किश्तवाड़ हथियार लूट केस: NIA कोर्ट ने आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका ठुकराई
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने 2019 के किश्तवाड़ हथियार लूट मामले में आरोपी आतंकी सहयोगी तनवीर अहमद मलिक की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आतंकी मामलों में ट्रायल में देरी को जमानत का आधार नहीं माना जा सकता।
मुख्य घटनाक्रम: 2019 की हथियार लूट
यह मामला मार्च 2019 का है, जब हिज्बुल मुजाहिदीन के हथियारबंद आतंकियों ने किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर के एस्कॉर्ट इंचार्ज से एक एके-47 राइफल, तीन मैगजीन और 90 जिंदा कारतूस छीन लिए थे। इस साहसिक वारदात ने पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था की खामियों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। जाँच बाद में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंपी गई और मामला एनआईए केस नंबर आरसी 08/2019/एनआईए/जेएमयू के तहत दर्ज है।
आरोपी की भूमिका: ओवर ग्राउंड वर्कर के रूप में काम
डोडा जिले के टंटना निवासी तनवीर अहमद मलिक पर आरोप है कि उसने जून 2019 से जनवरी 2020 के बीच हिज्बुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकियों को लगातार सहायता पहुँचाई। जाँच एजेंसी के अनुसार, मलिक एक ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) के रूप में कार्यरत था — यानी वह आतंकी संगठनों और उनके ज़मीनी नेटवर्क के बीच की कड़ी का काम करता था।
एनआईए का कहना है कि मलिक ने जिन आतंकियों की मदद की, उनमें हारून अब्बास वानी और ताहिर अहमद भट जैसे नाम शामिल हैं। उसने इन आतंकियों को अपने घर में शरण दी, खाने-पीने की व्यवस्था की और लॉजिस्टिक सुविधाएँ मुहैया कराईं, जिससे वे सुरक्षा बलों की नज़र से बचकर अपनी गतिविधियाँ जारी रख सके।
कोर्ट की टिप्पणी: गवाहों से छेड़छाड़ का खतरा
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने ट्रायल में देरी का तर्क दिया, लेकिन स्पेशल जज ने इसे अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने रेखांकित किया कि अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कुल 101 गवाहों की सूची दाखिल की है, जिनमें से अब तक केवल 30 गवाहों की पूछताछ पूरी हो सकी है।
कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि इस स्तर पर आरोपी को रिहा करने पर गवाहों से छेड़छाड़ और सबूतों को प्रभावित करने की प्रबल आशंका है। स्पेशल जज ने कहा कि गंभीर आतंकी मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा और समाज के व्यापक हित को सर्वोपरि रखना अनिवार्य है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि अभी 71 और गवाहों की पूछताछ बाकी है, जिससे ट्रायल की प्रक्रिया अभी लंबी चलने का अनुमान है। यह मामला जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क के ज़मीनी ढाँचे को तोड़ने की एनआईए की व्यापक कोशिशों का हिस्सा है। कोर्ट के इस फैसले से स्पष्ट है कि आतंकी सहयोगियों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया सख्ती से जारी रहेगी।