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तारातला गोदाम हादसा: केएमसी जांच में खुलासा, सॉयल टेस्ट से पहले दी गई थी निर्माण अनुमति

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तारातला गोदाम हादसा: केएमसी जांच में खुलासा, सॉयल टेस्ट से पहले दी गई थी निर्माण अनुमति

सारांश

कोलकाता के तारातला गोदाम हादसे में केएमसी की जांच ने गहरी प्रणालीगत खामियाँ उजागर की हैं — सॉयल टेस्ट से पहले अनुमति, अधूरा दस्तावेजीकरण और एक वरिष्ठ ओएसडी की कथित भूमिका। 16 मजदूरों की जान लेने वाले इस हादसे ने नगर निगम की निर्माण अनुमति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बातें

केएमसी की जांच में खुलासा हुआ कि तारातला गोदाम को अनिवार्य सॉयल टेस्ट रिपोर्ट जमा होने से पहले ही निर्माण अनुमति दे दी गई थी।
निर्माण के दौरान भवन की संरचनात्मक डिजाइन का उचित दस्तावेजीकरण भी नहीं किया गया था।
जादवपुर यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ समिति ने भवन के डिजाइन में मूलभूत खामियाँ पाई हैं।
पूर्व मेयर फिरहाद हाकिम के ओएसडी कालीचरण बंदोपाध्याय की अनुमति प्रक्रिया में कथित भूमिका जांच के घेरे में है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को ₹10-10 लाख और घायलों को ₹1-1 लाख की सहायता दी।
24 जून को हुए हादसे में 16 लोगों की मौत और 15 से अधिक घायल हुए थे।

कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की आंतरिक जांच में सामने आया है कि दक्षिण कोलकाता के तारातला में स्थित तीन मंजिला गोदाम को निर्माण की अनुमति अनिवार्य मिट्टी परीक्षण (सॉयल टेस्ट) रिपोर्ट जमा होने से पहले ही दे दी गई थी। 24 जून को इस निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह जाने से 16 मजदूरों की मौत हो गई थी और 15 से अधिक लोग घायल हो गए थे।

जांच में क्या-क्या सामने आया

केएमसी अधिकारियों के अनुसार, हादसे के बाद दस्तावेजों की गहन समीक्षा में कई प्रक्रियागत खामियाँ उजागर हुई हैं। जांच में पाया गया कि निर्माण कार्य के दौरान भवन की अनिवार्य संरचनात्मक डिजाइन (स्ट्रक्चरल डिजाइन) का उचित दस्तावेजीकरण भी नहीं किया गया था।

इसके अलावा, जादवपुर यूनिवर्सिटी के संरचनात्मक विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में यह माना है कि भवन के डिजाइन में मूलभूत स्तर पर कई गंभीर खामियाँ थीं, जो इस त्रासदी का कारण बन सकती थीं।

कालीचरण बंदोपाध्याय की कथित भूमिका

केएमसी के सूत्रों के अनुसार, जांच के विभिन्न स्तरों पर पूर्व कोलकाता मेयर फिरहाद हाकिम के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) कालीचरण बंदोपाध्याय की कथित भूमिका भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि उन्होंने कथित तौर पर प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिसके चलते जरूरी दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही गोदाम निर्माण की अनुमति जारी कर दी गई। यह आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और अंतिम निष्कर्ष आना शेष है।

पीड़ित परिवारों को राहत पैकेज

मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हादसे से प्रभावित परिवारों के लिए व्यापक राहत पैकेज की घोषणा की। नवान्न सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले 16 श्रमिकों के परिजनों को ₹10-10 लाख के चेक सौंपे।

दुर्घटना में घायल हुए लोगों को ₹1-1 लाख की आर्थिक सहायता दी गई। यह राहत राशि राज्य सरकार की ओर से सीधे पीड़ित परिवारों को सौंपी गई।

हादसे की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 24 जून को तारातला इलाके में निर्माणाधीन इस तीन मंजिला गोदाम की छत अचानक भरभराकर गिर गई थी। उस समय कई मजदूर भवन के अंदर काम कर रहे थे और मलबे के नीचे दब गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दुर्घटना में 16 लोगों की मौत हुई और 15 से अधिक घायल हो गए।

यह ऐसे समय में आया है जब कोलकाता और पश्चिम बंगाल में अनधिकृत या अनियमित निर्माण को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि नगर निगम स्तर पर अनुमति प्रक्रिया की खामियाँ एक व्यापक प्रणालीगत समस्या की ओर इशारा करती हैं।

आगे क्या होगा

केएमसी की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है। जादवपुर यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ समिति की विस्तृत रिपोर्ट भी प्रतीक्षित है, जो भवन की संरचनात्मक विफलता के तकनीकी कारणों को स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जवाबदेही के पूर्ण अभाव का संकेत है। एक वरिष्ठ ओएसडी की कथित भूमिका यह सवाल उठाती है कि क्या राजनीतिक दबाव में नियामक प्रक्रियाएँ दरकिनार की गई थीं। राहत पैकेज ज़रूरी है, लेकिन असली जवाबदेही तब होगी जब जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई सुनिश्चित हो।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तारातला गोदाम हादसे में केएमसी जांच में क्या सामने आया?
केएमसी की आंतरिक जांच में खुलासा हुआ कि गोदाम को अनिवार्य मिट्टी परीक्षण (सॉयल टेस्ट) रिपोर्ट जमा होने से पहले ही निर्माण अनुमति दे दी गई थी। साथ ही, निर्माण के दौरान संरचनात्मक डिजाइन का उचित दस्तावेजीकरण भी नहीं किया गया था।
तारातला गोदाम हादसा कब और कैसे हुआ?
24 जून को दक्षिण कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन तीन मंजिला गोदाम की छत अचानक ढह गई। उस समय काम कर रहे कई मजदूर मलबे में दब गए और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 16 लोगों की मौत हुई तथा 15 से अधिक घायल हुए।
कालीचरण बंदोपाध्याय का इस मामले में क्या कथित रोल है?
केएमसी सूत्रों के अनुसार, पूर्व कोलकाता मेयर फिरहाद हाकिम के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) कालीचरण बंदोपाध्याय ने कथित तौर पर अनुमति प्रक्रिया को प्रभावित किया। यह आरोप है कि उनके दखल के कारण जरूरी दस्तावेज और सत्यापन पूरे होने से पहले ही निर्माण की अनुमति दी गई। यह आरोप अभी जांच के अधीन है।
हादसे के पीड़ितों को क्या मुआवज़ा मिला?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नवान्न सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मृतकों के परिजनों को ₹10-10 लाख के चेक सौंपे। घायल हुए लोगों को ₹1-1 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
जादवपुर यूनिवर्सिटी की विशेषज्ञ समिति ने क्या पाया?
जादवपुर यूनिवर्सिटी के संरचनात्मक विशेषज्ञों की उच्चस्तरीय समिति ने पाया कि तारातला गोदाम के डिजाइन में मूलभूत स्तर पर कई गंभीर खामियाँ थीं। समिति की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट अभी प्रतीक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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