जमीन आवंटन विवाद: श्रीधर बाबू का केटीआर पर पलटवार, ₹200 करोड़ के आंकड़े पर मांगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने बुधवार, 12 अगस्त को भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (केटीआर) पर सीधा हमला बोला और आरोप लगाया कि वे जमीन आवंटन को लेकर तथ्यहीन दावे फैलाकर आम जनता को भ्रमित कर रहे हैं। हैदराबाद स्थित राज्य कांग्रेस मुख्यालय गांधी भवन में आयोजित 'आमने-सामने' कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ने दर-दर-दर के आंकड़े रखते हुए केटीआर के दावों को खारिज किया।
जमीन दर का विवाद: सरकार का पक्ष
श्रीधर बाबू ने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती बीआरएस सरकार ने जमीन मात्र ₹90 लाख प्रति एकड़ की दर से आवंटित की थी, जबकि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने ₹1.50 करोड़ प्रति एकड़ की दर से आवंटन किया है। उन्होंने कहा कि पाँच एकड़ जमीन ₹7.5 करोड़ में आवंटित की गई — और यह आवंटन पूरी तरह निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार हुआ है।
मंत्री ने केटीआर से सीधा सवाल किया कि ₹200 करोड़ का आंकड़ा उन्होंने किस आधार पर दिया, और इसका स्रोत सार्वजनिक करें। उनका कहना था कि यह आंकड़ा तथ्यों पर आधारित नहीं है।
केटीआर का मूल आरोप क्या था
बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष केटीआर ने आरोप लगाया था कि तेलंगाना सरकार ने फ्यूचर सिटी के निकट लगभग ₹200 करोड़ मूल्य की पाँच एकड़ जमीन टेसरैक्ट एडवांस्ड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित की है, जिसका कथित तौर पर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भाई कोंडल रेड्डी से संबंध है। श्रीधर बाबू इसी आरोप का खंडन कर रहे थे।
बीआरएस पर पलटवार और केसीआर का संदर्भ
मंत्री ने केटीआर को चुनौती दी कि वे तेलंगाना के किसानों को बताएं कि पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) के फार्महाउस में उगाए गए धान का किसानों को क्या मूल्य मिला था। उन्होंने बीआरएस नेताओं पर 'गोएबल्स शैली के प्रचार' में लिप्त रहने का आरोप लगाया और कहा कि लोकसभा तथा स्थानीय निकाय चुनावों में जनता ऐसे प्रचार को पहले ही नकार चुकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि उद्योगपतियों के बीच डर का माहौल बनाना तेलंगाना के विकास के लिए हानिकारक है और केटीआर से आग्रह किया कि वे अपनी राजनीतिक नाराजगी का खामियाजा आम जनता को न भुगतने दें।
जल अधिकार और गोदावरी बोर्ड बैठक
श्रीधर बाबू ने बीआरएस सरकार पर जल बंटवारे के मामले में तेलंगाना के हितों को नुकसान पहुँचाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान कांग्रेस सरकार राज्य के जल अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगी। राज्य सरकार गोदावरी नदी प्रबंधन बोर्ड (जीआरएमबी) की आगामी बैठक में भाग लेकर तेलंगाना के उचित हिस्से के लिए मजबूती से पक्ष रखेगी।
आमने-सामने कार्यक्रम की पहल
यह संवाद-सत्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ की उस पहल का हिस्सा है, जिसके तहत हर सप्ताह एक मंत्री जनता से सीधे रूबरू होकर उनकी समस्याएं सुनेगा। मंत्री ने कहा, 'यह एक निरंतर चलने वाला कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य आम लोगों के साथ जुड़ाव बनाए रखना और लंबित समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है।' यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस और बीआरएस के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है और जमीन आवंटन नीतियाँ विपक्ष के लिए प्रमुख हथियार बन चुकी हैं।