10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कोटा में 11वीं के छात्र मयंक नागर ने मोबाइल छिनने पर जहर खाया, इलाज के दौरान मौत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कोटा में 11वीं के छात्र मयंक नागर ने मोबाइल छिनने पर जहर खाया, इलाज के दौरान मौत

सारांश

कोटा में 16 वर्षीय मयंक नागर ने पिता द्वारा मोबाइल छीनने के बाद जहर खाकर जान दे दी। यह घटना किशोरों में बढ़ती स्क्रीन-लत और मानसिक संकट की गंभीर चेतावनी है — खासकर उस शहर में जो पहले से छात्र-दबाव के लिए जाना जाता है।

मुख्य बातें

मयंक नागर (16) , 11वीं कक्षा के छात्र, ने 10 अगस्त 2026 की रात कोटा के हनुमान नगर में जहरीला पदार्थ खाया।
पिता चौथमल नागर द्वारा मोबाइल पर गेम खेलने से रोककर फोन छीनने के बाद यह कदम उठाया गया।
सोमवार सुबह निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मयंक की मौत हो गई।
न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद शव परिवार को सौंपा गया।
दादाबाड़ी पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू की; मयंक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।

कोटा (राजस्थान) में 11वीं कक्षा के 16 वर्षीय छात्र मयंक नागर ने 10 अगस्त 2026 की रात जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली, जब उसके पिता ने मोबाइल फोन पर गेम खेलने से रोककर फोन छीन लिया। सोमवार सुबह एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

घटनाक्रम: रात का वह दुखद मोड़

हनुमान नगर इलाके में रविवार की शाम जब परिवार घर पर था, तो मयंक के पिता चौथमल नागर ने उसे मोबाइल पर गेम खेलते देखा। उन्होंने उसे गेम बंद करने को कहा, लेकिन मयंक ने बात नहीं मानी। इसके बाद पिता ने फोन ले लिया। थोड़ी देर बाद मयंक ने घर में ही जहरीला पदार्थ खा लिया।

मयंक के चाचा संत राम के अनुसार, अचानक लड़के की हालत बिगड़ी और वह गिर पड़ा। परिवारवालों के पूछने पर उसने खुद बताया कि उसने जहर खा लिया है। परिवार तुरंत उसे एक निजी अस्पताल ले गया, जहाँ सोमवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

पोस्टमार्टम और पुलिस कार्रवाई

मयंक की मौत के बाद परिवार ने शुरू में पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया था। दादाबाड़ी पुलिस स्टेशन के एसएचओ बलदेव राम ने बताया कि पुलिस अधिकारियों ने परिवार को समझाया, जिसके बाद न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम किया गया। बाद में शव परिवार को सौंप दिया गया। पुलिस ने परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

मयंक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। चौथमल पेशे से पेंटर हैं और उन्हें पहले से दिल की बीमारी है। बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी भी तबीयत बिगड़ गई। परिवारवालों ने बताया कि मयंक की माँ का रो-रोकर बुरा हाल है।

चौथमल ने कहा कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि मोबाइल फोन छीनने का परिणाम इतना दुखद होगा। यह घटना न केवल परिवार, बल्कि पूरे स्थानीय समुदाय को गहरे सदमे में छोड़ गई है।

किशोरों में स्क्रीन-लत: एक बड़ी चिंता

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब देश भर में किशोरों में मोबाइल और गेमिंग की लत को लेकर चिंता बढ़ रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक स्क्रीन-टाइम छीनने की बजाय धीरे-धीरे सीमाएँ तय करना और बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना अधिक प्रभावी होता है। कोटा, जो पहले से कोचिंग के दबाव में छात्र-आत्महत्याओं के लिए चर्चा में रहता है, इस घटना से एक बार फिर सुर्खियों में है।

यदि आप या आपका कोई परिचित मानसिक संकट में है, तो iCall हेल्पलाइन नंबर 9152987821 पर संपर्क करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से चेताते आए हैं कि बिना संवाद के अचानक डिजिटल वंचना किशोरों में तीव्र भावनात्मक संकट पैदा कर सकती है। कोटा का नाम पहले से कोचिंग-दबाव और छात्र-आत्महत्याओं से जुड़ा है, लेकिन यह मामला अकादमिक तनाव से परे एक नई चुनौती — गेमिंग लत — की ओर ध्यान खींचता है। सवाल यह है कि क्या स्कूल, परिवार और नीति-निर्माता इस बदलते संकट के लिए तैयार हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा में 11वीं के छात्र मयंक नागर की मौत कैसे हुई?
मयंक नागर (16) ने 10 अगस्त 2026 की रात कोटा के हनुमान नगर स्थित अपने घर पर जहरीला पदार्थ खा लिया, जब उसके पिता ने मोबाइल पर गेम खेलने से रोककर फोन छीन लिया। सोमवार सुबह एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
दादाबाड़ी पुलिस स्टेशन ने परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने परिवार को पोस्टमार्टम के लिए राजी किया, जो न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मोर्चरी में कराया गया।
मयंक के परिवार पर इस घटना का क्या असर पड़ा?
मयंक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। पिता चौथमल नागर, जो दिल के मरीज़ हैं, बेटे की मौत की खबर सुनकर खुद बीमार पड़ गए। परिवारवालों के अनुसार मयंक की माँ का रो-रोकर बुरा हाल है।
किशोरों में मोबाइल लत और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक डिजिटल उपकरण छीनने की बजाय धीरे-धीरे सीमाएँ तय करना और बच्चों के साथ खुला संवाद बनाए रखना अधिक प्रभावी और सुरक्षित तरीका है। गेमिंग लत को एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में पहचानकर पेशेवर मदद लेना ज़रूरी हो सकता है।
कोटा में छात्र-आत्महत्याओं का यह कितना गंभीर मुद्दा है?
कोटा पहले से कोचिंग के दबाव में छात्र-आत्महत्याओं के लिए चर्चा में रहता है। यह मामला उस चिंता में एक नया आयाम जोड़ता है — अकादमिक तनाव से इतर, गेमिंग लत और डिजिटल निर्भरता से उपजा मानसिक संकट अब एक अलग खतरे के रूप में उभर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले