चेरानेल्लूर मर्सिडीज हादसा: केरल जज के खिलाफ सबूत मिटाने का नया आरोप, क्राइम ब्रांच जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
केरल पुलिस ने 2 नवंबर 2026 को कोच्चि के चेरानेल्लूर मर्सिडीज-बेंज दुर्घटना मामले में संबंधित जज के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 238 के तहत एक नया आरोप जोड़ा है — यह धारा आपराधिक मामलों में साक्ष्य मिटाने या नष्ट करने से संबंधित है। इस मामले में जज के 17 वर्षीय बेटे ने कंटेनर रोड पर मर्सिडीज-बेंज कार चलाते हुए एक स्कूटर सवार को टक्कर मार दी थी, जिससे 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन की मौत हो गई थी।
मुख्य घटनाक्रम
पीड़ित परिवार का आरोप है कि दुर्घटना के बाद सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। इसी आधार पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 238 को चार्जशीट में शामिल किया है। इससे पहले कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर आर. निशांतिनी के निर्देश पर इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी जा चुकी है, जो अब इसकी समग्र जाँच कर रही है।
इस बीच, एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने आदेश दिया है कि मामले की आगे की कार्यवाही 'इन-कैमरा' (बंद कमरे में) आयोजित की जाएगी। अदालत ने यह निर्णय कार्यवाही की प्रकृति और साक्ष्यों की सुरक्षा की ज़रूरत को देखते हुए लिया है।
अभियोजन पक्ष और परिवार के बीच विवाद
पीड़ित जयाबालकृष्णन के परिवार ने अभियोजन पक्ष में कमियों का हवाला देते हुए सरकारी वकील (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) को हटाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि मामले को कमज़ोर तरीके से चलाया जा रहा है।
वहीं, अभियोजन पक्ष ने पलटवार करते हुए परिवार पर जांच में असहयोग का आरोप लगाया है और कहा कि मीडिया को भ्रामक जानकारी दी जा रही है। अदालत ने परिवार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि सरकारी वकील के खिलाफ कोई भी शिकायत उचित कानूनी प्रक्रिया के ज़रिये ही अदालत के समक्ष रखी जाए।
राजनीतिक हस्तक्षेप और हाई-प्रोफाइल दौरे
यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। दुर्घटना के बाद पीड़ित के परिजनों से मिलने वालों में मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, उनके पूर्ववर्ती पिनाराई विजयन, और गृह मंत्री रमेश चेन्नीथला सहित कई हाई-प्रोफाइल नेता शामिल रहे। यह ऐसे समय में आया है जब पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष और कठोर जांच की मांग कर रहा है।
गौरतलब है कि जब उच्च पदों पर बैठे लोगों के परिजन किसी आपराधिक मामले में शामिल होते हैं, तो जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है — और यह मामला भी इसी बहस का केंद्र बन चुका है।
आम जनता पर असर और व्यापक सन्दर्भ
यह मामला महज़ एक सड़क दुर्घटना तक सीमित नहीं रहा — यह न्यायपालिका, कानून व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। बीएनएस धारा 238 का जुड़ना संकेत देता है कि जांच एजेंसियों को साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ के ठोस संकेत मिले हैं।
क्राइम ब्रांच की जांच और 'इन-कैमरा' सुनवाई के आदेश के साथ, यह मामला अब केरल की न्यायिक और पुलिस व्यवस्था दोनों की परीक्षा बन चुका है।
क्या होगा आगे
क्राइम ब्रांच की जांच जारी है और अदालत में अगली सुनवाई 'इन-कैमरा' होगी। परिवार अभी भी सरकारी वकील बदलने की मांग पर अड़ा है। जांच के नतीजे और अदालती फैसला यह तय करेगा कि क्या इस मामले में प्रभावशाली पद का दुरुपयोग हुआ या नहीं।