28 अक्टूबर 2026
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खड़गे PM मोदी से माफी मांगें — शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम की माँग, महाराष्ट्र किसानों को ₹7,500 करोड़ राहत

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खड़गे PM मोदी से माफी मांगें — शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम की माँग, महाराष्ट्र किसानों को ₹7,500 करोड़ राहत

सारांश

पटना में खड़गे की एक टिप्पणी ने राजनीतिक भूचाल ला दिया है — शिवसेना के संजय निरुपम ने माफी माँगने की माँग की, पृथ्वीराज चव्हाण ने भी आलोचना की। साथ ही, महाराष्ट्र कैबिनेट ने सूखाग्रस्त किसानों के लिए ₹7,500 करोड़ का पैकेज घोषित किया और निरुपम ने 'वोट चोरी' के आरोपों पर बैलेट-पेपर चुनाव का आईना दिखाया।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 28 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से PM मोदी और उनके दिवंगत पिता पर की गई टिप्पणी के लिए सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी कथित तौर पर खड़गे की भाषा की आलोचना की।
महाराष्ट्र कैबिनेट ने ₹7,500 करोड़ के सूखा राहत पैकेज की घोषणा की; प्रत्येक प्रभावित किसान को न्यूनतम ₹5,000 दिए जाएँगे।
राज्य के 36 में से 20-25 जिलों में अकाल जैसे हालात रहे; CM देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
निरुपम ने कहा — बैलेट पेपर से हुए विधान परिषद के 28 सीटों के चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी; 'वोट चोरी' के आरोप खोखले हैं।
निरुपम ने चेतावनी दी कि रणनीति न बदलने पर 2029 तक शेष राज्यों में भी कांग्रेस सत्ता गँवा सकती है।

शिवसेना के प्रवक्ता संजय निरुपम ने 28 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता के संदर्भ में की गई टिप्पणी पर सार्वजनिक माफी माँगने की कड़ी माँग की। निरुपम ने कहा कि पटना में एक कार्यक्रम के दौरान खड़गे द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा न केवल प्रधानमंत्री पद की गरिमा के विरुद्ध है, बल्कि राजनीतिक विमर्श की सीमाओं का भी उल्लंघन करती है।

खड़गे की टिप्पणी और विवाद

निरुपम के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। निरुपम ने कहा, 'राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में किसी के दिवंगत पिता को घसीटना अशोभनीय है और यह बयान कांग्रेस अध्यक्ष के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था।' उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा और शिवसेना दोनों की ओर से खड़गे से माफी माँगने की माँग की जा रही है।

कांग्रेस के भीतर भी उठे सवाल

निरुपम ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण का हवाला देते हुए कहा कि स्वयं कांग्रेस के भीतर से भी इस बयान की आलोचना हुई है। चव्हाण ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि खड़गे को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। निरुपम ने कहा कि एक वरिष्ठ और अनुभवी कांग्रेस नेता का यह रुख खड़गे के बयान पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों को ₹7,500 करोड़ की राहत

महाराष्ट्र कैबिनेट ने सूखे से प्रभावित किसानों के लिए ₹7,500 करोड़ के सहायता पैकेज की घोषणा की है। निरुपम के अनुसार, राज्य के 36 जिलों में से लगभग 20 से 25 जिलों में अकाल जैसी स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हुईं। इस पैकेज के तहत प्रत्येक किसान को न्यूनतम ₹5,000 की त्वरित सहायता दी जाएगी, ताकि वे त्योहार मना सकें और तत्काल जरूरतें पूरी कर सकें। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और केंद्र सरकार की एक विशेष टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का आकलन किया था। निरुपम ने स्पष्ट किया कि यह राहत राशि अंतिम नहीं है — आने वाले दिनों में बैंक ऋण, बीज, खाद और बिजली बिलों में छूट जैसे अन्य मुद्दों पर भी सरकार विचार करेगी।

'वोट चोरी' के आरोपों पर कांग्रेस को आईना

निरुपम ने कांग्रेस द्वारा लगाए जा रहे 'वोट चोरी' के आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए विधान परिषद के चुनाव परिणामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनावों में — जहाँ बैलेट पेपर का उपयोग हुआ था और ईवीएम का नहीं — कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी। ये चुनाव स्नातक और शिक्षक वर्ग के मतदाताओं के बीच हुए थे। निरुपम ने कर्नाटक का भी उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ भी पार्टी का प्रदर्शन अपेक्षित नहीं रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कांग्रेस ईवीएम, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनाव आयोग को दोष देती रही और अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया, तो 2029 तक उसके शेष राज्यों में भी जनता सत्ता से बाहर कर सकती है।

आगे क्या होगा

खड़गे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोरों पर हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन व विपक्ष के बीच राजनीतिक तापमान तेजी से बढ़ रहा है। किसान राहत पैकेज पर अमल और आगामी राहत उपायों की घोषणा से यह तय होगा कि सरकार के दावे चुनावी वर्ष में कितने ठोस साबित होते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि ये चुनाव एक सीमित और विशिष्ट मतदाता वर्ग (स्नातक व शिक्षक) के बीच हुए — इसे व्यापक चुनावी जनादेश का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ₹7,500 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान चुनावी नज़दीकियों के बीच हुआ है; असली सवाल यह है कि ₹5,000 की न्यूनतम राशि बर्बाद फसलों की भरपाई के लिए पर्याप्त है या नहीं — और यह पैसा किसान के खाते तक कब और कैसे पहुँचेगा।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निरुपम ने मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी क्यों माँगने की माँग की?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। निरुपम के अनुसार यह बयान सार्वजनिक जीवन में पद की गरिमा के अनुरूप नहीं था और इसके लिए माफी माँगी जानी चाहिए।
महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए कितनी राहत की घोषणा की है?
महाराष्ट्र कैबिनेट ने सूखाग्रस्त किसानों के लिए ₹7,500 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की है। इस पैकेज के तहत प्रत्येक प्रभावित किसान को न्यूनतम ₹5,000 की त्वरित सहायता दी जाएगी; आगे बैंक ऋण, बीज, खाद और बिजली बिलों में राहत पर भी विचार किया जाएगा।
महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में बैलेट पेपर का क्या महत्व है?
निरुपम ने बताया कि विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे, यानी ईवीएम का उपयोग नहीं हुआ था। इसके बावजूद कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी, जिससे निरुपम ने 'वोट चोरी' के आरोपों को खारिज किया।
क्या कांग्रेस के भीतर भी खड़गे की टिप्पणी की आलोचना हुई?
निरुपम के अनुसार, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने भी कथित तौर पर माना कि खड़गे को ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। निरुपम ने इसे पार्टी के भीतर से ही बयान पर उठा असंतोष बताया।
संजय निरुपम ने कांग्रेस को 2029 को लेकर क्या चेतावनी दी?
निरुपम ने कहा कि यदि कांग्रेस चुनावी हार के लिए ईवीएम, एसआईआर और चुनाव आयोग को दोष देती रही और अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया, तो 2029 तक उसके शेष राज्यों में भी जनता उसे सत्ता से बाहर कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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