कोच्चि पुलिस कमिश्नर कालीराज का तबादला; चेरानेल्लूर मर्सिडीज हादसे पर बोले — 'न जज ने, न किसी ने मुझसे बात की'
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी कालीराज महेश कुमार, जिन्हें हाल ही में कोच्चि सिटी पुलिस कमिश्नर के पद से स्थानांतरित किया गया है, ने स्पष्ट किया है कि चेरानेल्लूर मर्सिडीज-बेंज दुर्घटना मामले से जुड़े अतिरिक्त जिला न्यायाधीश या किसी भी अन्य व्यक्ति ने इस घटना के संबंध में उनसे कोई संपर्क नहीं किया। 30 अक्टूबर 2026 को तबादले के बाद उन्होंने यह बयान दिया। यह मामला तब से सुर्खियों में है जब 25 अक्टूबर की तड़के एक नाबालिग द्वारा कथित तौर पर चलाई जा रही लग्जरी कार ने एक व्यक्ति की जान ली।
कालीराज का बयान और तबादले पर रुख
कालीराज महेश कुमार ने शुक्रवार को तबादले के बाद कहा कि इस मामले की जांच या उसके बाद की किसी भी कार्यवाही में उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। उन्होंने साफ कहा कि मामले को संभालने में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी।
तबादले को उन्होंने सरकारी सेवा का स्वाभाविक हिस्सा बताते हुए कहा कि उन्होंने इस आदेश को पूरे मन से स्वीकार कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि उच्च अधिकारियों ने स्थानांतरण का कोई विशेष कारण नहीं बताया। गौरतलब है कि कालीराज ने अपने कार्यकाल में कोच्चि में आपराधिक गिरोहों और मादक पदार्थ नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए पहचान बनाई थी, और उन्होंने तबादले को लेकर किसी पर भी कोई आरोप नहीं लगाया।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
यह दुर्घटना 25 अक्टूबर 2026 को तड़के करीब रात 2:20 बजे कोच्चि के निकट चेरानेल्लूर में कंटेनर रोड पर हुई। कथित तौर पर एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के 17 वर्षीय बेटे द्वारा चलाई जा रही मर्सिडीज-बेंज कार ने मंजाली निवासी 55 वर्षीय जयाबालकृष्णन के स्कूटर को टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई।
मृतक जयाबालकृष्णन चित्तूर मंदिर के निकट अपनी सड़क किनारे की दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। उनके परिवार ने भी पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है।
पुलिस कार्रवाई पर विवाद
पुलिस द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर तीखी प्रतिक्रिया हुई, विशेषकर तब जब नाबालिग को हिरासत में लेने के तुरंत बाद थाने से जमानत पर रिहा कर दिया गया। बढ़ती आलोचनाओं के बाद उसे दोबारा हिरासत में लिया गया, हालांकि बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने उसे जमानत दे दी।
आलोचकों का कहना है कि प्रारंभिक रिहाई में पुलिस के स्तर पर पक्षपात हुआ और मामले में प्रभाव के इस्तेमाल के सवाल उठे। जांच के दौरान इन आरोपों की जांच जारी है।
न्यायाधीश के पिता पर कार्रवाई और उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
नाबालिग के पिता, जो इरिंजालकुडा में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पद पर तैनात हैं, उन्हें भी इस मामले में आरोपी बनाया गया। केरल उच्च न्यायालय ने बाद में उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी और उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।
यह ऐसे समय में आया है जब न्यायिक अधिकारियों से जुड़े मामलों में पुलिस की भूमिका पर व्यापक बहस छिड़ी हुई है। केरल में इस तरह के हाई-प्रोफाइल मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग तेज होती जा रही है।
आगे क्या होगा
मामले की जांच अभी जारी है और केरल उच्च न्यायालय की निगरानी में आगे की कार्यवाही होगी। नए पुलिस कमिश्नर के कार्यभार संभालने के बाद जांच की दिशा पर सभी की नजर बनी हुई है।