कोलकाता गोदाम हादसा: ईस्टर्न रेलवे की 70 सदस्यीय टीम मलबे में तलाश जारी, 15 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के तारातला इलाके में गोदाम की छत ढहने की त्रासदी में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है और 18 घायल राज्य संचालित एसएसकेएम अस्पताल में उपचाराधीन हैं। 26 जून 2026 की शाम से ईस्टर्न रेलवे ने अपनी विशेष तकनीकी टीम और अत्याधुनिक उपकरणों के साथ राहत एवं बचाव अभियान में भागीदारी शुरू कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम
यह गोदाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट कोलकाता की भूमि पर एक निजी कंपनी द्वारा निर्माणाधीन था। यह ज़मीन 2024 में 35 वर्ष की लीज पर दी गई थी। छत के ढहते ही मलबे में कई श्रमिक दब गए, जिसके बाद बहु-एजेंसी बचाव अभियान तत्काल शुरू किया गया।
लापरवाही के आरोप में अब तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इस हादसे के लिए राज्य की पिछली सरकार पर दोषपूर्ण निर्माण योजना को मंजूरी देने का आरोप लगाया है।
ईस्टर्न रेलवे की भूमिका
हावड़ा और सियालदह डिवीजन तथा लिलुआ वर्कशॉप से आई रेलवे की 70 सदस्यीय टीम ने 26 जून को शाम 5 बजे से मलबे की कटाई शुरू की। रेलवे के एक प्रवक्ता के अनुसार, टीम के पास 10 ऑक्सी-कटर सेट, 6 एब्रेसिव कटर और 3 प्लाज्मा कटिंग यूनिट हैं, जिनसे भारी मलबे और मुड़े हुए स्टील के ढाँचों को काटा जा रहा है।
विशेष रूप से 'कोल्ड कटर' उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है, जो न्यूनतम या शून्य ताप उत्पन्न करते हैं — जिससे मलबे में फंसे जीवित व्यक्तियों को नुकसान पहुँचने का खतरा नहीं रहता।
बहु-एजेंसी बचाव अभियान
घटनास्थल पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सेना और कोलकाता पुलिस मिलकर काम कर रही हैं। NDRF की टीम डॉग स्क्वॉड और इंफ्रारेड उपकरणों की सहायता से मलबे में दबे लोगों का पता लगाने में जुटी है, जबकि सेना ने ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार भी तैनात किया है।
बचाव दल ने स्पष्ट किया है कि जब तक अंतिम व्यक्ति को मलबे से बाहर नहीं निकाला जाता, ऑपरेशन बिना रुके जारी रहेगा।
जवाबदेही और राजनीतिक प्रतिक्रिया
हादसे की जाँच के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज़ हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर 'फॉल्टी प्लान' को स्वीकृति देने का आरोप लगाया है, जबकि विपक्ष ने मौजूदा प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। गिरफ्तार पाँच आरोपियों के खिलाफ लापरवाही से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
आगे की स्थिति
राहतकर्मियों के अनुसार, मलबे की मोटाई और मुड़े हुए स्टील के ढाँचे बचाव कार्य को जटिल बना रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर चिंताएँ पहले से बढ़ी हुई हैं। जाँच एजेंसियाँ यह भी पड़ताल कर रही हैं कि पोर्ट की लीज़ भूमि पर निर्माण की अनुमति किन शर्तों पर दी गई थी।