21 जुलाई 2026
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नेनमारा दोहरे हत्याकांड में चेंथमारा को मौत की सजा, पलक्कड़ कोर्ट ने माना 'दुर्लभतम मामला'

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नेनमारा दोहरे हत्याकांड में चेंथमारा को मौत की सजा, पलक्कड़ कोर्ट ने माना 'दुर्लभतम मामला'

सारांश

पलक्कड़ की अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने नेनमारा दोहरे हत्याकांड के दोषी चेंथमारा को मृत्युदंड सुनाया और अपराध को 'दुर्लभतम मामलों' में रखा। 27 जनवरी 2025 को सुधाकरन और उनकी 75 वर्षीय माँ की हत्या के इस मामले में ₹20 लाख मुआवजे का भी आदेश दिया गया। बचाव पक्ष ने उच्च न्यायालय में अपील की घोषणा की है।

मुख्य बातें

पलक्कड़ अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 17 जुलाई 2025 को चेंथमारा को नेनमारा दोहरे हत्याकांड में मृत्युदंड सुनाया।
न्यायालय ने अपराध को 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में रखा और दोषी को ₹20 लाख जुर्माना अदा करने का आदेश दिया।
27 जनवरी 2025 को 50 वर्षीय सुधाकरन और उनकी 75 वर्षीय माँ लक्ष्मी की पोथुंडी की बोयन कॉलोनी में धारदार हथियार से हत्या की गई थी।
जुर्माना न भरने पर तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान; राशि पीड़ितों के बच्चों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
बचाव पक्ष के वकील जैकब मैथ्यू ने फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की।

पलक्कड़ की अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 17 जुलाई 2025 को नेनमारा दोहरे हत्याकांड के दोषी चेंथमारा को मृत्युदंड की सजा सुनाई। अभियोजन और बचाव पक्ष की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने इस अपराध को 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में रखा। यह फैसला केरल के उस जघन्य अपराध में न्याय की परिणति है, जिसने राज्य को हिलाकर रख दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

27 जनवरी 2025 को पोथुंडी की बोयन कॉलोनी स्थित उनके घर में धारदार हथियार से हमला कर 50 वर्षीय सुधाकरन और उनकी 75 वर्षीय माँ लक्ष्मी की निर्मम हत्या कर दी गई थी। न्यायालय ने पाया कि ये हत्याएँ पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थीं और चेंथमारा समाज के लिए निरंतर खतरा बना हुआ था।

सजा और मुआवजे का आदेश

मृत्युदंड के साथ-साथ न्यायालय ने दोषी को ₹20 लाख का जुर्माना अदा करने का भी निर्देश दिया, जो सुधाकरन और सजिथा के बच्चों को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। यदि चेंथमारा यह राशि नहीं चुका पाता, तो राज्य सरकार को मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। जुर्माना न भरने पर तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा का भी प्रावधान किया गया है।

न्यायालय की टिप्पणियाँ

न्यायालय ने दोषी के 'पछतावे की कमी', हत्याओं को बार-बार उचित ठहराने के प्रयास और पीड़ित परिवार को दी गई धमकियों को सजा निर्धारण में अहम कारण बताया। बचाव पक्ष का यह तर्क कि मानसिक परेशानी के कारण सजा में राहत दी जाए, न्यायालय ने खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि चेंथमारा मानसिक रूप से स्वस्थ था।

अभियोजन और पुलिस की प्रतिक्रिया

स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एन. जे. विजयकुमार ने कहा कि न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की सभी दलीलें स्वीकार कर लीं। जाँच अधिकारी मुरलीधरन और पलक्कड़ जिला पुलिस प्रमुख अब्दुल रशीद ने कहा कि गहन जाँच और अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय ने दोषी को उचित सजा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। वहीं, बचाव पक्ष के वकील जैकब मैथ्यू ने कहा कि न्यायालय ने साक्ष्यों की पर्याप्त समीक्षा नहीं की और इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया

फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सुधाकरन और सजिथा के बच्चों ने संतोष व्यक्त किया और कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था — आखिरकार उन्हें न्याय मिला। यह मामला केरल में न्यायिक प्रक्रिया की त्वरित कार्यवाही का उदाहरण बन गया है, हालाँकि उच्च न्यायालय में अपील के बाद ही यह सजा अंतिम रूप लेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

मृत्युदंड के मामले उच्च न्यायालय की पुष्टि के बिना अंतिम नहीं होते, और बचाव पक्ष की अपील इस प्रक्रिया को लंबा खींच सकती है। यह भी विचारणीय है कि 'दुर्लभतम मामलों' की कसौटी पर न्यायपालिका की व्याख्या उच्चतर अदालतों में किस तरह परखी जाती है — यही इस मामले की असली परीक्षा होगी।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेनमारा दोहरे हत्याकांड में क्या हुआ था?
27 जनवरी 2025 को केरल के पलक्कड़ जिले के नेनमारा के पास पोथुंडी की बोयन कॉलोनी में दोषी चेंथमारा ने 50 वर्षीय सुधाकरन और उनकी 75 वर्षीय माँ लक्ष्मी की धारदार हथियार से उनके घर में हत्या कर दी थी। न्यायालय ने पाया कि यह हत्या पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा थी।
चेंथमारा को क्या सजा मिली?
पलक्कड़ अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 17 जुलाई 2025 को चेंथमारा को मृत्युदंड और ₹20 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर तीन वर्ष की अतिरिक्त सजा का प्रावधान किया गया है और यह राशि पीड़ितों के बच्चों को मुआवजे के रूप में दी जाएगी।
न्यायालय ने इस मामले को 'दुर्लभतम' क्यों माना?
न्यायालय ने दोषी के पछतावे की कमी, हत्याओं को बार-बार उचित ठहराने के प्रयास, पीड़ित परिवार को दी गई धमकियों और अपराध की पूर्व नियोजित प्रकृति को आधार बनाते हुए इसे 'दुर्लभतम मामलों' की श्रेणी में रखा। बचाव पक्ष का मानसिक अस्वस्थता का तर्क भी खारिज किया गया।
क्या इस फैसले को चुनौती दी जा सकती है?
हाँ, बचाव पक्ष के वकील जैकब मैथ्यू ने घोषणा की है कि इस फैसले को उच्च न्यायालय में अपील के जरिए चुनौती दी जाएगी। भारतीय कानून के तहत मृत्युदंड की सजा उच्च न्यायालय की पुष्टि के बिना लागू नहीं होती।
पीड़ित परिवार और पुलिस की क्या प्रतिक्रिया रही?
सुधाकरन और सजिथा के बच्चों ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा था और न्याय मिला। जाँच अधिकारी मुरलीधरन और पलक्कड़ जिला पुलिस प्रमुख अब्दुल रशीद ने कहा कि गहन जाँच और अभियोजन के साथ समन्वय ने उचित सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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