23 जुलाई 2026
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नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट से नहीं माने केजरीवाल, बोले — छात्र धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते थे

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नीट पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट से नहीं माने केजरीवाल, बोले — छात्र धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते थे

सारांश

नीट पेपर लीक पर केंद्र की फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषणा को केजरीवाल ने लीपापोती करार दिया। उनका कहना है — छात्र धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहते थे, सरकार ने न वह दिया, न परीक्षा सुधार का कोई रोडमैप पेश किया।

मुख्य बातें

अरविंद केजरीवाल ने 23 जुलाई को नीट पेपर लीक पर केंद्र की फास्ट ट्रैक कोर्ट घोषणा को अपर्याप्त बताया।
केजरीवाल का आरोप — यह घोषणा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की कोशिश है।
छात्र जंतर-मंतर पर मंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहे थे; प्रधानमंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया।
केजरीवाल ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस से कई छात्र घायल हुए, अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
AAP संयोजक ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 23 जुलाई को केंद्र सरकार की उस घोषणा को सिरे से नकार दिया, जिसमें नीट पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की बात कही गई थी। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि यह कदम छात्रों की असली माँग — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा — से ध्यान भटकाने और मंत्री को बचाने की कोशिश है।

छात्रों की माँग और सरकार का जवाब

केजरीवाल के अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान देशभर के छात्र लगातार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री ने इस माँग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा कर मामले की लीपापोती का प्रयास किया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छात्रों का मूल सवाल जवाबदेही का है, न्यायिक प्रक्रिया की गति का नहीं।

फास्ट ट्रैक कोर्ट की सीमाएँ

केजरीवाल ने तर्क दिया कि देश में पहले से ही दुष्कर्म, POCSO और अन्य गंभीर मामलों के लिए अनेक फास्ट ट्रैक कोर्ट संचालित हैं, फिर भी कई अदालतों में समय पर सुनवाई नहीं हो पाती। उनके अनुसार, कई मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी सामान्य अदालतों से अधिक समय लग जाता है। ऐसे में केवल नई अदालत की घोषणा किसी ठोस समाधान की जगह नहीं ले सकती।

परीक्षा सुधार पर सरकार की चुप्पी

केजरीवाल ने सवाल उठाया कि सरकार ने भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कोई ठोस रोडमैप या प्रणालीगत सुधार पेश नहीं किया। उनका कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली में व्यापक बदलाव नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में भी इसी तरह की घटनाएँ दोहराई जाएंगी और लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगता रहेगा। उन्होंने जोर दिया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जवाबदेही तय करना अनिवार्य है।

जंतर-मंतर प्रदर्शन और कथित हिंसा

केजरीवाल ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान छात्रों के साथ बर्बरता हुई। उनके आरोप के अनुसार, लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग के कारण कई छात्र घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। उन्होंने बताया कि वे स्वयं जंतर-मंतर जाकर छात्रों से मिले और उनकी स्थिति देखी।

प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल

केजरीवाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया की किसी भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन छात्रों के साथ हुई कथित हिंसा पर उन्होंने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने पूछा कि क्या इन छात्रों का दर्द और उनके भविष्य की चिंता सरकार के लिए मायने नहीं रखती। यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद पर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका मूल सवाल — 'फास्ट ट्रैक कोर्ट से भविष्य में पेपर लीक कैसे रुकेगा?' — वैध है और सरकार ने अब तक इसका ठोस जवाब नहीं दिया। गौरतलब है कि भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड मिला-जुला रहा है; POCSO मामलों में भी इन अदालतों में औसत निपटान समय अपेक्षा से अधिक रहा है। असली कमज़ोरी यह है कि सरकार ने परीक्षा-प्रणाली सुधार — जैसे केंद्रीकृत पेपर-सेटिंग की जगह विकेंद्रीकरण, डिजिटल सुरक्षा प्रोटोकॉल, या NTA की संरचनात्मक समीक्षा — पर कोई रोडमैप नहीं दिया। जब तक जवाबदेही और प्रणालीगत सुधार एक साथ नहीं आते, तब तक फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा एक प्रशासनिक प्रतिक्रिया भर रहेगी, नीतिगत समाधान नहीं।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक पर केजरीवाल ने फास्ट ट्रैक कोर्ट को क्यों नकारा?
केजरीवाल का कहना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट छात्रों की असली माँग — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा — का जवाब नहीं है। उनके अनुसार, देश में पहले से मौजूद फास्ट ट्रैक कोर्ट भी समय पर न्याय देने में पिछड़ जाते हैं, इसलिए केवल नई अदालत की घोषणा समस्या का समाधान नहीं।
जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में क्या हुआ?
केजरीवाल ने दावा किया कि जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग किया गया, जिससे कई छात्र घायल हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। केजरीवाल ने कहा कि वे स्वयं वहाँ जाकर छात्रों से मिले।
छात्र धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों माँग रहे हैं?
नीट-यूजी 2024 पेपर लीक विवाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह मानते हुए छात्र उनके इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। केजरीवाल के अनुसार, प्रधानमंत्री ने इस माँग पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नीट पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने क्या सुधार घोषित किए हैं?
केजरीवाल के अनुसार, सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट के अलावा भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए कोई ठोस प्रणालीगत सुधार या रोडमैप पेश नहीं किया है। AAP का कहना है कि बिना व्यापक परीक्षा-सुधार के यही स्थिति आगे भी बनी रहेगी।
AAP की नीट मामले में क्या माँगें हैं?
आम आदमी पार्टी ने तीन प्रमुख माँगें रखी हैं — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार ताकि भविष्य में पेपर लीक की पुनरावृत्ति न हो।
राष्ट्र प्रेस
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