28 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 स्थगित: भूस्खलन और अस्थिर चट्टानों के खतरे के चलते जिला प्रशासन का बड़ा फैसला

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 स्थगित: भूस्खलन और अस्थिर चट्टानों के खतरे के चलते जिला प्रशासन का बड़ा फैसला

सारांश

किन्नौर कैलाश यात्रा-2026 अगले आदेशों तक स्थगित — मिलिंग खाता से शिवलिंग तक अस्थिर बोल्डर, ग्लेशियर और भूस्खलन का गंभीर खतरा। 21 जून के सर्वेक्षण के बाद जिला प्रशासन ने 1-30 जुलाई की यात्रा रद्द की।

मुख्य बातें

किन्नौर कैलाश यात्रा-2026 को जिला प्रशासन ने 28 जून 2026 को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया।
पहले यात्रा 1 जुलाई से 30 जुलाई 2026 के बीच आयोजित होनी थी।
21 जून को किए गए सर्वेक्षण में मिलिंग खाता से शिवलिंग तक अस्थिर ग्लेशियर, बोल्डर और भूस्खलन का गंभीर खतरा पाया गया।
गुफा से सोरंग के बीच बड़े बोल्डर गिरने से रास्ता पहले ही बाधित है।
बढ़ते तापमान से बर्फ पिघलने के कारण मलबा गिरने का खतरा और बढ़ा है।
मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने के बाद ही यात्रा पर अगला निर्णय होगा।

किन्नौर कैलाश यात्रा-2026 को जिला प्रशासन, किन्नौर ने 28 जून 2026 को अगले आदेशों तक स्थगित कर दिया है। यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, अस्थिर बोल्डर और ग्लेशियर से उत्पन्न गंभीर खतरों को देखते हुए यह निर्णय श्रद्धालुओं और बचाव दलों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लिया गया। पहले यह यात्रा 1 जुलाई से 30 जुलाई 2026 के बीच आयोजित होनी थी।

यात्रा स्थगन का निर्णय कैसे हुआ

12 जून 2026 को राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं लोक शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी, जिसमें यात्रा आयोजित करने का प्रारंभिक निर्णय लिया गया था। इसके बाद मार्ग की सुरक्षा और व्यवहार्यता जाँचने के लिए वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की देखरेख में एक विशेष सर्वेक्षण दल गठित किया गया, जिसने 21 जून 2026 को पूरे यात्रा मार्ग का निरीक्षण किया।

सर्वेक्षण में सामने आए गंभीर खतरे

सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, मिलिंग खाता से शिवलिंग तक के मार्ग पर बड़े ग्लेशियर मौजूद हैं, जिनके ऊपर और आसपास भारी चट्टानें और बोल्डर अस्थिर स्थिति में पाए गए। गुफा से सोरंग के बीच कई स्थानों पर बड़े बोल्डर गिरने से रास्ता पहले ही बाधित हो चुका है और ये चट्टानें एक-दूसरे के सहारे टिकी हुई हैं, जिससे कभी भी और बड़ा भूस्खलन होने की आशंका है।

इसके अतिरिक्त, बढ़ते तापमान के कारण बर्फ पिघलने से चट्टानों के खिसकने, भूस्खलन और मलबा गिरने का खतरा काफी बढ़ गया है। मिलिंग खाता से पवित्र गुफा तक का मार्ग — जहाँ श्रद्धालु प्रायः रात के समय यात्रा करते हैं — विशेष रूप से अत्यधिक जोखिमपूर्ण पाया गया।

प्रशासन की अपील

जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से स्पष्ट अपील की है कि वे अगले आदेश तक किन्नौर कैलाश यात्रा पर जाने का प्रयास न करें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि मौसम और मार्ग की स्थिति में सुधार होने तथा यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही यात्रा को लेकर अगला निर्णय लिया जाएगा।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में मानसून-पूर्व वर्षा और तापमान वृद्धि के कारण भूस्खलन की घटनाएँ बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि किन्नौर कैलाश यात्रा हर वर्ष हज़ारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और इस क्षेत्र की धार्मिक पर्यटन अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। जब तक मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित नहीं घोषित किया जाता, यात्रा स्थगित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि यात्रा की अनुमति देने का प्रारंभिक निर्णय 12 जून को क्यों लिया गया जबकि मानसून-पूर्व खतरों का आकलन पहले भी संभव था। हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ग्लेशियर पिघलने और भूस्खलन की घटनाएँ लगातार बढ़ी हैं, फिर भी तीर्थ यात्राओं की अनुमति प्रक्रिया में पूर्व-सर्वेक्षण को अनिवार्य नहीं बनाया गया है। जब तक यात्रा मार्गों के लिए जलवायु-संवेदनशील दीर्घकालिक सुरक्षा प्रोटोकॉल नहीं बनते, हर वर्ष इसी तरह अंतिम समय में स्थगन की नौबत आती रहेगी।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 क्यों स्थगित की गई?
यात्रा मार्ग पर भूस्खलन, अस्थिर बोल्डर और ग्लेशियर से उत्पन्न गंभीर खतरों के कारण जिला प्रशासन ने यात्रा स्थगित की है। 21 जून 2026 को किए गए विशेष सर्वेक्षण में मिलिंग खाता से शिवलिंग तक के मार्ग पर जानलेवा स्थितियाँ पाई गईं।
किन्नौर कैलाश यात्रा 2026 की मूल तारीखें क्या थीं?
यात्रा मूल रूप से 1 जुलाई से 30 जुलाई 2026 के बीच आयोजित होनी थी। 12 जून को हुई उच्चस्तरीय बैठक में यात्रा आयोजन का निर्णय लिया गया था, लेकिन बाद में सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर इसे स्थगित कर दिया गया।
यात्रा मार्ग पर कौन-से खतरे पाए गए?
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार मिलिंग खाता से शिवलिंग तक बड़े ग्लेशियर और अस्थिर बोल्डर हैं, गुफा से सोरंग के बीच रास्ता बाधित है, और बढ़ते तापमान से बर्फ पिघलने के कारण भूस्खलन व मलबा गिरने का खतरा बढ़ गया है।
किन्नौर कैलाश यात्रा कब दोबारा शुरू होगी?
प्रशासन के अनुसार मौसम और मार्ग की स्थिति में सुधार होने तथा यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही अगला निर्णय लिया जाएगा। अभी कोई निश्चित तारीख नहीं दी गई है।
श्रद्धालुओं को क्या करना चाहिए?
जिला प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अगले आदेश तक किन्नौर कैलाश यात्रा पर जाने का प्रयास न करें और प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करें।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 6 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 12 महीने पहले