किश्तवाड़ रेप-मर्डर केस: पीड़िता के पिता बोले — क्राइम ब्रांच जांच से संतुष्ट, बिना मेरी मंजूरी कोई केस न हो
सारांश
मुख्य बातें
किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में 15 वर्षीय नाबालिग के साथ हुए रेप और हत्या के मामले में पीड़िता के पिता ने सोमवार, 31 अगस्त को स्पष्ट किया कि वह जांच जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच को सौंपे जाने से पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने अपील की कि उनकी लिखित मंजूरी और अंगूठे के निशान के बिना इस मामले में कोई भी कानूनी कार्रवाई शुरू न की जाए।
पिता का वीडियो बयान
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में पीड़िता के पिता को यह कहते सुना जा सकता है — "मैंने सुना है कि किसी ने जम्मू में केस फाइल किया है। मेरे अंगूठे के निशान के बिना कोई केस फाइल न करे। जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है और मैं इससे संतुष्ट हूँ।" उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मंजूरी के बिना उनकी ओर से कोई केस आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। अधिकारियों ने अब तक इस वीडियो की सत्यता की न तो पुष्टि की है और न ही इसे नकारा है।
वकील से कथित बातचीत का विवाद
सोशल मीडिया पर एक और कथित टेलीफोनिक बातचीत भी वायरल हो रही है, जिसमें पीड़िता के पिता अधिवक्ता दीपिका सिंह राजावत से बात करते प्रतीत होते हैं। राजावत ने इस मामले से संबंधित याचिका दायर की है या इससे जुड़ी बताई जाती हैं। कथित बातचीत में पिता ने अनुरोध किया कि उनकी ओर से कोई भी पक्ष आगे न बढ़े, और यह भी कहा कि इसके बाद जो भी होगा, उसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी। यह बातचीत अभी तक सत्यापित नहीं हुई है।
मामले की पृष्ठभूमि
20 अगस्त को किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे समाज को स्तब्ध कर दिया था। इस जघन्य अपराध के बाद लोगों ने दोषियों को कड़ी से कड़ी और दृष्टांत स्थापित करने वाली सजा की मांग उठाई थी। गौरतलब है कि यह घटना ऐसे समय में हुई जब जम्मू-कश्मीर में महिला सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंताएं व्यक्त की जा रही थीं।
राष्ट्रीय आयोग का हस्तक्षेप
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने इस मामले की स्वतंत्र जांच करने का निर्णय पहले ही ले लिया है। आयोग ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को नोटिस जारी किए हैं। आयोग का हस्तक्षेप इस बात का संकेत है कि मामले में जनजातीय समुदाय की भागीदारी को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल जांच जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच के हाथों में है और पीड़िता के परिजन इसी एजेंसी पर भरोसा जता रहे हैं। NCST के नोटिस का जवाब मिलने के बाद मामले में अगला कदम तय होगा। यह देखना अहम होगा कि क्राइम ब्रांच की जांच में पारदर्शिता बनी रहती है और पीड़ित परिवार की इच्छाओं का सम्मान होता है।