16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मन की बात में मोदी ने किया चोल ताम्र-पत्रों का जिक्र, नीदरलैंड से लौटी 11वीं सदी की अमूल्य धरोहर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मन की बात में मोदी ने किया चोल ताम्र-पत्रों का जिक्र, नीदरलैंड से लौटी 11वीं सदी की अमूल्य धरोहर

सारांश

नीदरलैंड से 11वीं सदी की चोल ताम्र पट्टिकाओं की वापसी महज एक राजनयिक उपलब्धि नहीं — यह तमिल इतिहास और चोल साम्राज्य की समुद्री विरासत का पुनर्मिलन है। मोदी ने 'मन की बात' में इसे हर भारतीय के गर्व का पल बताया।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को 'मन की बात' में नीदरलैंड से वापस लाए गए चोल ताम्र-पत्रों का विस्तार से जिक्र किया।
इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी ताम्र पट्टियाँ हैं, जो मुख्यतः तमिल भाषा में लिखी हैं।
ये पट्टिकाएँ राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा पिता राजराजा चोला का वचन पूरा करने और आनइमंगलम् गांव को बौद्ध विहार हेतु दान से जुड़ी हैं।
'ज्ञान भारतम् अभियान' के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में छठी-सातवीं सदी की तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएँ भी मिलीं — ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में।
दुनियाभर के तमिल समुदाय में इस वापसी को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 मई 2026 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में 11वीं सदी के चोल ताम्र-पत्रों की वापसी का उल्लेख किया, जिन्हें उनकी हालिया नीदरलैंड यात्रा के दौरान एक विशेष समारोह में भारत को सौंपा गया। इन पट्टिकाओं में 21 बड़ी और 3 छोटी ताम्र पट्टियाँ शामिल हैं, जो मुख्यतः तमिल भाषा में लिखी हुई हैं। मोदी ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का पल है।

नीदरलैंड में कैसे हुई वापसी

प्रधानमंत्री मोदी ने 'मन की बात' में बताया कि यूरोप दौरे के दौरान नीदरलैंड में आयोजित एक विशेष समारोह में ये प्राचीन चोल ताम्र पट्टिकाएँ भारत को वापस सौंपी गईं। उन्होंने कहा, 'उस कार्यक्रम में नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे।' मोदी ने यह भी बताया कि इन पट्टिकाओं को लेकर देश-विदेश से उन्हें लगातार संदेश मिल रहे हैं और दुनियाभर के तमिल समुदाय में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

ताम्र-पत्रों का ऐतिहासिक महत्व

मोदी के अनुसार ये ताम्र पट्टिकाएँ मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोला के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं। इनमें आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है। इन पट्टिकाओं में चोल वंश की उपलब्धियों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ चोल साम्राज्य के संबंधों और उसकी समुद्री शक्ति का भी वर्णन मिलता है।

छत्तीसगढ़ में भी मिली दुर्लभ खोज

मोदी ने 'मन की बात' में एक और महत्वपूर्ण सूचना साझा की। उन्होंने बताया कि 'ज्ञान भारतम् अभियान' के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में तीन दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएँ मिली हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी हैं और छठी-सातवीं सदी की मानी जा रही हैं। ये पट्टिकाएँ प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं, जिनसे तत्कालीन शासन-व्यवस्था, धर्म और संस्कृति की महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।

सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण पर सरकार का संकल्प

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चोल साम्राज्य के समृद्ध इतिहास और संस्कृति पर सभी भारतीयों को गर्व है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सरकार भारत की अमूल्य धरोहरों के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयासरत है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारत ने विदेशों से प्राचीन कलाकृतियाँ और धरोहरें वापस लाई हों — पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया से भी कई मूर्तियाँ और पुरावशेष भारत को लौटाए जा चुके हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखना ज़रूरी है — भारत के हज़ारों पुरावशेष अभी भी विदेशी संग्रहालयों और निजी संग्रहों में हैं। 'मन की बात' में इसका उल्लेख घरेलू दर्शकों तक सांस्कृतिक गर्व का संदेश पहुँचाने की दृष्टि से प्रभावी है, पर आलोचक यह भी पूछते हैं कि इन पट्टिकाओं के संरक्षण, अनुसंधान और सार्वजनिक प्रदर्शन की दीर्घकालिक योजना क्या है। छत्तीसगढ़ के मल्हार में नई खोज 'ज्ञान भारतम् अभियान' की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है, बशर्ते इन निष्कर्षों को शैक्षणिक समुदाय तक पारदर्शी तरीके से पहुँचाया जाए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीदरलैंड से वापस लाए गए चोल ताम्र-पत्र क्या हैं?
ये 11वीं सदी की ताम्र पट्टिकाएँ हैं जिनमें 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टियाँ शामिल हैं, मुख्यतः तमिल भाषा में लिखी गई हैं। ये राजेंद्र चोला-प्रथम द्वारा अपने पिता राजराजा चोला का वचन पूरा करने और आनइमंगलम् गांव को बौद्ध विहार हेतु दान देने से संबंधित हैं।
PM मोदी ने 'मन की बात' में इन ताम्र-पत्रों का जिक्र क्यों किया?
मोदी ने 31 मई 2026 को 'मन की बात' में बताया कि नीदरलैंड यात्रा के दौरान एक विशेष समारोह में ये पट्टिकाएँ भारत को सौंपी गईं, जिसमें नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी उपस्थित थे। उन्होंने इसे हर भारतीय के लिए गर्व का पल बताया और दुनियाभर के तमिल समुदाय में इसे लेकर उत्साह का उल्लेख किया।
इन ताम्र-पत्रों से इतिहास के बारे में क्या पता चलता है?
इन पट्टिकाओं में चोल वंश की उपलब्धियों के साथ-साथ साम्राज्य की समुद्री शक्ति और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ चोल संबंधों का वर्णन है। ये 11वीं सदी के व्यापार, धर्म और शासन-व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालती हैं।
छत्तीसगढ़ के मल्हार में मिली ताम्र पट्टिकाएँ कितनी पुरानी हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार मल्हार में मिली तीन ताम्र पट्टिकाएँ छठी-सातवीं सदी की हैं, यानी लगभग 1,400-1,500 वर्ष पुरानी। ये ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी हैं और पांडुवंशी राजवंश के महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से जुड़ी मानी जा रही हैं।
'ज्ञान भारतम् अभियान' क्या है?
'ज्ञान भारतम् अभियान' भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत देश की प्राचीन पांडुलिपियों, शिलालेखों और सांस्कृतिक धरोहरों की खोज, संरक्षण और दस्तावेज़ीकरण किया जाता है। इसी अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के मल्हार में दुर्लभ ताम्र पट्टिकाएँ मिली हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले