27 जून 2026
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कोलकाता गोदाम हादसा: NDRF कमांडेंट मनीष रंजन बोले — 15 मौतों के बाद भी जारी रहेगा बचाव अभियान

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कोलकाता गोदाम हादसा: NDRF कमांडेंट मनीष रंजन बोले — 15 मौतों के बाद भी जारी रहेगा बचाव अभियान

सारांश

कोलकाता में गोदाम की छत ढहने से 15 मौतों के बाद NDRF का बचाव अभियान रुकने का नाम नहीं ले रहा। 24 सेक्टरों में बंटे घटनास्थल पर डार्क जोन अभी भी चुनौती बने हुए हैं। कमांडेंट मनीष रंजन का एक ही संदेश — पूरी संतुष्टि तक ऑपरेशन जारी रहेगा।

मुख्य बातें

कोलकाता में गोदाम की छत ढहने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है, बचाव अभियान 26 जून 2026 से जारी है।
NDRF की दूसरी बटालियन ने घटनास्थल को 24 सेक्टरों में विभाजित कर टॉप-टू-बॉटम स्कैनिंग शुरू की है।
कुछ 'डार्क जोन' में भारी कंक्रीट अभी भी मौजूद है; वहाँ मलबा हटाने के बाद पुनः स्कैनिंग होगी।
FSL टीम स्वतंत्र रूप से हादसे के कारणों की जाँच कर रही है।
11 सदस्यीय जाँच टीम को NDRF ने पूरे ऑपरेशन की विस्तृत ब्रीफिंग दी।
कमांडेंट मनीष रंजन ने कहा — अभियान की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं, पूरी संतुष्टि तक जारी रहेगा।

कोलकाता के एक गोदाम की छत 26 जून 2026 को ढह जाने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य अनवरत जारी है। मलबे में अभी भी किसी के दबे होने की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की दूसरी बटालियन के कमांडेंट मनीष रंजन ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरी तरह संतुष्टि नहीं हो जाती, अभियान रुकने वाला नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

NDRF की टीम ने पूरे घटनास्थल को लगभग 24 सेक्टरों में विभाजित कर टॉप-टू-बॉटम स्कैनिंग प्रक्रिया अपनाई है। कमांडेंट मनीष रंजन ने बताया कि अधिकांश क्षेत्र की जाँच पूरी हो चुकी है, लेकिन कुछ 'डार्क जोन' अभी भी शेष हैं जहाँ भारी मात्रा में कंक्रीट और मलबा जमा है।

उन्होंने कहा, 'हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि मलबे के नीचे कोई भी व्यक्ति न छूटे। चाहे कोई पीड़ित मिले या नहीं, जब तक हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हो जाते कि पूरा क्षेत्र सुरक्षित और साफ है, तब तक अभियान जारी रहेगा।'

डार्क जोन में चुनौती

रंजन के अनुसार इन डार्क जोन में मौजूद भारी कंक्रीट संरचनाओं को हटाने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। जैसे ही यह काम पूरा होगा, NDRF की टीम दोबारा विस्तृत स्कैनिंग करेगी ताकि किसी भी संभावित पीड़ित की मौजूदगी को लेकर कोई संदेह न रहे।

यह ऐसे समय में आया है जब शहरी इमारत ढहने की घटनाओं में बचाव अभियानों की अवधि और दक्षता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। NDRF का यह 24-सेक्टर ढाँचा उस सुव्यवस्थित दृष्टिकोण को दर्शाता है जो हाल के वर्षों में बल ने अपनाया है।

FSL जाँच टीम की भूमिका

घटनास्थल पर फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम भी स्वतंत्र रूप से हादसे के कारणों की जाँच में जुटी है। कमांडेंट रंजन ने स्पष्ट किया कि FSL टीम बचाव अभियान के लिए स्थापित ढाँचे और व्यवस्थाओं का उपयोग कर रही है, जबकि NDRF का ध्यान पूरी तरह राहत और बचाव पर केंद्रित है।

जाँच टीम को ब्रीफिंग

हादसे की जाँच के लिए घटनास्थल पहुँची 11 सदस्यीय जाँच टीम को NDRF ने पूरे ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी। कमांडेंट रंजन ने बताया कि टीम को बचाव अभियान की शुरुआत, विभिन्न चरणों में संचालन और टीमों की तैनाती की रणनीति समझाई गई। ब्रीफिंग के बाद जाँच टीम घटनास्थल से रवाना हो गई।

बचाव अभियान कब तक

अभियान की समय-सीमा के बारे में पूछे जाने पर कमांडेंट मनीष रंजन ने कहा कि फिलहाल कोई निश्चित समय-सीमा तय करना संभव नहीं है। उन्होंने दोहराया, 'जब तक हम पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते कि पूरे इलाके की जाँच हो चुकी है और कोई भी व्यक्ति मलबे में फंसा नहीं है, तब तक यह ऑपरेशन जारी रहेगा।' गौरतलब है कि इस प्रकार की आपदाओं में पहले 72 घंटे सबसे निर्णायक माने जाते हैं, और बल उसी सतर्कता के साथ काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसी इमारतों को आपदा से पहले क्यों नहीं जाँचा गया। FSL की स्वतंत्र जाँच जवाबदेही की दिशा में सही कदम है, पर उसके निष्कर्षों पर कार्रवाई सुनिश्चित करना राज्य सरकार की परीक्षा होगी। बंगाल में पिछले कुछ वर्षों में इमारत ढहने की घटनाएँ बार-बार सामने आई हैं — बिना ठोस नीतिगत बदलाव के यह चक्र टूटता नहीं दिखता।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता गोदाम हादसे में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
कोलकाता में गोदाम की छत ढहने से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। बचाव एजेंसियाँ मलबे में अभी भी किसी के फंसे होने की आशंका को देखते हुए अभियान जारी रखे हुए हैं।
NDRF बचाव अभियान कब तक चलेगा?
NDRF कमांडेंट मनीष रंजन के अनुसार अभियान की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है। जब तक पूरे घटनास्थल की जाँच पूरी नहीं हो जाती और यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि कोई भी व्यक्ति मलबे में नहीं है, ऑपरेशन जारी रहेगा।
NDRF ने घटनास्थल पर कौन-सी रणनीति अपनाई है?
NDRF ने पूरे घटनास्थल को लगभग 24 सेक्टरों में विभाजित कर टॉप-टू-बॉटम स्कैनिंग प्रक्रिया अपनाई है। जहाँ भारी कंक्रीट और मलबे वाले 'डार्क जोन' हैं, वहाँ पहले मलबा हटाया जाएगा और फिर दोबारा स्कैनिंग की जाएगी।
FSL टीम घटनास्थल पर क्या कर रही है?
फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम स्वतंत्र रूप से हादसे के कारणों की जाँच कर रही है। NDRF ने स्पष्ट किया है कि FSL टीम बचाव अभियान के लिए स्थापित ढाँचे का उपयोग कर रही है, जबकि NDRF का ध्यान पूरी तरह राहत और बचाव पर केंद्रित है।
11 सदस्यीय जाँच टीम को क्या जानकारी दी गई?
NDRF ने 11 सदस्यीय जाँच टीम को पूरे बचाव ऑपरेशन की विस्तृत ब्रीफिंग दी — जिसमें अभियान की शुरुआत, विभिन्न चरणों में संचालन और टीमों की तैनाती की रणनीति शामिल थी। ब्रीफिंग के बाद जाँच टीम घटनास्थल से रवाना हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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