केजरीवाल का केंद्र पर हमला: NEET पेपर लीक में सबूत नहीं, तो फास्ट ट्रैक कोर्ट किस काम का?
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 24 जुलाई को पेपर लीक मामलों पर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा को 'महज दिखावा' करार दिया। केजरीवाल का तर्क है कि यदि जाँच एजेंसियाँ अदालत में पर्याप्त साक्ष्य ही प्रस्तुत नहीं कर सकतीं, तो विशेष अदालतें बनाने का कोई व्यावहारिक अर्थ नहीं रह जाता।
मुख्य आरोप: सीबीआई के सबूत और संजीव मुखिया का मामला
केजरीवाल ने दावा किया कि वर्ष 2024 के NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने कथित तौर पर अदालत में स्वीकार किया कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने मुखिया की गिरफ्तारी को उस समय बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था और उसे पूरे कांड का 'मास्टरमाइंड' घोषित किया था।
केजरीवाल ने सवाल किया, 'यदि वही मास्टरमाइंड नहीं है, तो असली मास्टरमाइंड कौन है?' उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार अब यह मान रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं था।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर सवाल
केजरीवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में कानून लाकर पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का आश्वासन दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि देश में पहले से ही पॉक्सो और दुष्कर्म जैसे गंभीर मामलों के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही हैं, फिर भी कई मामलों में सुनवाई वर्षों तक खिंचती रहती है। आलोचकों का कहना है कि केवल अदालत बनाने की घोषणा से न्याय सुनिश्चित नहीं होता — निष्पक्ष जाँच और ठोस साक्ष्य उससे कहीं अधिक ज़रूरी हैं।
छात्रों पर असर और मानसिक स्वास्थ्य की चिंता
केजरीवाल ने रेखांकित किया कि पेपर लीक जैसी घटनाओं से देशभर के लाखों छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने बताया कि कई छात्रों ने गंभीर मानसिक तनाव झेला और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी सामने आईं। उनका कहना था कि इस पृष्ठभूमि में सरकार की प्राथमिकता भविष्य में पेपर लीक रोकने की ठोस और प्रभावी व्यवस्था बनाना होनी चाहिए।
केंद्र सरकार से माँग
आप प्रमुख ने केंद्र सरकार से माँग की कि पेपर लीक की सभी घटनाओं की पारदर्शी जाँच कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार की मंशा वास्तव में पेपर लीक माफिया पर नकेल कसने की होती, तो जाँच एजेंसियाँ अदालत में मज़बूत साक्ष्य प्रस्तुत करतीं। यह ऐसे समय में आया है जब NEET विवाद को लेकर विपक्ष पहले से ही केंद्र पर दबाव बना रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद और सड़क — दोनों पर गरमाता रह सकता है।