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किश्तवाड़ हथियार लूट केस: NIA कोर्ट ने आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका ठुकराई

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किश्तवाड़ हथियार लूट केस: NIA कोर्ट ने आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका ठुकराई

सारांश

जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 2019 के किश्तवाड़ हथियार लूट मामले में आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक को जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा — 101 गवाहों में से 70 की पूछताछ बाकी है, और रिहाई से सबूत प्रभावित होने का खतरा है।

मुख्य बातें

जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका खारिज की।
मामला मार्च 2019 की किश्तवाड़ हथियार लूट से जुड़ा है, जिसमें एके-47 राइफल, 3 मैगजीन और 90 कारतूस छीने गए थे।
मलिक पर जून 2019 से जनवरी 2020 के बीच हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को शरण व लॉजिस्टिक सहायता देने का आरोप।
कोर्ट ने कहा — 101 गवाहों में से अब तक केवल 30 की पूछताछ पूरी हुई है।
स्पेशल जज ने चेतावनी दी कि रिहाई से गवाहों से छेड़छाड़ और सबूत प्रभावित होने का खतरा है।

जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 2019 के किश्तवाड़ हथियार लूट मामले में आरोपी आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आतंकी मामलों में ट्रायल में देरी को जमानत का आधार नहीं माना जा सकता।

मुख्य घटनाक्रम: 2019 की हथियार लूट

यह मामला मार्च 2019 का है, जब हिज्बुल मुजाहिदीन के हथियारबंद आतंकियों ने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर के एस्कॉर्ट इंचार्ज से एक एके-47 राइफल, तीन मैगजीन और 90 जिंदा कारतूस छीन लिए थे। इस साहसिक वारदात ने पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जाँच बाद में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई और मामला एनआईए केस नंबर आरसी 08/2019/एनआईए/जेएमयू के तहत दर्ज है।

आरोपी की भूमिका: ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम

डोडा जिले के टंटना निवासी तनवीर अहमद मलिक पर आरोप है कि उसने जून 2019 से जनवरी 2020 के बीच हिज्बुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकियों को लगातार सहायता पहुँचाई। जाँच एजेंसी के अनुसार, मलिक एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में कार्यरत था — यानी वह आतंकी संगठनों और उनके ज़मीनी नेटवर्क के बीच की कड़ी का काम करता था।

एनआईए का कहना है कि मलिक ने जिन आतंकियों की मदद की, उनमें हारून अब्बास वानी और ताहिर अहमद भट जैसे नाम शामिल हैं। उसने इन आतंकियों को अपने घर में शरण दी, खाने-पीने की व्यवस्था की और लॉजिस्टिक सुविधाएँ मुहैया कराईं, जिससे वे सुरक्षा बलों की नज़र से बचकर अपनी गतिविधियाँ जारी रख सके।

कोर्ट की टिप्पणी: गवाहों से छेड़छाड़ का खतरा

जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने ट्रायल में देरी का तर्क दिया, लेकिन स्पेशल जज ने इसे अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने रेखांकित किया कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कुल 101 गवाहों की सूची दाखिल की है, जिनमें से अब तक केवल 30 गवाहों की पूछताछ पूरी हो सकी है।

कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि इस स्तर पर आरोपी को रिहा करने पर गवाहों से छेड़छाड़ और सबूतों को प्रभावित करने की प्रबल आशंका है। स्पेशल जज ने कहा कि गंभीर आतंकी मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज के व्यापक हित को सर्वोपरि रखना अनिवार्य है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि अभी 71 और गवाहों की पूछताछ बाकी है, जिससे ट्रायल की प्रक्रिया अभी लंबी चलने का अनुमान है। यह मामला जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के ज़मीनी ढाँचे को तोड़ने की एनआईए की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट है कि आतंकी सहयोगियों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया सख्ती से जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उनके ज़मीनी सहयोगियों — ओजीडब्ल्यू — के बिना नहीं चलते। मलिक की जमानत अस्वीकृति एनआईए की उस रणनीति को रेखांकित करती है जो सिर्फ आतंकियों को नहीं, पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को कटघरे में खड़ा करती है। हालाँकि, 101 में से 71 गवाहों की पूछताछ अभी बाकी होना यह भी दर्शाता है कि ट्रायल की गति एक गंभीर चुनौती बनी हुई है — और यह सवाल उठता है कि त्वरित न्याय के लिए विशेष अदालतों की क्षमता पर्याप्त है या नहीं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किश्तवाड़ हथियार लूट केस क्या है?
यह मार्च 2019 की घटना है, जब हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों ने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर के एस्कॉर्ट इंचार्ज से एक एके-47 राइफल, तीन मैगजीन और 90 जिंदा कारतूस छीन लिए थे। बाद में यह मामला एनआईए को सौंपा गया।
तनवीर अहमद मलिक पर क्या आरोप हैं?
मलिक पर आरोप है कि उसने जून 2019 से जनवरी 2020 के बीच हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकियों को अपने घर में शरण दी, खाना मुहैया कराया और लॉजिस्टिक सहायता दी। एनआईए के अनुसार वह एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में काम करता था।
कोर्ट ने जमानत क्यों खारिज की?
कोर्ट ने कहा कि गंभीर आतंकी मामलों में ट्रायल में देरी जमानत का पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि 101 में से 71 गवाहों की पूछताछ अभी बाकी है और रिहाई से गवाहों से छेड़छाड़ की आशंका है।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
ट्रायल जारी रहेगा और शेष 71 गवाहों की पूछताछ पूरी की जाएगी। मलिक फिलहाल न्यायिक हिरासत में रहेगा। एनआईए इस मामले को हिज्बुल मुजाहिदीन के ज़मीनी नेटवर्क के विरुद्ध अपनी व्यापक कार्रवाई के तहत आगे बढ़ाती रहेगी।
ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) कौन होता है?
ओवर ग्राउंड वर्कर वह व्यक्ति होता है जो सीधे हथियार नहीं उठाता, लेकिन आतंकी संगठनों को शरण, खाना, सूचना और लॉजिस्टिक सहायता देकर उनके नेटवर्क को जीवित रखता है। सुरक्षा एजेंसियाँ इन्हें आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा मानती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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