नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट से नहीं माने केजरीवाल, बोले — छात्र धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते थे
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 23 जुलाई को केंद्र सरकार की उस घोषणा को सिरे से नकार दिया, जिसमें नीट पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात कही गई थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह कदम छात्रों की असली माँग — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा — से ध्यान भटकाने और मंत्री को बचाने की कोशिश है।
छात्रों की माँग और सरकार का जवाब
केजरीवाल के अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान देशभर के छात्र लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने इस माँग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर मामले की लीपापोती का प्रयास किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छात्रों का मूल सवाल जवाबदेही का है, न्यायिक प्रक्रिया की गति का नहीं।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की सीमाएँ
केजरीवाल ने तर्क दिया कि देश में पहले से ही दुष्कर्म, POCSO और अन्य गंभीर मामलों के लिए अनेक फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित हैं, फिर भी कई अदालतों में समय पर सुनवाई नहीं हो पाती। उनके अनुसार, कई मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी सामान्य अदालतों से अधिक समय लग जाता है। ऐसे में केवल नई अदालत की घोषणा किसी ठोस समाधान की जगह नहीं ले सकती।
परीक्षा सुधार पर सरकार की चुप्पी
केजरीवाल ने सवाल उठाया कि सरकार ने भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कोई ठोस रोडमैप या प्रणालीगत सुधार पेश नहीं किया। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में भी इसी तरह की घटनाएँ दोहराई जाएंगी और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। उन्होंने जोर दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।
जंतर-मंतर प्रदर्शन और कथित हिंसा
केजरीवाल ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बर्बरता हुई। उनके आरोप के अनुसार, लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग के कारण कई छात्र घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने बताया कि वे स्वयं जंतर-मंतर जाकर छात्रों से मिले और उनकी स्थिति देखी।
प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल
केजरीवाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया की किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने पूछा कि क्या इन छात्रों का दर्द और उनके भविष्य की चिंता सरकार के लिए मायने नहीं रखती। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद पर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।