केरल की राजनीति में उठा सांप्रदायिकता का सवाल, सतीशन ने चुनाव आयोग से की कार्रवाई की अपील
सारांश
मुख्य बातें
तिरुवनंतपुरम, ३ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन ने पेराम्ब्रा में कथित सांप्रदायिक गतिविधियों को लेकर एक बड़ा सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने यह आरोप लगाया कि सीपीआई-एम मतदाताओं में विभाजन करने के लिए एक “दोहराई जाने वाली रणनीति” का सहारा ले रही है।
सतीशन ने कहा कि यूडीएफ के उम्मीदवार फातिमा तहलिया को निशाना बनाना एक सामान्य घटना नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास है जो सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देता है। उन्होंने इसे लोकसभा चुनाव के दौरान वडकारा में हुए ‘काफिर स्क्रीनशॉट’ विवाद से जोड़ा।
विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में सीपीआई-एम के वरिष्ठ नेताओं को जानकारी होने के बावजूद कोई जिम्मेदारी नहीं तय की गई। उन्होंने यह भी बताया कि “स्पष्ट सबूत” होने के बावजूद जांच एजेंसियां दोषियों तक नहीं पहुंच पाईं।
सतीशन ने राज्य पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ‘काफिर स्क्रीनशॉट’ मामले को इस बहाने बंद कर दिया गया कि आरोपियों की पहचान नहीं हो सकी, जबकि सीपीआई-एम और डीवाईएफआई के कार्यकर्ताओं पर संदेह था। उन्होंने इसे राजनीतिक मामलों में असली कार्रवाई से बचने की प्रवृत्ति बताया।
उन्होंने इस विवाद को चुनावी संदर्भ में जोड़ते हुए कहा कि पिनराई विजयन सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष के चलते सीपीआई-एम “हताश कदम” उठा रही है। उनके अनुसार, सत्तारूढ़ दल जनाक्रोश से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक भावनाओं को भड़काते हुए ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहा है।
सतीशन ने कहा, “समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश से सीपीआई-एम जनता के बढ़ते गुस्से से नहीं बच पाएगी।” उन्होंने यह भी दावा किया कि केरल में सरकार को हटाने के लिए एक व्यापक जनभावना बन चुकी है।
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की। सतीशन ने चेतावनी दी कि यदि सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो चुनावी माहौल में सांप्रदायिक मुद्दों को और बढ़ावा मिल सकता है।
इस बीच, चुनाव आयोग ने वाम उम्मीदवार रामकृष्णन और फातिमा तहलिया दोनों को नोटिस जारी किया है। केरल में १४० विधानसभा सीटों के लिए ९ अप्रैल को मतदान होना है।