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केजरीवाल का केंद्र पर हमला: NEET पेपर लीक में सबूत नहीं, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट किस काम का?

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केजरीवाल का केंद्र पर हमला: NEET पेपर लीक में सबूत नहीं, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट किस काम का?

सारांश

केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला — NEET पेपर लीक में CBI के कथित कमज़ोर साक्ष्यों का हवाला देते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा को खोखला बताया। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में उन्होंने पारदर्शी जाँच और असली मास्टरमाइंड की पहचान की माँग की।

मुख्य बातें

अरविंद केजरीवाल ने 24 जुलाई को पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार और PM मोदी को निशाने पर लिया।
NEET 2024 पेपर लीक में CBI ने कथित तौर पर अदालत में कहा कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं।
केजरीवाल ने सवाल किया — यदि मुखिया मास्टरमाइंड नहीं, तो असली मास्टरमाइंड कौन है और क्या सरकार पेपर लीक से इनकार कर रही है?
उन्होंने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा तब तक बेमानी है जब तक जाँच एजेंसियाँ मज़बूत साक्ष्य न दें।
पेपर लीक से प्रभावित लाखों छात्रों की मानसिक पीड़ा और कुछ मामलों में आत्महत्या की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
केजरीवाल ने केंद्र से पारदर्शी जाँच और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 24 जुलाई को पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा को 'महज दिखावा' करार दिया। केजरीवाल का तर्क है कि यदि जाँच एजेंसियाँ अदालत में पर्याप्त साक्ष्य ही प्रस्तुत नहीं कर सकतीं, तो विशेष अदालतें बनाने का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं रह जाता।

मुख्य आरोप: सीबीआई के सबूत और संजीव मुखिया का मामला

केजरीवाल ने दावा किया कि वर्ष 2024 के NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने कथित तौर पर अदालत में स्वीकार किया कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने मुखिया की गिरफ्तारी को उस समय बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था और उसे पूरे कांड का 'मास्टरमाइंड' घोषित किया था।

केजरीवाल ने सवाल किया, 'यदि वही मास्टरमाइंड नहीं है, तो असली मास्टरमाइंड कौन है?' उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार अब यह मान रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं था।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर सवाल

केजरीवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कानून लाकर पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि देश में पहले से ही पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही हैं, फिर भी कई मामलों में सुनवाई वर्षों तक खिंचती रहती है। आलोचकों का कहना है कि केवल अदालत बनाने की घोषणा से न्याय सुनिश्चित नहीं होता — निष्पक्ष जाँच और ठोस साक्ष्य उससे कहीं अधिक ज़रूरी हैं।

छात्रों पर असर और मानसिक स्वास्थ्य की चिंता

केजरीवाल ने रेखांकित किया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि कई छात्रों ने गंभीर मानसिक तनाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी सामने आईं। उनका कहना था कि इस पृष्ठभूमि में सरकार की प्राथमिकता भविष्य में पेपर लीक रोकने की ठोस और प्रभावी व्यवस्था बनाना होनी चाहिए।

केंद्र सरकार से माँग

आप प्रमुख ने केंद्र सरकार से माँग की कि पेपर लीक की सभी घटनाओं की पारदर्शी जाँच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में पेपर लीक माफिया पर नकेल कसने की होती, तो जाँच एजेंसियाँ अदालत में मज़बूत साक्ष्य प्रस्तुत करतीं। यह ऐसे समय में आया है जब NEET विवाद को लेकर विपक्ष पहले से ही केंद्र पर दबाव बना रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और सड़क — दोनों पर गरमाता रह सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके केंद्र में एक वैध प्रशासनिक प्रश्न भी है — क्या जाँच एजेंसियों की साक्ष्य-संग्रह क्षमता और अदालती तैयारी, नई अदालतें बनाने की गति से मेल खाती है? NEET विवाद ने पहले ही परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरा आघात किया है। यदि CBI वास्तव में कथित मास्टरमाइंड के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं जुटा सकी, तो यह जाँच की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है — जो किसी भी दल की सरकार के लिए चिंताजनक होना चाहिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट की अवधारणा तब ही सार्थक है जब अभियोजन पक्ष तैयार हो; अन्यथा यह त्वरित न्याय नहीं, त्वरित बरी होने का मंच बन सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केजरीवाल ने फास्ट ट्रैक कोर्ट पर क्या सवाल उठाए?
केजरीवाल ने कहा कि यदि जाँच एजेंसियाँ अदालत में पर्याप्त सबूत ही पेश नहीं करेंगी, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं है। उनका तर्क है कि निष्पक्ष जाँच और मज़बूत साक्ष्य, विशेष अदालत की घोषणा से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हैं।
NEET 2024 पेपर लीक में संजीव मुखिया कौन हैं?
संजीव मुखिया को सरकार ने वर्ष 2024 के NEET पेपर लीक कांड का मुख्य आरोपी और 'मास्टरमाइंड' बताया था। केजरीवाल के अनुसार, CBI ने कथित तौर पर अदालत में कहा है कि उनके विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं, जिससे सरकार के दावों पर सवाल उठ रहे हैं।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ा है?
केजरीवाल ने बताया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। कई छात्रों ने गंभीर मानसिक तनाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या की दुखद घटनाएँ भी सामने आईं।
केजरीवाल ने केंद्र सरकार से क्या माँग की है?
उन्होंने केंद्र सरकार से पेपर लीक मामलों की पारदर्शी जाँच कराने, दोषियों को कड़ी सजा दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की माँग की है।
क्या भारत में पहले से फास्ट ट्रैक कोर्ट काम कर रही हैं?
हाँ, केजरीवाल ने खुद स्वीकार किया कि देश में पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें पहले से संचालित हैं। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि वहाँ भी कई मामलों में सुनवाई वर्षों तक खिंचती रहती है, जो इन अदालतों की सीमाओं को उजागर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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