27 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा थाईलैंड के गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन को, ४० साल की साधना की कहानी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा थाईलैंड के गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन को, ४० साल की साधना की कहानी

सारांश

थाईलैंड के पंथौन थीरखानोन ने 19 साल की उम्र में पिता से मिली गणेश की एक तस्वीर से जो भक्ति-यात्रा शुरू की, वह चार दशकों में चियांग माई के 10,000 प्रतिमाओं वाले संग्रहालय तक पहुँची। पीएम मोदी ने 'मन की बात' में इसे भारत की सांस्कृतिक शक्ति के वैश्विक विस्तार का प्रतीक बताया।

मुख्य बातें

पीएम मोदी ने 27 सितंबर 2026 को ' मन की बात ' में थाईलैंड के गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन की सराहना की।
पंथौन ने 19 वर्ष की आयु में पिता से मिली गणेश की फोटो से प्रेरित होकर चार दशकों से अधिक का समय गणेश परंपराओं के अध्ययन में लगाया।
थाईलैंड में गणेश जी को ' फ्रा फिकानेत ' के नाम से पूजा जाता है।
वर्ष 2002 में उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की स्थापना की गई, जिसमें अब 10,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएँ हैं।
म्यूजियम में हर रविवार सुबह 10 बजे गणेश पूजा होती है और अष्टविनायक की प्रतिमाएँ भी रखी गई हैं।
पंथौन के प्रयासों से थाईलैंड के श्रद्धालुओं में अष्टविनायक यात्रा लोकप्रिय हो चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में थाईलैंड के प्रख्यात गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन की विशेष रूप से प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि पंथौन के अथक प्रयासों से थाईलैंड के श्रद्धालुओं के बीच महाराष्ट्र की अष्टविनायक यात्रा अत्यंत लोकप्रिय हो चुकी है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि भारत की आस्था और सांस्कृतिक परंपराएँ वैश्विक स्तर पर किस गहराई से जड़ें जमा रही हैं।

गणेश उत्सव का संदर्भ और पंथौन की चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हम सबने इस महीने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ गणेश उत्सव मनाया है। देशभर में पूरे भक्तिभाव से गणपति बाप्पा का स्वागत किया गया। यह पावन अवसर पूरे वातावरण को उमंग और उल्लास से भर देता है।' उन्होंने आगे कहा कि विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश ज्ञान, बुद्धि और शुभ कार्यों के आरंभ के प्रतीक हैं, और उनके प्रति श्रद्धा केवल भारत तक सीमित नहीं है।

पंथौन थीरखानोन: चार दशकों की अटूट भक्ति

प्रधानमंत्री मोदी ने पंथौन थीरखानोन की भक्ति-यात्रा का विस्तार से वर्णन किया। थाईलैंड में भगवान श्री गणेश को 'फ्रा फिकानेत' के नाम से पूजा जाता है। जब पंथौन मात्र 19 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें गणेश जी की एक फोटो भेंट की — और यहीं से उनकी असाधारण भक्ति की शुरुआत हुई। मोदी के अनुसार, पंथौन ने चार दशकों से भी अधिक समय गणेश परंपराओं के अध्ययन में बिताया है और भारत, नेपाल सहित एशिया के कई देशों की यात्राएँ की हैं।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र से पंथौन का विशेष लगाव रहा है। अष्टविनायक परंपरा से परिचित होने के बाद वे कई बार महाराष्ट्र आ चुके हैं, और उनके प्रयासों से थाईलैंड के भक्तों में यह तीर्थ-यात्रा एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।

चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की स्थापना

प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2002 में पंथौन थीरखानोन ने उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की स्थापना की। आज इस संग्रहालय में 10,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएँ संग्रहीत हैं। इसमें अष्टविनायक की प्रतिमाएँ भी विशेष रूप से रखी गई हैं, ताकि जो भक्त भारत नहीं आ सकते, वे यहीं दर्शन का लाभ उठा सकें।

यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब भारत की सॉफ्ट पावर को लेकर वैश्विक चर्चा तेज़ हो रही है। म्यूजियम में हर रविवार सुबह लगभग 10 बजे गणेश जी की नियमित पूजा-अर्चना होती है, और गणपति से जुड़े विशेष अवसरों पर अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं।

भारत की सांस्कृतिक शक्ति का वैश्विक प्रसार

प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रसंग को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि पंथौन थीरखानोन की यह यात्रा यह बताती है कि भारत की आस्था, कला और सांस्कृतिक परंपराएँ किस प्रकार दूसरे देशों में भी अपनी जड़ें मज़बूत कर रही हैं। उन्होंने देशवासियों के लिए गणपति बप्पा के आशीर्वाद की कामना करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

आने वाले समय में पंथौन जैसे सांस्कृतिक दूतों की भूमिका भारत की वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति में और महत्वपूर्ण होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की 'सांस्कृतिक कूटनीति' की एक सुविचारित प्रस्तुति है — जो राजनयिक समझौतों के बिना भी असर करती है। थाईलैंड भारत का ASEAN में महत्वपूर्ण भागीदार है, और धार्मिक-सांस्कृतिक सेतु इस रिश्ते को जनस्तर पर मज़बूत करते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस प्रसंग को 'भक्ति कहानी' तक सीमित रख देती है, जबकि यह भारत की सॉफ्ट पावर रणनीति का एक ठोस उदाहरण है। चियांग माई के गणेश संग्रहालय जैसे केंद्र बिना किसी सरकारी खर्च के भारत का सांस्कृतिक राजदूत बन रहे हैं — यह वह आयाम है जिसे नीति-निर्माताओं को रेखांकित करना चाहिए।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंथौन थीरखानोन कौन हैं?
पंथौन थीरखानोन थाईलैंड के प्रसिद्ध गणेश भक्त हैं, जिन्होंने चार दशकों से अधिक समय गणेश परंपराओं के अध्ययन में लगाया है। उन्होंने 2002 में चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की स्थापना की, जिसमें अब 10,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएँ हैं।
पीएम मोदी ने 'मन की बात' में पंथौन थीरखानोन की प्रशंसा क्यों की?
पीएम मोदी ने गणेश उत्सव के संदर्भ में यह बताने के लिए पंथौन का उल्लेख किया कि भारत की आस्था और सांस्कृतिक परंपराएँ विदेशों में भी गहरी जड़ें जमा रही हैं। पंथौन के प्रयासों से थाईलैंड के श्रद्धालुओं में अष्टविनायक यात्रा लोकप्रिय हुई है, जो भारतीय सांस्कृतिक प्रसार का उदाहरण है।
गणेश हिमाल म्यूजियम कहाँ है और इसमें क्या है?
गणेश हिमाल म्यूजियम उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में स्थित है, जिसकी स्थापना 2002 में पंथौन थीरखानोन ने की थी। इसमें 10,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएँ हैं, जिनमें अष्टविनायक की प्रतिमाएँ भी शामिल हैं। हर रविवार सुबह 10 बजे यहाँ गणेश पूजा होती है।
थाईलैंड में भगवान गणेश को किस नाम से जाना जाता है?
थाईलैंड में भगवान श्री गणेश को 'फ्रा फिकानेत' के नाम से पूजा जाता है। पीएम मोदी ने 'मन की बात' में इस नाम का विशेष उल्लेख किया।
पंथौन थीरखानोन की गणेश भक्ति की शुरुआत कैसे हुई?
जब पंथौन थीरखानोन 19 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें भगवान श्री गणेश की एक फोटो भेंट की, और यहीं से उनकी भक्ति-यात्रा की अद्भुत शुरुआत हुई। इसके बाद उन्होंने भारत, नेपाल सहित एशिया के कई देशों की यात्राएँ कीं और गणेश परंपराओं का गहन अध्ययन किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले