लाहौर में 'राम गली' और 'हरि घाट' के नाम बहाल: इमरान मसूद बोले, 'विरासत मिटाने की गलती का अहसास हुआ पाकिस्तान को'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 24 मई को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लाहौर की सड़कों के विभाजन-पूर्व नाम बहाल किए जाने पर कहा कि जब कोई समाज अपनी विरासत और इतिहास को मिटाने की कोशिश करता है, तो समय के साथ उसे अपने फैसलों के परिणामों का एहसास होता है। उन्होंने इस कदम को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि अतीत की गलतियों को स्वीकार करने का प्रयास बताया।
लाहौर में ऐतिहासिक नामों की वापसी
मसूद ने कहा कि लाहौर में 'राम गली', 'सुदर्शन चौक' और 'हरि घाट' जैसे ऐतिहासिक स्थलों को न केवल उनके पुराने नाम लौटाए जा रहे हैं, बल्कि उन्हें दोबारा विकसित और सुंदर भी बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में अब हिंदुओं की संख्या बहुत कम रह गई है, फिर भी वहाँ पुराने हिंदू नामों को बहाल किया जाना एक उल्लेखनीय सांस्कृतिक संकेत है।
मसूद के अनुसार, यह कदम सामाजिक विभाजन के दाग को मिटाने का प्रयास भी माना जा सकता है। उन्होंने जोड़ा कि इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना किसी भी समाज की बुनियादी जिम्मेदारी होती है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर चिंता
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के भारत दौरे और भारत-अमेरिका समझौतों पर टिप्पणी करते हुए मसूद ने कहा कि उन्हें यह स्पष्ट नहीं है कि रूबियो की यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या होगा। हालाँकि, उन्होंने आरोप लगाया कि भारत द्वारा अमेरिका के साथ किए गए कुछ समझौते देश की आम जनता के हित में नहीं दिखाई देते।
मसूद ने कहा कि भारत अभी भी एक विकासशील देश है और महंगाई का सबसे ज़्यादा असर गरीब व मध्यम वर्ग पर पड़ता है। उनके अनुसार, बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों का भी प्रभाव है।
दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद पर रुख
केंद्र सरकार द्वारा ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन पर दोबारा कब्जा लेने और उसे पुनः संचालित करने के आदेश पर भी मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिमखाना क्लब मुख्य रूप से एलीट वर्ग से जुड़ा संस्थान माना जाता है और इस मुद्दे पर हो रही चर्चा आम जनता की रोज़मर्रा की समस्याओं से कटी हुई दिखाई देती है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गौरतलब है कि लाहौर में विभाजन-पूर्व नामों की बहाली कोई पहली घटना नहीं है — पाकिस्तान में हिंदू और सिख विरासत स्थलों के संरक्षण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में छिटपुट प्रयास होते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि ये कदम अक्सर प्रतीकात्मक रहते हैं और ज़मीनी स्तर पर अल्पसंख्यकों की स्थिति में बदलाव नहीं लाते। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान संबंध तनावपूर्ण दौर से गुज़र रहे हैं और दोनों देशों में विरासत-राजनीति की बहस तेज़ है।
मसूद की टिप्पणियाँ उस व्यापक विमर्श का हिस्सा हैं जिसमें उपमहाद्वीप के विभाजन की विरासत, सांस्कृतिक स्मृति और राजनीतिक पहचान के बीच के जटिल रिश्ते को समझने की कोशिश की जा रही है।