28 जून 2026
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ख्वाजा आसिफ के 'असली कश्मीरी नहीं' बयान पर बवाल, पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने लगाई फटकार

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ख्वाजा आसिफ के 'असली कश्मीरी नहीं' बयान पर बवाल, पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने लगाई फटकार

सारांश

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का एक टीवी बयान — कि रावलाकोट और मीरपुर के लोग 'असल कश्मीरी नहीं' — पाकिस्तान के अपने मानवाधिकार परिषद की फटकार और पीओके नेताओं के तीखे पलटवार का कारण बन गया है। यह विवाद तब उभरा जब पीओके में विरोध प्रदर्शन और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने 27 जून 2026 को रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान की कड़ी निंदा की।
ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि रावलाकोट और मीरपुर के लोग 'असल कश्मीरी नहीं हैं।' पीओके नेता फैसल मुमताज राठौर ने एक्स पर रक्षा मंत्री से सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
कथित तौर पर पीओके में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों की मौतें हुई हैं, जिसकी अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग उठ रही है।
लंदन में ब्रिटिश संसद और 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन कर ब्रिटेन सरकार से हस्तक्षेप की अपील की।

पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने 27 जून 2026 को रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस विवादास्पद बयान की कड़ी निंदा की, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के रावलाकोट और मीरपुर के निवासियों की कश्मीरी पहचान को चुनौती दी थी। यह बयान एक टीवी इंटरव्यू के दौरान दिया गया था, जिसके बाद पीओके और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।

विवाद की जड़

एक टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान ख्वाजा आसिफ ने कहा कि रावलाकोट और मीरपुर के लोग 'असल कश्मीरी नहीं हैं।' इस बयान ने पीओके में रहने वाले लाखों लोगों की पहचान और अस्मिता पर सीधा प्रहार किया। आलोचकों का कहना है कि किसी रक्षा मंत्री का इस तरह का बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि पहले से ही अशांत क्षेत्र में विभाजन को और गहरा करता है।

मानवाधिकार परिषद की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया में कहा कि सरकारी पदों पर आसीन लोगों को ऐसे संवेदनशील विषयों पर पूरी जिम्मेदारी, सावधानी और सम्मान के साथ बोलना चाहिए। परिषद ने पाकिस्तान सरकार से माँग की कि वह इस मामले पर स्पष्टीकरण दे और यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में ऐसे बयानों की पुनरावृत्ति न हो।

पीओके नेता का तीखा पलटवार

पीओके नेता फैसल मुमताज राठौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर रक्षा मंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा, 'जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ या किसी और से प्रमाण की जरूरत नहीं है। उनके जैसे पुराने सोच वाले नेता लोगों को करीब लाने के बजाय समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं।'

राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि जनता की नाराजगी देखने के बाद ख्वाजा आसिफ अब पीओके की प्रशासनिक व्यवस्था में कमियाँ निकालकर मूल मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'सर, अपने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछिए, वे आपको बताएंगे कि हमने शासन कितना अच्छी तरह चलाया है। बेहतर होता कि आप अपने मूल बयान के लिए माफी माँगते, बजाय इसके कि शासन को दोष देकर बात टालने की कोशिश करते।'

पीओके में बढ़ता असंतोष और आरोप

यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पीओके में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कथित तौर पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कई निर्दोष नागरिकों की मौत होने की खबरें सामने आई हैं। अनेक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दुनिया भर में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने इन कथित मौतों की निंदा की है और पीओके में पाकिस्तानी अधिकारियों पर लगाए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाँच की माँग की है।

लंदन में कश्मीरी प्रवासियों का प्रदर्शन

इस सप्ताह की शुरुआत में ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने लंदन में ब्रिटिश संसद के बाहर प्रदर्शन किया और इसके बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने पीओके में कथित खाद्य आपूर्ति बाधित किए जाने और नागरिकों की मौतों के विरुद्ध आवाज उठाई। एक प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से लगाए गए कथित प्रतिबंधों के कारण कई इलाकों में खाने-पीने का सामान और दवाइयाँ नहीं पहुँच पा रही हैं। उन्होंने कहा, 'लोग भूख से मर रहे हैं। कई लोग अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। यह बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन में 10 लाख से ज्यादा कश्मीरी रहते हैं।' प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटेन सरकार से पाकिस्तानी अधिकारियों पर दबाव बनाकर हस्तक्षेप करने की अपील की। यह विवाद पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में पीओके की उपेक्षा और वहाँ के लोगों के बढ़ते असंतोष को एक बार फिर उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें कश्मीर को 'अधूरे एजेंडे' के रूप में भुनाया जाता है, लेकिन पीओके के वास्तविक निवासियों को दोयम दर्जे का माना जाता है। गौरतलब है कि जिस समय पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरी अधिकारों की वकालत करता है, उसी समय उसके रक्षा मंत्री पीओके के लाखों लोगों की पहचान को ही नकार रहे हैं। यह विरोधाभास पाकिस्तान की विश्वसनीयता को कश्मीर मुद्दे पर कमज़ोर करता है। लंदन में प्रवासी कश्मीरियों का प्रदर्शन और एचआरसी की आलोचना मिलकर यह संकेत देते हैं कि पीओके में असंतोष अब सीमाएँ पार कर अंतरराष्ट्रीय दबाव का रूप ले रहा है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ख्वाजा आसिफ ने कश्मीरी पहचान को लेकर क्या बयान दिया था?
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा कि पाकिस्तान कब्जे वाले कश्मीर के रावलाकोट और मीरपुर के लोग 'असल कश्मीरी नहीं हैं।' इस बयान ने पीओके में रहने वाले लाखों लोगों की अस्मिता पर सवाल खड़ा कर व्यापक विरोध को जन्म दिया।
पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद ने इस बयान पर क्या कहा?
पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने 27 जून 2026 को बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि सरकारी पदों पर बैठे लोगों को संवेदनशील मामलों में पूरी जिम्मेदारी और सम्मान के साथ बोलना चाहिए। परिषद ने पाकिस्तान सरकार से स्पष्टीकरण और भविष्य में ऐसे बयानों पर रोक की माँग की।
पीओके नेता फैसल मुमताज राठौर ने क्या कहा?
फैसल मुमताज राठौर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं। उन्होंने ख्वाजा आसिफ पर आरोप लगाया कि वे जनता की नाराजगी देखकर अब पीओके की प्रशासनिक कमियाँ गिनाकर मूल मुद्दे से ध्यान भटका रहे हैं और उनसे सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
पीओके में मौजूदा हालात क्या हैं?
कथित तौर पर पीओके में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में निर्दोष नागरिकों की मौतें होने की खबरें हैं। अनेक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इन मौतों की निंदा की है और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच की माँग की है।
लंदन में कश्मीरी प्रवासियों ने प्रदर्शन क्यों किया?
ब्रिटेन में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों ने ब्रिटिश संसद और 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर मार्च कर पीओके में कथित खाद्य आपूर्ति बाधित किए जाने और नागरिकों की मौतों का विरोध किया। उन्होंने ब्रिटेन सरकार से पाकिस्तान पर दबाव बनाने और मानवाधिकार उल्लंघनों की जाँच सुनिश्चित करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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