पीएम मोदी ने 'मन की बात' में सराहा थाईलैंड के गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन को, ४० साल की साधना की कहानी
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में थाईलैंड के प्रख्यात गणेश भक्त पंथौन थीरखानोन की विशेष रूप से प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने बताया कि पंथौन के अथक प्रयासों से थाईलैंड के श्रद्धालुओं के बीच महाराष्ट्र की अष्टविनायक यात्रा अत्यंत लोकप्रिय हो चुकी है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि भारत की आस्था और सांस्कृतिक परंपराएँ वैश्विक स्तर पर किस गहराई से जड़ें जमा रही हैं।
गणेश उत्सव का संदर्भ और पंथौन की चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, 'हम सबने इस महीने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ गणेश उत्सव मनाया है। देशभर में पूरे भक्तिभाव से गणपति बाप्पा का स्वागत किया गया। यह पावन अवसर पूरे वातावरण को उमंग और उल्लास से भर देता है।' उन्होंने आगे कहा कि विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश ज्ञान, बुद्धि और शुभ कार्यों के आरंभ के प्रतीक हैं, और उनके प्रति श्रद्धा केवल भारत तक सीमित नहीं है।
पंथौन थीरखानोन: चार दशकों की अटूट भक्ति
प्रधानमंत्री मोदी ने पंथौन थीरखानोन की भक्ति-यात्रा का विस्तार से वर्णन किया। थाईलैंड में भगवान श्री गणेश को 'फ्रा फिकानेत' के नाम से पूजा जाता है। जब पंथौन मात्र 19 वर्ष के थे, तब उनके पिता ने उन्हें गणेश जी की एक फोटो भेंट की — और यहीं से उनकी असाधारण भक्ति की शुरुआत हुई। मोदी के अनुसार, पंथौन ने चार दशकों से भी अधिक समय गणेश परंपराओं के अध्ययन में बिताया है और भारत, नेपाल सहित एशिया के कई देशों की यात्राएँ की हैं।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र से पंथौन का विशेष लगाव रहा है। अष्टविनायक परंपरा से परिचित होने के बाद वे कई बार महाराष्ट्र आ चुके हैं, और उनके प्रयासों से थाईलैंड के भक्तों में यह तीर्थ-यात्रा एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले चुकी है।
चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की स्थापना
प्रधानमंत्री ने बताया कि वर्ष 2002 में पंथौन थीरखानोन ने उत्तरी थाईलैंड के चियांग माई में गणेश हिमाल म्यूजियम की स्थापना की। आज इस संग्रहालय में 10,000 से अधिक गणेश प्रतिमाएँ संग्रहीत हैं। इसमें अष्टविनायक की प्रतिमाएँ भी विशेष रूप से रखी गई हैं, ताकि जो भक्त भारत नहीं आ सकते, वे यहीं दर्शन का लाभ उठा सकें।
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब भारत की सॉफ्ट पावर को लेकर वैश्विक चर्चा तेज़ हो रही है। म्यूजियम में हर रविवार सुबह लगभग 10 बजे गणेश जी की नियमित पूजा-अर्चना होती है, और गणपति से जुड़े विशेष अवसरों पर अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं।
भारत की सांस्कृतिक शक्ति का वैश्विक प्रसार
प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रसंग को व्यापक परिप्रेक्ष्य में रखते हुए कहा कि पंथौन थीरखानोन की यह यात्रा यह बताती है कि भारत की आस्था, कला और सांस्कृतिक परंपराएँ किस प्रकार दूसरे देशों में भी अपनी जड़ें मज़बूत कर रही हैं। उन्होंने देशवासियों के लिए गणपति बप्पा के आशीर्वाद की कामना करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।
आने वाले समय में पंथौन जैसे सांस्कृतिक दूतों की भूमिका भारत की वैश्विक सांस्कृतिक कूटनीति में और महत्वपूर्ण होने की संभावना है।