इस अभियान का उद्देश्य पीएम मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाना है। उल्लेखनीय है कि मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, और 7 अक्टूबर 2026 को वे मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री पद पर 25 वर्ष पूरे कर लेंगे।
काशी मॉडल का विस्तार और आगे की राह
डॉ. रजनीकांत ने बताया कि काशी जीआई मॉडल को अब भारत के अलग-अलग हिस्सों में भी अपनाया जा रहा है। उनके अनुसार, यह इकोसिस्टम न सिर्फ आर्थिक रूप से सफल हुआ है, बल्कि आजीविका और सामाजिक सशक्तिकरण का अहम माध्यम भी बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैगिंग की यह रणनीति अगर देश के अन्य पारंपरिक शिल्प केंद्रों में समान रूप से लागू की जाए, तो इसके व्यापक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।