क्या कोलकाता के चाइनीज काली मंदिर में चाऊमीन और मोमोज का भोग चढ़ता है?

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क्या कोलकाता के चाइनीज काली मंदिर में चाऊमीन और मोमोज का भोग चढ़ता है?

सारांश

कोलकाता का चाइनीज काली मंदिर एक अनूठा स्थल है जहां मां काली को चाऊमीन और मोमोज का भोग अर्पित किया जाता है। इस मंदिर की अनोखी परंपरा और इतिहास जानने के लिए पढ़ें।

Key Takeaways

  • मां काली को चाऊमीन और मोमोज का भोग अर्पित किया जाता है।
  • यह मंदिर कोलकाता के चीनी समुदाय द्वारा निर्मित है।
  • मंदिर में दीवाली की रात विशेष पूजा होती है।
  • यहां का चमत्कारी पेड़ हजारों लोगों की मनोकामना पूरी करता है।
  • मंदिर की अनूठी परंपरा चीनी और भारतीय संस्कृति का मिलाजुला रूप है।

नई दिल्ली, २५ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में मां काली को तंत्र की देवी माना जाता है, जहां उन्हें भोग स्वरूप बलि अर्पित की जाती है। हालांकि, कोलकाता में एक ऐसा मंदिर है, जहां मां काली को चाऊमीन और मोमोज चढ़ाए जाते हैं, और भक्त भी प्रसाद का आनंद लेते हैं। हम बात कर रहे हैं कोलकाता के चाइनीज काली मंदिर की।

कोलकाता में टंगरा नामक स्थान है, जिसे चाइना टाउन के नाम से भी जाना जाता है। यहां चीनी समुदाय की संख्या अधिक है और वे खुद को चीनी हिंदू मानते हैं। टंगरा में मां काली को समर्पित एक मंदिर है, जिसे चाइनीज काली मंदिर कहा जाता है। दीवाली की रात मां के मंदिर में विशेष पूजा होती है और पूरी रात अनुष्ठान चलाते हैं।

मंदिर की देखरेख भी चीनी समुदाय के लोग करते हैं, जबकि मां की पूजा स्थानीय पंडित करते हैं। यहां सभी परंपराएं सनातन धर्म के अनुसार निभाई जाती हैं, लेकिन चीनी समुदाय के लोग मोटी मोमबत्तियाँ अर्पित करके मां के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह मंदिर कोलकाता के चीनी समुदाय द्वारा निर्मित एक अनूठा मंदिर है।

कहानी के अनुसार, लगभग छह दशक पहले एक चीनी लड़का बीमार हुआ और किसी भी इलाज से ठीक नहीं हो रहा था। उसी इलाके में हिंदू समुदाय के लोग एक पेड़ के नीचे दो काले पत्थरों की पूजा करते थे जिन्हें मां काली और भगवान शिव के रूप में माना जाता था। चीनी बच्चे के माता-पिता ने भी उसी पेड़ की पूजा करना शुरू किया, और उनका भक्ति का फल यह हुआ कि बच्चा पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गया। इसके बाद वहां के चीनी समुदाय ने बड़े मंदिर का निर्माण कराया।

आज भी मंदिर के बीचोंबीच वह चमत्कारी पेड़ मौजूद है, जहां हजारों लोगों की मनोकामना पूरी हो चुकी है। मंदिर की देखभाल और प्रबंधन का कार्य वर्षों से चीनी समुदाय के लोग ही करते आ रहे हैं।

मंदिर की एक विशेषता है वहां चढ़ाया जाने वाला प्रसाद। मंदिर में मां को शुद्ध शाकाहारी प्रसाद अर्पित किया जाता है, लेकिन चीनी समुदाय के लोग चीन के प्रमुख व्यंजन नूडल्स और मोमोज मां को अर्पित करते हैं। यह चढ़ावा पिछले कई वर्षों से चढ़ाया जा रहा है और अब यह मंदिर की एक अनूठी परंपरा बन चुका है।

Point of View

बल्कि यह सांस्कृतिक समृद्धि और विविधता का भी उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस अनूठी परंपरा ने न केवल स्थानीय समुदायों को जोड़ा है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में चीनी समुदाय के योगदान को भी सराहता है।
NationPress
07/02/2026

Frequently Asked Questions

कहाँ स्थित है चाइनीज काली मंदिर?
चाइनीज काली मंदिर कोलकाता के टंगरा में स्थित है।
इस मंदिर में किस प्रकार का भोग चढ़ाया जाता है?
इस मंदिर में मां काली को चाऊमीन और मोमोज का भोग चढ़ाया जाता है।
क्या यहां बलि की प्रथा है?
इस मंदिर में बलि की प्रथा नहीं है; यहां शाकाहारी भोग अर्पित किया जाता है।
मंदिर की विशेष पूजा कब होती है?
दीवाली की रात यहां विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है।
चाइनीज काली मंदिर का इतिहास क्या है?
यह मंदिर चीनी समुदाय द्वारा निर्मित है और इसकी स्थापना की कहानी एक बीमार बच्चे से जुड़ी है।
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